सफलता का अमृत पाने के लिए संघर्ष का विष पीना और धैर्य जरूरी: राकेश

भास्कर न्यूज | पटना ग्राम पंचायत छिन्दिया में श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का आयोजन किया गया है। गुरुवार को भगवान के विभिन्न अवतारों और भक्त-वत्सलता की कथाओं ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कथावाचक पंडित राकेश शुक्ला ने कहा कि जब भक्त की पुकार सच्ची होती है, तो भगवान को खंभे से भी प्रकट होना पड़ता है। नरसिंह अवतार के माध्यम से अधर्म के विनाश और अटूट विश्वास की महिमा बताई। वहीं, वामन अवतार की कथा सुनाते हुए उन्होंने समझाया कि भगवान केवल भक्ति के भूखे हैं और वे राजा बलि के माध्यम से संसार को विनम्रता का पाठ पढ़ाते हैं। पंडित शुक्ला ने समुद्र मंथन के प्रसंग को मानव जीवन से जोड़ते हुए कहा जीवन में सफलता रूपी अमृत प्राप्त करने के लिए संघर्ष के विष को पीना और धैर्य बनाए रखना अनिवार्य है। समुद्र मंथन हमें टीम वर्क और परिश्रम की सीख देता है। साथ ही गजेंद्र मोक्ष की कथा के माध्यम से उन्होंने बताया कि जब संसार के सभी सहारे छूट जाते हैं, तब केवल ईश्वर की शरण ही जीव का उद्धार करती है। कथा के दौरान भजनों की प्रस्तुति पर श्रद्धालु झूम उठे, जिससे पूरा पंडाल भक्ति के रंग में सराबोर हो गया। कथावाचक ने कहा कि भागवत श्रवण से न केवल मन शुद्ध होता है, बल्कि परिवार और समाज में सकारात्मक ऊर्जा व शांति का संचार होता है।

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