57 साल से फरार हत्यारा…10 दिन में गिरफ्तारी की कहानी:दिल्ली में कॉन्ट्रैक्टर बनकर शानदार जीवन जी रहा था, सोचा- पुलिस केस भूल गई है

57 साल पुराना मर्डर केस। उस वक्त पुलिस के पास न तकनीकी जांच के कोई इंतजाम थे न ही साइबर सेल जैसी स्पेशल टीमें। इसी का फायदा एक हत्यारे तक ने उठाया और फरार हो गया। हत्यारे की फोटो तक पुलिस के पास नहीं थी। कुछ समय तक पुलिस ने कोशिश की, लेकिन हत्यारा हाथ नहीं आया तो उम्मीद छोड़ दी। मर्डर की फाइल थाने में पड़ी धूल खाती रही। 57 साल बाद फाइल से जमी धूल हटी और महज 10 दिन में पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। 35 रुपए के लिए हत्या करने वाला 20 साल का आरोपी आज 77 साल का है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… साल 1968 में रामगंजमंडी के सातलखेडी माइन्स एरिया में भवाना दर्जी नामक युवक माइन्स में काम करता था। वहीं पर उसका दोस्त प्रभुलाल भी मजदूरी करता था। प्रभुलाल के पास एक साइकिल थी। भवाना ने वो साइकिल 35 रुपए में उससे खरीद ली। हालांकि इसके रुपए भवाना ने बाद में देने को कहा था। काफी दिन बाद भी रुपए नहीं मिले तो प्रभुलाल और भवाना के बीच झगड़ा हो गया। भवाना ने खान से एक पत्थर उठाकर प्रभुलाल पर फेंका था। प्रभुलाल के कंधे पर चोट आई। इसके बाद प्रभुलाल ने भी वही पत्थर उठाकर भवाना पर फेंक दिया। पत्थर भवाना के सिर पर लगा। वह वहीं बेहोश हो गया। दूसरे मजदूर उसे उठाकर हॉस्पिटल ले गए। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इधर, भवाना के बेहोश होने के साथ ही प्रभुलाल वहां से फरार हो गया था। पहले यह केस रामगंजमंडी थाने में दर्ज हुआ था। बाद में सुकेत थाना बनने के बाद केस फाइल सुकेत में आ गई थी। आरोपी की फोटो किसी के पास नहीं मिली। ऐसे में पुलिस उसे ढूंढ नहीं पाई। 3 साल बाद 1971 में आरोपी को कोर्ट ने भगोड़ा घोषित कर 25 हजार रुपए का इनाम घोषित कर दिया था। तब से फाइल रामगंजमंडी, फिर सुकेत थाने में पड़ी थी। मकान मालिक का सरनेम, असली नाम पता करने में मशक्कत
हाल ही में भवाना मर्डर की फाइल दोबारा खोली गई। एसएचओ छोटूलाल और उनकी टीम ने जांच शुरू की। स्पेशल टीम में शामिल कॉन्स्टेबल धीरज गोला ने अपने मुखबिरों को सक्रिय किया। धीरज गोला ने बताया कि जब फाइल देखी तो उसमें आरोपी का नाम प्रभुलाल लश्करी लिखा हुआ था। लश्करी समाज के लोग कोटा, बूंदी, झालावाड़ में जहां-जहां रहते हैं, वहां पर आरोपी के बारे में जानकारी जुटानी शुरू की गई। केस में दो मुख्य चश्मदीद गवाह थे, लेकिन अब उनसे भी संपर्क नहीं हो पा रहा था। बूंदी में जब मुखबिरों से पता करवाया तो सामने आया कि प्रभुलाल नाम का व्यक्ति नैनवां (बूंदी) में एक मकान में किराए से रहता था। उस मकान मालिक का सरनेम लश्करी था। ये जानकारी मिलने के बाद पुलिस टीम नैनवां पहुंची। नैनवां में जब मकान मालिक से जानकारी जुटाई तो सामने आया कि प्रभुलाल लश्करी समाज से नहीं था। वह किराए पर रहता था और मकान मालिक का सरनेम ही अपने नाम के साथ लगा देता था। वहां से पुलिस को यह जानकारी मिली कि प्रभुलाल टोंक के खातोला इलाके का था। सरकारी कर्मचारी बनकर किया कॉल, जुटाई जानकारी
आरोपी का गांव टोंक होने की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने इस दिशा में जांच बढ़ाई। टोंक के पुलिसकर्मियों और अपने सोर्स की मदद ली। मुखबिरों से एक व्यक्ति का पता चला, जो प्रभुलाल के समाज का ही था। स्पेशल टीम के धीरज ने बताया कि उस व्यक्ति से संपर्क कर प्रभुलाल के परिवार के बारे में जानकारी जुटाने की कोशिश की। उस व्यक्ति ने गांव के ही एक अन्य व्यक्ति के नंबर दिए। उस व्यक्ति से पुलिसकर्मियों ने सरकारी कर्मचारी बनकर बात की। उसने प्रभुलाल के पिता रामदेवा के बारे में बताया। सामने आया कि प्रभुलाल और चार भाई थे, जिनमें दो की मौत हो चुकी थी। प्रभुलाल की गांव में सात बीघा जमीन है। जांच में सामने आया कि प्रभुलाल दिल्ली में रह रहा है। इससे ये तय हो गया कि केस का आरोपी जीवित है और उसके पकडे़ जाने की संभावना है। सरकारी योजना का लाभ दिलाने का लालच, तब मिले मोबाइल नंबर
पुलिस को आरोपी के दिल्ली में होने की जानकारी तो मिल गई थी, लेकिन पुख्ता लोकेशन नहीं थी। ऐसे में आरोपी के रिश्तेदारों के बारे में जानकारी जुटानी शुरू की गई। प्रभुलाल ने अपने रिश्तेदारों से भी संपर्क खत्म सा कर दिया था। इस दौरान पुलिस प्रभुलाल के एक परिचित से मिली। पुलिसकर्मी धीरज ने खुद को पंचायत समिति का कर्मचारी बताया। प्रभुलाल के परिवार को सरकारी योजना में लाभ दिलाने की बात कही। इस पर उस परिचित ने बताया कि प्रभुलाल तो किसी से बात करता नहीं है। उसके बेटे के नंबर मिल सकते हैं। पुलिस ने प्रभुलाल के बेटे के नंबर ट्रेस किए। मोबाइल नंबर दिल्ली के मंगोलपुरी एरिया में एक्टिवेट होने की बात सामने आई। इसके बाद कोटा पुलिस ने दिल्ली पुलिस से संपर्क किया। दिल्ली पहुंचकर वहां एक दिन रेकी की। प्रभुलाल के मकान के आसपास पूछताछ की। सामने आया कि प्रभुलाल तो नहीं, लेकिन प्रेमसागर नाम का व्यक्ति यहां रहता है। प्रेमसागर मूल रूप से टोंक का है। इसके बाद पुलिस ने उसके घर पर दबिश दी। पुलिस की जानकारी लगते ही कबूला गुनाह
पुलिस के पास आरोपी प्रभुलाल की कोई पुरानी फोटो तक नहीं थी। ऐसे में पुलिस ने तमाम जानकारियां इकट्ठी करने और पुख्ता होने के बाद प्रेमसागर के घर दबिश दी। प्रेमसागर घर पर ही मौजूद था। जैसे ही उसे बताया कि कोटा पुलिस से हैं, वह घबरा गया। उसने कबूल कर लिया कि वही प्रभुलाल है और उसी ने मर्डर किया है। इसके बाद पुलिस उसे लेकर कोटा आ गई। आरोपी ने पूछताछ में बताया कि मर्डर करने के बाद वह सीधा पहले घर गया। वहां से भागकर दिल्ली आ गया। दिल्ली में उसके भाई और रिश्तेदार ठेकेदारी करते थे। वह भी उनके साथ रहकर ठेकेदारी करने लगा था। शुरुआत में उसने किसी को कुछ नहीं बताया था। कुछ दिन बाद उसके भाई व रिश्तेदारों को पता लग गया था कि वह मर्डर करके आया हुआ है। हालांकि इसके बाद भी उन लोगों ने पुलिस को सूचना नहीं दी। वहीं रहते हुए उसने शादी कर ली। बच्चों की भी शादी करवा दी। बच्चों और पोते-पोतियों के साथ रह रहा था। प्रभुलाल के दो बेटे देवेंद्र ओर योगेश हैं। दोनों ही कॉन्ट्रैक्टर हैं। बच्चे सोचते थे- पुलिस केस भूल चुकी
पुलिस पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसकी पत्नी और बच्चों को भी पता था कि उसने मर्डर किया है। घरवाले तो यह सोचकर बैठे थे कि इतने साल हो गए, केस में कुछ नहीं हुआ। उस समय केस की जांच करने वाले ही पुलिसकर्मी अब नहीं रहे होंगे तो दिल्ली जांच करने कौन आएगा। प्रभुलाल और उसका परिवार निश्चिंत था कि हत्या के मामले में उसकी गिरफ्तारी कभी नहीं होगी। दिल्ली में उसने अपना अच्छा व्यापार जमा लिया था। वह वहां ए क्लास कॉन्ट्रैक्टर बन गया था। बड़ी बिल्डिंग के निर्माण के ठेके लेता था। फिलहाल तबीयत खराब होने के चलते उसके बच्चे ठेकेदारी का काम संभाल रहे थे। मरने वाले के परिवार का भी पता लगा रहे
एसएचओ छोटूलाल ने बताया- अभी तक प्रभुलाल के हाथों मारे गए भवाना दर्जी के परिवार से कोई नहीं आया है। उनके बारे में भी प्रयास कर रहे हैं। एसएचओ ने बताया कि थाने में केस फाइल कभी बंद नहीं होती। ये फाइल पीओ फाइल होती है। इसमें आरोपी को कभी भी गिरफ्तार करने का वारंट होता है। आरोपी को कभी भी गिरफ्तार कर कोर्ट के सामने पेश कर सकते हैं। मामले का खुलासा करने वाले स्पेशल टीम के धीरज को एसपी ने सम्मानित करते हुए 5100 रुपए का पुरस्कार भी दिया है। एसएचओ ने बताया कि हाल ही में अधिकारियों ने भी थाने में विजिट किया था और पुरानी वारदातों के खुलासे के निर्देश दिए थे। इसके बाद से इस केस को चैलेंज के तौर पर लेते हुए इसमें जांच शुरू की। एसपी सुजीत शंकर ने बताया कि पुराने मामलों में आरोपियों को गिरफ्तार करने के निर्देश दिए गए थे। इसके लिए एएसपी रामकल्याण मीणा के सुपरविजन में सुकेत थाने की टीम गठित की गई थी। टीम ने इस केस में काम किया और आरोपी को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की।

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