राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने पर रविवार को सूचना केन्द्र में दो दिवसीय जिला स्तरीय प्रदर्शनी का उद्घाटन कलेक्टर देवेंद्र कुमार ने किया। उन्होंने प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए कहा कि वंदे मातरम एक गीत नहीं, एक संकल्प है, एक अनुभूति है। यह गीत एक संकल्प के साथ आत्मीयता के साथ जोड़ता है। वंदे मातरम केवल एक शब्द नहीं है- यह एक मंत्र है, एक ऊर्जा है, एक स्वप्न है और एक पवित्र संकल्प है। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम मां भारती के प्रति भक्ति और आध्यात्मिक समर्पण का प्रतीक है। यह शब्द हमें हमारे इतिहास से जोड़ता है, हमारे वर्तमान को आत्मविश्वास से भर देता है और हमारे भविष्य को यह विश्वास दिलाने का साहस देता है कि कोई भी संकल्प पूर्ण होने से परे नहीं है, कोई भी लक्ष्य हमारी पहुंच से परे नहीं है। वंदे मातरम सिर्फ़ आज़ादी का गीत नहीं था-इसने करोड़ों भारतीयों के सामने एक स्वतंत्र भारत की एक तस्वीर भी पेश की। कलेक्टर ने जिला परिषद सीईओ बिरदी चंद गंगवाल, जनसंपर्क विभाग के उपनिदेशक सोहनलाल के साथ वंदे मातरम प्रदर्शनी का अवलोकन किया। कलेक्टर ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि वंदे मातरम गीत के राष्ट्रीय महत्व समझने के लिए प्रदर्शनी का अवलोकन करना चाहिए।


