देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से आज मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का पहला पूर्ण बजट पेश किया गया। यह टोटल बजट 50.65 लाख करोड़ का है। बजट में नौकरीपेशा के लिए 12.75 लाख तक की आय टैक्स फ्री की गई है। इसके अलावा महिलाओं के लिए 2 करोड़ तक का टर्म लोन, बुजुर्गों के लिए टैक्स में डबल छूट, युवाओं और रोजगार के लिए मेडिकल की 75,000 सीटें बढ़ाने सहित किसानों के लिए पीएम धन-धान्य योजना लागू करने की बात कही गई है। इस बजट को लेकर जोधपुर शहर में सत्ता पक्ष की ओर से बजट को सरह गया है, वहीं विपक्ष की ओर से बजट को निराशाजनक बताया गया है। सभी वर्गों के लिए समर्पित बजट को लेकर भारतीय जनता पार्टी के नेता और सूरसागर से विधायक देवेंद्र जोशी ने कहा कि बजट सभी वर्गों के लिए समर्पित है। इस बजट में आयकर में जो राहत प्रदान की गई है वह ऐतिहासिक है। इससे देश की आर्थिक स्थिति बेहतर होगी। बजट में पर्यटन क्षेत्र में विकास के लिए घरों में पर्यटकों को ठहराने वाले छोटे गेस्ट हाउस को भी मुद्रा लोन से जोड़कर पर्यटन के क्षेत्र में निश्चित रूप से विकास होगा। इसी प्रकार से सूक्ष्म, लघु, मध्यम श्रेणी के उद्योगों को केंद्र सरकार की गारंटी के माध्यम से लोन उपलब्ध करवाने और उसकी लोन सीमा में की गई बढ़ोतरी से इन श्रेणियां के उद्योगों को बड़े उद्योगों के साथ प्रतिस्पर्धा में सहायता मिलेगी। भारतीय जनता पार्टी जोधपुर देहात के जिला अध्यक्ष त्रिभुवन सिंह भाटी ने बताया कि बजट सभी वर्गों में लाभकारी होने के साथ ही अनुसंधान, विकास और इनोवेशन के अनुरूप उत्पादन तथा क्षमता में बढ़ोतरी वाला साबित होगा। दिवराया बोले- किसानों को कुछ नहीं मिला युवा कांग्रेस जोधपुर देहात के जिला अध्यक्ष पुखराज दिवराया ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से जारी किए गए बजट में युवाओं व किसानों को कुछ नहीं मिला। इस बजट से आम आदमी और सभी वर्ग विशेष को अपेक्षा थी, लेकिन उन्हें कोई खास राहत नहीं दी गई। यह सिर्फ आंकड़ों का मायाजाल है और डीजल पेट्रोल को सस्ता करने रोजगार देने का वादा भी झूठा निकला। बजट में पहले की तरह ही बिहार का विशेष ध्यान रखा गया है। ऐसा लगता है यह बजट देश का नहीं बिहार का है। विदेशी निवेश को बढ़ावा देने वाला बजट को लेकर जोधपुर के जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय के व्यवसायिक वित्त एवं अर्थशास्त्र विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. महेंद्र सामरिया ने बताया कि यह बजट वित्तीय अनुशासन, राजकोषीय घाटे को कम करने, मध्यम वर्ग के लिए क्रयशक्ति एवं उपभोग में वृद्धि, वित्तीय स्थिरता, निजी निवेश के साथ विदेशी निवेश को बढ़ावा देने वाला होगा।


