सारंडा में अब तक 17 नक्सली मारे गए:71 घंटे से जंगल में कमांडो, 20 किमी दायरे में इनामी मिसिर बेसरा, सर्च जारी

गुरुवार को सारंडा में नक्सलियों का सबसे बड़ा एनकाउंटर हुआ। यह एनकाउंटर पिछले 71 से रुक-रुक कर अब भी जारी है। जंगल के भीतर सर्च ऑपरेशन लगातार चला रहे हैं। सर्च ऑपरेशन के बीच-बीच में फायरिंग की आवाजें बाहर आ रही है। इसी कड़ी में शुक्रवार को भी मुठभेड़ जारी रहा। इसमें दो और नक्सली मारे गए। एक नक्सली को जिंदा पकड़ा गया है। मरने वालों में एक महिला नक्सली भी है। इस तरह अब तक 17 नक्सली मारे गए हैं। इधर, नक्सलियों की फायरिंग के कारण कुमडी जंगल में पड़ी लाशों को नहीं निकाला जा सका। जिले के गोइलकेरा, मनोहरपुर, सोनुवा आदि जगहों से सीओ, बीडीओ को बुलाया गया। मजिस्ट्रेट के रूप में उनकी तैनाती है। लेकिन दूसरे दिन शुक्रवार को दोबारा एनकाउंटर शुरू हो जाने के कारण मजिस्ट्रेट भी जंगल में नहीं जा सके। सभी किरीबुरु के सैडल चेकनाके पर दिन भर खड़े रहे। देर शाम जंगल भेजे गए ट्रैक्टर जानकारी के मुताबिक देर शाम छह बजे कई ट्रैक्टर जंगल में भेजे गए, ताकि लाशों को निकाला जा सके। वहीं गुरुवार को एनकाउंटर में मारे गए 15 नक्सलियों की लाशों को निकालने की सूचना के बाद डीजीपी को चाईबासा आना था। पर फिर गोलीबारी शुरू होने से डीजीपी का दौरा रद्द कर दिया गया। अब वे रांची से ही ऑपरेशन पर नजर बनाए हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस इलाके को नक्सल मुक्त करने के बाद ही यहां ऑपरेशन बंद होगा। 20 किमी दायरे में नक्सली मिसिर बेसरा सीआरपीएफ के आईजी साकेत सिंह ने कहा कि जिस इलाके में मुठभेड़ हुई, उसी के 20 किमी दायरे में एक करोड़ रुपए का इनामी ​नक्सली मिसिर बेसरा छिपा है। वह अनल के दस्ते से अलग रहता है। नक्सलियों का राशन खत्म, इसी सूचना पर घेरे गए सारंडा में सुरक्षा बल कई महीनों से नक्सलियों को ट्रैक कर रही थी। मुख्य रास्तों पर चेकनाका लगाकर जांच की जा रही थी। रसद और लेवी के सोर्स पर पुलिस की नजर होने के बाद उनके पास खाने-पीने के सामान खत्म हो गए थे। रसद की तलाश में अनल का दस्ता इधर आ रहा था। इसकी सूचना पर चार दिन तक ट्रैकिंग की गई। सूचना वेरिफाई होने के बाद कमांडो जंगल में उतरे। जंगल में कई कैंप हैं। बाहर से भोजन व रसद आना बंद हो गया। इसके बाद जंगल के अंदर बसे कुछ घरों में आकर बंदूक के बल पर भोजन पानी मांग लेते हैं और खाकर वापस चले जाते थे। सुरक्षा बलों को इसकी जानकारी मिली । इसके बाद फोर्स के जवान उन्ही इलाकों में घुसे, जहां नक्सली भोजन-पानी मांग रहे थे। नक्सली अहले सुबह जंगल में बसे कुछ घरों से भोजन-पानी की व्यवस्था करने के लिए आ रहे थे। सूचना मिलते ही सुरक्षा बलों ने उन्हें घेर लिया। दोनों तरफ से गोली चली और नक्सली घिरते चले गए। जंगल में ही 71 घंटे से कमांडो, बार-बार मुठभेड़ पिछले 71 घंटे यानी 21 जनवरी से ही कोबरा के तीन बटालियन 209, 203 व 207 के कमांडो रात-दिन जंगल में डटे हुए हैं। इसके अलावा सीआरपीएफ व झारखंड जगुआर के करीब तीन हजार जवानों ने नक्सलियों की घेराबंदी कर रखी है। रात में तो जंगल में सब कुछ शांत रहता है, लेकिन सुबह होते ही नक्सली फायरिंग शुरू कर देते हैं। हालांकि सूचना यह भी है कि एक करोड़ के बड़े इनामी नेता मिसिर बेसरा घेरा गया है। पर इसकी सटीक जानकारी दूसरे दिन कोई शेयर नहीं कर रहा है। हालांकि अधिकारी कह रहे हैं कि इलाके को नक्सल मुक्त करने के बाद ही हटेंगे। गुरुवार को यहां मारे गए थे 15 नक्सली सारंडा जंगल में गुरुवार को मुठभेड़ में सुरक्षा बलों ने 15 नक्सलियों को मार गिराया था। ऑपरेशन मेगाबुरू के दौरान कुमडी गांव के पास हुई इस मुठभेड़ में मारे गए 15 नक्सलियों में से पांच इनामी नक्सली थे। इनमें 100 से अधिक नक्सली वारदातों का मास्टरमाइंड और 2.35 करोड़ रुपए का इनामी अनल उर्फ पतिराम मांझी भी शामिल है।

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