कॉलेज स्टूडेंट अपने खर्चे पर करता पशुओं का इलाज:सड़क हादसों में घायल बेसहारा पशुओं के लिए बना देवदूत

करौली जिले के सपोटरा क्षेत्र में एक छात्र कॉलेज की पढ़ाई के साथ घायल और बेसहारा पशुओं की निस्वार्थ सेवा कर रहा है। यह छात्र अपने निजी खर्च पर सड़क हादसों में घायल पशुओं का इलाज करता है। गवर्नमेंट कॉलेज, सपोटरा में बीएससी द्वितीय वर्ष के छात्र आशुतोष भोजावत दिन में अपनी पढ़ाई करता है। शाम होते ही वे सड़कों, गलियों और हाईवे पर घायल पशुओं की तलाश में निकल पड़ता है, ताकि उनकी मदद कर सके। आशुतोष दुर्घटनाओं में घायल, बीमार या बेसहारा पशुओं को देखते ही तुरंत मौके पर पहुंचता है। कई बार वह स्वयं ऐसे पशुओं को खोज निकालता है। वे बिना किसी सरकारी सहायता या संस्था के सहयोग के अपने निजी खर्च पर पशुओं का प्राथमिक उपचार करता है। इस सेवा कार्य में दवाइयां, मरहम-पट्टी, एंटीबायोटिक, इंजेक्शन, पट्टियां और जरूरत पड़ने पर वाहन की व्यवस्था तक का खर्च वे स्वयं वहन करता है। आशुतोष का यह सेवा कार्य पूरी जिम्मेदारी और समझ के साथ किया जाता है। सीमित आर्थिक संसाधनों के बावजूद उनका हौसला बना रहता है। अब तक वे कई घायल और असहाय पशुओं की जान बचा चुका है। आशुतोष गवर्नमेंट कॉलेज, सपोटरा की राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) इकाई का सक्रिय स्वयंसेवक भी है। वह विभिन्न सामाजिक गतिविधियों में भी भागीदारी निभाता है। सेवा के साथ-साथ उसकी शैक्षणिक उपलब्धियां भी उल्लेखनीय है। उसने डॉ. अंबेडकर फाउंडेशन द्वारा आयोजित जिला स्तरीय निबंध प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। कृषि विषय का छात्र होने के कारण आशुतोष प्रकृति, पर्यावरण और जीव-जंतुओं के संरक्षण को अपने जीवन का अहम हिस्सा मानता है। वह युवाओं से अपील करता है कि मूक पशुओं के प्रति संवेदना रखना भी समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है और थोड़े से प्रयास से किसी बेजुबान की जिंदगी बचाई जा सकती है।

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