लुधियाना| जैसे-जैसे केंद्रीय बजट 2025 नजदीक आ रहा है, भारत की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली सुधार की राह देख रही है। सांसद संजीव अरोड़ा ने कहा कि अस्पताल का बिल किसी के लिए वित्तीय सज़ा नहीं बनना चाहिए। उन्होंने जर्मनी और जापान की तर्ज पर स्वतंत्र निरीक्षण निकायों को बजट में धन आवंटित करने की जरूरत बताई, ताकि अस्पतालों की लागत और सेवा की गुणवत्ता में संतुलन आ सके। अरोड़ा ने कहा कि भारत की आर्थिक वृद्धि के बावजूद सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा पर खर्च जीडीपी का मात्र 1.9% है, जो वैश्विक औसत 10.38% से बहुत कम है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 के अनुसार यह 2025 तक 2.5% होना चाहिए था, लेकिन यह लक्ष्य अब तक पूरा नहीं हुआ। उन्होंने सरकार से स्वास्थ्य सेवा के लिए जीडीपी का कम से कम 5% खर्च करने की मांग की। बीमा सेवाओं पर उन्होंने कहा कि ईएसआईसी की आय सीमा 21 हजार रुपये लंबे समय से जस की तस है, जिससे कई निम्न आय वर्ग के लोग किफायती स्वास्थ्य कवरेज से वंचित रह जाते हैं। साथ ही, धारा 80डी के तहत कर कटौती बढ़ाने और दीर्घकालिक बीमारियों के लिए अलग से छूट देने की जरूरत है।


