राष्ट्रगीत वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में कला, साहित्य, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग द्वारा सुखमहल में शनिवार को विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इन आयोजनों में विचार गोष्ठी, प्रश्नोत्तरी और वंदे मातरम गायन शामिल थे। कार्यक्रम का शुभारंभ पुरातत्व अधीक्षक जयपुर नीरज त्रिपाठी, पर्यटन अधिकारी प्रेमशंकर सैनी और इंटेक संयोजक राजकुमार दाधीच ने किया। संग्रहालय अधीक्षक जगदीश वर्मा ने अतिथियों का स्वागत किया। इस अवसर पर छात्र-छात्राओं से देश भक्ति से संबंधित प्रश्न पूछे गए। सही उत्तर देने वाले विद्यार्थियों को अतिथियों द्वारा पुरस्कृत किया गया। इसके अतिरिक्त, विद्यार्थियों को राष्ट्रगीत वंदे मातरम की गाथा बताई गई और सामूहिक रूप से इसका गायन भी किया गया। पुरातत्व अधीक्षक नीरज त्रिपाठी ने कहा कि आजादी की लड़ाई में वंदे मातरम गीत ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने इसे एक मंत्र, ऊर्जा और सपना बताते हुए कहा कि यह गीत भारत की आजादी की लड़ाई में अमर रहा है और आज भी मातृभूमि के प्रति समर्पण, एकता और स्वाभिमान का प्रतीक है। इंटेक संयोजक राजकुमार दाधीच ने वंदे मातरम गीत के इतिहास पर प्रकाश डाला और बूंदी के इतिहास की जानकारी दी। इस कार्यक्रम में पूरा अन्वेषक ओमप्रकाश कुक्की, नारायण मण्डोवरा, अश्विनी शर्मा और अमन शर्मा सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन इंटेक सचिव राजेंद्र भारद्वाज ने किया।


