रांची में हाड़ कंपाने वाली ठंड के बीच रेलवे आैर जिला प्रशासन संयुक्त रूप से अतिक्रमण हटाने में जुटा है। बिरसा चौक से पहले रेलवे की जमीन पर अतिक्रमण करके करीब 44 साल से झुग्गी-झोपड़ी बनाकर रह रहे लोगों के घर तोड़ दिए गए। रविवार को प्रशासन ने करीब 100 घरों को ध्वस्त कर दिया। नागेश्वर पेट्रोल पंप से लेकर सैटेलाइट चौक की आेर जाने वाले रास्ते में रेलवे की जमीन पर बने सभी घरों को तोड़ दिया गया। भारी सुरक्षा के बीच एक-एक घर पर पोकलेन का पंजा चला। देखते ही देखते मिट्टी, ईंट आैर बांस-बल्ली से बनाए गए घर जमींदोज होते चले गए। दो दिनों में रेलवे आैर प्रशासन ने करीब 205 परिवारों का आशियाना उजाड़ दिया। एक तरफ, ठिठुरन वाली रात में जहां सड़क पर बेघर पड़े लोगों को उठाकर आश्रय गृह में पहुंचाया जा रहा है। वहीं दूसरी आेर, वर्षों से रह रहे लोगों को बेघर किया जा रहा है। अतिक्रमण हटने के बाद रेलवे ने जमीन अपने कब्जे में ले लिया। अब उक्त जमीन पर रेलवे ट्रैक बिछेगी। किराये का घर नहीं ले पाए बुजुर्ग महिला कुसुम बोली 40 साल से इस जगह पर रह रहे थे। अचानक घर उजाड़ दिया गया है। इतना भी समय नहीं िदया कि किराये पर घर ले सकंे। एक आेर सरकार गरीबों को बसा रही है, वहीं जिला प्रशासन उजाड़ रहा है। अतिक्रमण हटने के बाद मलबे से करकट का सामान निकालते हुए राजू एक्का ने कहा कि दो-तीन साल पहले नोटिस मिला था। घर खाली करना है। हम हेमंत सोरेन के सत्ता में आने से खुश थे कि अब गरीबों का भला होगा, लेकिन घर ही उजड़ गया। सरकार मदद करे। वापस गांव जाना पड़ेगा बुजुर्ग खाखा ने कहा कि 44 साल से पूरा परिवार यहीं रह रहा है। सालों पहले रेलवे के अफसरों ने ही काम करने के दौरान कहा था, यहीं घर बनाकर रहो। अब झोपड़ी टूट जाने के बाद मजबूरी में अपने गांव जाना होगा। घर उजड़ने के बाद भुक्तभोगियों ने कहा… अतिक्रमणकारियों ने पहले समय मांगा फिर विरोध किया, पुलिस देखकर सड़क पर सामान लेकर बैठ गए रेलवे की जमीन से अतिक्रमण हटाने पहुंची रेलवे पुलिस आैर जिला बल के जवानों को पहले विरोध का सामना करना पड़ा। लोगों ने कहा कि इस ठंड में छोटे-छोटे बच्चों को लेकर कहां जाएंगे। लोगों ने रेलवे से कहा था कि हमलोगों को समय दिया जाए, ताकि कहीं अपनी व्यवस्था कर सकें। लेकिन रेलवे के अधिकारियों ने समय देने से इंकार कर दिया। अधिकारियों ने कहा कि पहले भी कई बार समय दिया जा चुका है। पुलिस की सख्ती देखकर सभी अतिक्रमणकारी पीछे हट गए। 44 साल से रह रहे थे लोग, हाड़ कंपाने वाली ठंड में रेलवे-प्रशासन की कार्रवाई से आंखों में आ गए आंसू, कहा- फुटपाथ पर थे, अब सड़क पर आशियां उजड़ गया, गुबार देखते रहे… हाड़ कंपाने वाली ठंड में रेलवे-प्रशासन की कार्रवाई मां के कंधे पर दोहरी जिम्मेदारी… ईंट आैर बांस-बल्ली से बनाया घर जमींदोज हुआ तो नया आशियाना बनाने के लिए महिला एसबेस्टस शीट निकालने लगी। पीठ पर गमछे से बंधा बच्चा बेफिक्र सो रहा था। पर मां को आशियाने की चिंता सता रही थी।


