नई व्यवस्था से किडनी मरीजों को होगा फायदा सदर अस्पताल में नई व्यवस्था पर काम चल रहा है। इसके शुरू होने से अस्पताल में आने वाले किडनी रोगियों को काफी फायदा मिलेगा। वैसे रोगी जिन्हें सप्ताह में दो-तीन दिन डायलिसिस करानी होती है। उनके पास आयुष्मान कार्ड या किसी तरह के इंश्योरेंस का लाभ नहीं होता। गरीब होने के बावजूद उन्हें प्रति डायलिसिस 1200 रुपए सदर अस्पताल में ही देने होते हैं। अब इससे भी निजात मिलेगी। दरअसल, हंस फाउंडेशन द्वारा सदर अस्पताल में दो माह के भीतर डायलिसिस यूनिट सेटअप किया जाना है। इसके लिए सिविल सर्जन ने हंस फाउंडेशन के साथ उनके प्रपोजल पर चर्चा भी की है। सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार ने बताया कि 20 बेड में यह सुविधा मरीजों को मिलेगी। यह पूरी तरह से निश्शुल्क होगी। वर्तमान व्यवस्था के तहत एजेंसी द्वारा कुछ न्यूनतम शुल्क लिए जाते हैं, वह व्यवस्था यथावथ रहेगी। लेकिन नई व्यवस्था के तहत 20 बेड का अलग सेटअप होगा, जिसमें गरीब से गरीब रोगियों का डायलिसिस किया जाएगा, जिनको किसी तरह की सरकारी सुविधा का लाभ नहीं मिलता। रोज 50 रोगियों की हो सकेगी डायलिसिस सदर अस्पताल में हर दिन करीब 10 से ज्यादा मरीज वेटिंग में भी रहते हैं। क्योंकि वर्तमान व्यवस्था के तहत 24 घंटे में अधिकतम 25 से 30 मरीज की ही डायलिसिस करने की क्षमता है। कई बार वेटिंग में मरीज की स्थिति बिगड़ने लगती है। नई व्यवस्था के लागू होने से एक साथ 24 घंटे में करीब 50 रोगियों की डायलिसिस हो सकेगी। सिविल सर्जन ने कहा कि हंस फाउंडेशन दो-तीन सीएचसी में भी डायलिसिस की सेवा शुरू करेगा। हर दिन 25 से ज्यादा लोग कराते हैं डायलिसिस सदर अस्पताल में डायलिसिस को लेकर भरोसा बढ़ा है। सरल प्रक्रिया के तहत मरीज यहां डायलिसिस कराते हैं। रिम्स में प्रक्रिया थोड़ी जटिल है। सदर में वर्तमान में 20 बेड पर सेवा जारी है। हर दिन 25 से ज्यादा मरीज डायलिसिस कराते हैं। इनमें अधिकतर आयुष्मान योजना के लाभार्थी हैं। अस्पताल पहुंचने के बाद एक से डेढ़ घंटे के भीतर डायलिसिस शुरू होती है, जिसके बाद पांच से छह घंटे में उन्हें डिस्चार्ज कर दिया जाता है।


