भास्कर न्यूज| लुधियाना। अत्यधिक काम का दबाव मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहा है। लगातार तनाव, नींद की कमी और कार्यस्थल पर दबाव के कारण व्यक्ति एंग्जायटी, डिप्रेशन और बर्नआउट का शिकार हो रहे हैं। लंबे समय तक इस स्थिति में रहने से न केवल उत्पादकता प्रभावित हो रही है, बल्कि रिश्ते और व्यक्तिगत जीवन भी प्रभावित हो रहे हैं। शहर के मनोचिकित्सकों के मुताबिक इससे बचने के लिए सही समय प्रबंधन, सीमाओं का निर्धारण और मानसिक विश्राम के लिए ब्रेक लेना जरूरी है। संतुलित जीवनशैली और कार्य प्रबंधन से मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत रखा जा सकता है और व्यक्ति अधिक प्रभावी तरीके से काम कर सकता है। नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और पर्याप्त नींद से शरीर और दिमाग को आराम मिलता है, जिससे तनाव का असर कम होता है। मनोवैज्ञानिकों और हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, अधिक काम करने से व्यक्ति की कार्यक्षमता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। किसी भी व्यक्ति के लिए ब्रेक लेना और खुद को मानसिक रूप से तरोताजा रखना उतना ही जरूरी है, जितना काम करना। माइंडफुलनेस, मेडिटेशन और पर्याप्त नींद से स्ट्रेस को नियंत्रित किया जा सकता है। लोगों को वर्क-लाइफ बैलेंस को प्राथमिकता देनी चाहिए। यदि कोई व्यक्ति लगातार मानसिक थकावट महसूस कर रहा है, तो उसे समय रहते अपने शेड्यूल में बदलाव करना चाहिए। काम और निजी जीवन के बीच संतुलन बनाएं। हर कुछ घंटे बाद 5-10 मिनट का ब्रेक लें। एक्सरसाइज और योग को दिनचर्या में शामिल करें। जरूरत से ज्यादा काम लेने से बचें। सोशल सपोर्ट सिस्टम बनाए रखें।परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताने से मानसिक शांति मिलती है। कठिन समय में अपनी भावनाओं को साझा करना जरूरी है।अगर तनाव लंबे समय तक बना रहता है और काम पर असर डाल रहा है, तो मनोवैज्ञानिक या काउंसलर की सलाह लेना फायदेमंद हो सकता है। केस 1 : एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम करने वाले 33 साल के युवक की 14-16 घंटे काम करना दिनचर्या बन गई थी। कुछ ही महीनों में एंग्जायटी अटैक्स आने लगे और याददाश्त कमजोर होने लगी। डॉक्टरों ने काम के घंटे सीमित करने, एक्सरसाइज करने और माइंडफुलनेस अपनाने की सलाह दी। धीरे-धीरे काम का संतुलन बनाया और अब पहले से बेहतर महसूस कर रहे हैं। केस 2 : 35 साल की वर्किंग वुमेन का हाई प्रेशर के कारण मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हुआ। वह तनाव और नींद की कमी के कारण डिप्रेशन में चली गईं। थेरेपी और योग की मदद से अपनी स्थिति में सुधार किया और अब वह एक बैलेंस्ड वर्क रूटीन अपनाकर काम कर रही हैं। केस 3 : अपना खुद का बिजनेस शुरू करने के जुनून में 28 साल की युवती दिन-रात मेहनत करती थीं, जिससे तनाव और थकावट महसूस होने लगी। सेहत बिगड़ने लगी और आत्मविश्वास कम हो गया। मेंटरशिप, कार्य विभाजन और खुद को समय देने से अपनी स्थिति को सुधारा और अब बेहतर तरीके से काम कर रही है।


