नर्मदा कॉलेज के प्राचार्य का झलका दर्द:NSUI नेता से बोले- हम आपके भी दबाव में आ गए, लग रहा कॉलेज छोड़कर चले जाएं

नर्मदापुरम सम्भाग का सबसे बड़ा शिक्षण संस्थान पीएम श्री पीजी कॉलेज इन दिनों विवादों के घेरे में है। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. रामकुमार चौकसे हालिया घटनाक्रमों से बेहद परेशान नजर आ रहे हैं। शनिवार शाम एनएसयूआई छात्रों के कॉलेज गेट पर दिए गए धरने के दौरान प्राचार्य का दर्द छलक पड़ा। उन्होंने छात्रों के सामने हाथ जोड़ते हुए अपनी व्यथा व्यक्त की। प्राचार्य डॉ. चौकसे ने एनएसयूआई के पूर्व नेता रोहन जैन से कहा, हम तो आपके भी दबाव में आ गए। ऐसा लग रहा है कि हम यहां से छोड़कर चले जाएं। रिजाइन देने का अधिकार तो मुझे है। उनके इस बयान के बाद एनएसयूआई नेताओं ने प्रस्तावित पुतला दहन कार्यक्रम को रद्द कर दिया। बाहरी तत्वों पर रोक से उपजा विवाद कॉलेज प्रशासन की ओर से बाहरी तत्वों की एंट्री पर रोक लगाने और हॉस्टल में फर्जी तरीके से रह रहे युवकों को बाहर निकालने की प्रक्रिया शुरू करने के बाद से लगातार विवाद की स्थिति बनी हुई है। इसका असर कॉलेज परिसर में छात्रों के गुटों के बीच झगड़ों के रूप में भी देखा गया। तीन दिन पहले कॉलेज परिसर में एनएसयूआई प्रदेश सचिव आफरीद खान, छात्र नेता और अभाविप के पूर्व छात्र कृतिक शिवहरे, अभाविप के वर्तमान छात्र नेताओं के बीच मारपीट हो गई थी। इस झगड़े को लेकर दोनों पक्षों ने थाने में शिकायतें दर्ज कराई, लेकिन अब तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई है। शनिवार को मीडिया में प्रकाशित प्राचार्य के बयान से नाराज एनएसयूआई के कार्यकर्ता प्राचार्य का पुतला लेकर कॉलेज गेट पर धरने पर बैठ गए और जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने “सत्ता के दलालों को…” जैसे नारे लगाए, जिससे प्राचार्य व्यथित हो गए। प्राचार्य ने छात्रों को समझाया, धरना समाप्त प्राचार्य डॉ. चौकसे स्वयं गेट पर पहुंचे और बैठे हुए छात्र नेताओं से बातचीत की। उन्होंने कहा, “मेरा उद्देश्य कॉलेज को बेहतर बनाना और विद्यार्थियों के हित में कार्य करना है। लेकिन मुझ पर दबाव बनाकर मेरे लक्ष्य से विचलित करने की कोशिश की जा रही है।” करीब एक घंटे की चर्चा के बाद एनएसयूआई ने पुतला दहन कार्यक्रम को निरस्त कर दिया। तीन साल का ट्रांसफर नियम लागू करने की मांग प्राचार्य डॉ. चौकसे ने हायर एजुकेशन डिपार्टमेंट में प्रोफेसरों के लिए भी तीन साल में ट्रांसफर का नियम लागू करने की मांग की। उन्होंने कहा कि स्थानीय प्रोफेसर कई बार प्रशासनिक नियमों को तोड़ने में व्यक्तिगत संबंधों का लाभ उठाते हैं। उन्होंने आगे कहा कि मैं बाहरी व्यक्ति हूं, मेरा यहां कोई नहीं है। इसलिए मुझ पर प्रेशर बनाया जा रहा है ताकि मैं अपने मिशन से भटक जाऊं और कॉलेज पहले जैसी स्थिति में लौट आए।

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