मां नर्मदा को प्रदूषण मुक्त करने और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने केंद्रीय जेल नर्मदापुरम ने एक पहल की है। जेल में सजा काट कर कैदियों ने आटे और पत्ते के दीपक तैयार कर मां नर्मदा के लिए सेवा का अनूठा उदाहरण पेश किया है। इन 50 हजार दीपकों को मां नर्मदा जयंती की शाम को नर्मदा में छोड़े जाएंगे। जिससे मां नर्मदा की अविरल धारा इन दीपकों की रोशनी से जगमगाएंगे। जल संरक्षण की भावना को साकार करते हुए केन्द्रीय जेल नर्मदापुरम के कैदियों ने प्रतिवर्ष अनुसार इस वर्ष भी मां नर्मदा प्रकटोत्सव के अवसर पर दीप प्रज्ज्वलन के लिए 50 हजार आटे एवं पत्तों के पर्यावरण अनुकूल दीपक तैयार किए जा रहे है। प्रदूषण को रोकने एवं प्रकृति के संरक्षण के लिए जेल के कैदियों ने आटा एवं पत्तों के दीपक बनाने की पहल की गई। माँ नर्मदा प्रकटोत्सव पर मां नर्मदा को प्लास्टिक, सिंथेटिक कागज के दीपकों के उपयोग को हतोत्साहित करना तथा नदी को प्रदूषण मुक्त रखने का संदेश देने कैदियों द्वारा आटे एवं पत्तों के दीपक तैयार किए है। आटे एवं पत्तों के दीपक बनाने का उद्देश्य माँ नर्मदा को प्रदूषित होने से रोकना और स्थानीय नागरिकों को जागरूक करने का एक छोटा सा प्रयास है। जहां आटे के दीपक से नर्मदा नदी में किसी भी प्रकार का प्रदूषण नहीं होता एवं आटे के दीपक गलकर मछलियों के आहार के काम आते है। केन्द्रीय जेल नर्मदापुरम के कैदी माँ नर्मदा जयंती महोत्सव के लिए आटे के दीपक बनाकर निशुल्क रूप से प्रदाय कर जल संरक्षण में जागरूकता लाने का प्रयास कर रहे हैं वहीं माँ नर्मदा के प्रति बंदियों में आस्था एवं विश्वास में वृद्धि हो रही है, जो कि जेल के लिए एक सकारात्मक पहलू है। केंद्रीय जेल खण्ड ब के असिस्टेंट जेल अधीक्षक ऋतुराज डांगी ने बताया कि कैदियों द्वारा जेल में लगे पेड़ जिनके बड़े पत्ते हैं, उनके दीपक बनाने के साथ ही आटे के दीपक भी बनाए जा रहे हैं। जो की नर्मदा जयंती के दिन सभी घाटों पर वितरण किए जाएंगे। साथ ही पर्यावरण और मां नर्मदा को दूषित होने से बचाने के लिए कैदियों की सहभागिता दी जाएगी। उन्होंने बताया कि एक दिन जेल अधीक्षक के द्वारा जेल में भ्रमण किया जा रहा था। जेल में लगे हुए पेड़ों से काफी पत्ते गिरते थे, जिन्हें हम एकत्रित कर कचरे की गाड़ी में डाल दिया करते थे। तभी विचार आया कि क्यों ना इस बार इन पत्तों से दीपक बनकर नर्मदा जयंती पर घाटों पर वितरण किए जाएं। जिससे कि पर्यावरण संरक्षण और मां नर्मदा के पानी और कागज के दीपकों से मुक्ति मिलेगी और मां नर्मदा का जल दूषित नहीं होगा। यही सोचकर लगभग 50,000 आटे के दीपक और पत्तों के 5000 दीपक बनाने का काम कैदी ने किया है।


