मुनि बोले- मर्यादा साधु होने की लक्ष्मण रेखा:कहा- इसे लांघना खुद को खतरे में डालने जैसा; तेरापंथ समाज का संविधान दिवस

जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा, सवाई माधोपुर शहर के तत्वावधान में आयोजित 162वां मर्यादा महोत्सव रविवार मनाया गया। सवाई माधोपुर के पुराने शहर स्थित महावीर भवन में युग प्रधान आचार्य महाश्रमण के सुशिष्य मुनि अहर्त कुमार, भरत कुमार, जयदीप मुनि के पावन सान्निध्य में आयोजित किया गया। इस दौरान यहां समाज कुरीतियों को दूर करने के नाटक भी आयोजित किया गया। तेरापंथ के संविधान को समझाया जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा, सवाई माधोपुर शहर से जुड़े प्रभात जैन झंडे वालों ने बताया कि इस समारोह में वक्ताओं ने तेरापंथ धर्म संघ के संविधान और इसकी मर्यादाओं की महत्ता पर प्रकाश डाला। मुनि अहर्त कुमार ने कहा कि जैन धर्म कि महानता उसके सिद्धांतों में निहित है। उन्होंने आचार्य भिक्षु के दूरदर्शी दृष्टिकोण की चर्चा करते हुए बताया कि आचार्य भिक्षु द्रव्य, क्षेत्र, काल और भाव के गहन ज्ञाता थे। मर्यादाओं का निर्माण केवल नियमों के रूप में नहीं, बल्कि साधु-साध्वियों के भीतर निष्ठा और धैर्य जगाने के लिए किया था। मुनि ने कहा कि आचार्य भिक्षु ने कठोर अनुशासन के साथ-साथ आने वाले आचार्यों को मूल मर्यादा अक्षुण्ण रखते हुए समयानुकूल परिवर्तन का अधिकार भी दिया, जो उनकी प्रगतिशील सोच का परिचायक है। मर्यादा साधुत्व की लक्ष्मण रेखा मुनि अहर्त कुमार ने बहुत ही सटीक शब्दों में कहा कि मर्यादा साधुत्व की ‘लक्ष्मण रेखा’ है। यदि कोई साधु इसे लांघता है, तो वह अपने साधुत्व को ही खतरे में डालता है। मुनि प्रबोध कुमार ने मर्यादा महोत्सव को तेरापंथ धर्म संघ का ‘संविधान दिवस’ करार दिया।इस अवसर पर समाज के अध्यक्ष अशोक जैन, मंत्री संदीप गोयल एवम समस्त चोखडे के धर्मानुरागी उपस्थित रहे।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *