इंदौर के अरबिंदो हॉस्पिटल में शनिवार को एक मरीज बिल्डिंग की 5वीं मंजिल की गैलरी पर चढ़ गया। युवक को इस हाल में देखकर परिजनों की सांसें अटक गई। उन्होंने और हॉस्पिटल स्टाफ ने युवक को काफी समझाने का प्रयास किया लेकिन वह नीचे उतरने को राजी नहीं हुआ। उसे बचाने के लिए बड़ी क्रेन बुलवाई गई। एसडीआरएफ, पुलिस और स्टाफ नीचे तिरपाल, जाली, बेड शीट्स हाथों में पकड़कर करीब 3 घंटे तक खड़े रहे। आखिरकार वह खुद हॉस्पिटल में चला गया। गला काटकर किया था सुसाइड का प्रयास शहर के रामचंद नगर निवासी मरीज का नाम सियाराम (45) है। उसने पारिवारिक कारणों के चलते शुक्रवार को अपना गला काटकर आत्महत्या का प्रयास किया था।परिजन ने उसे हॉस्पिटल में एडमिट किया था। शनिवार दोपहर वह हॉस्पिटल के पांचवीं मंजिल स्थित सार्वजनिक टॉयलेट में गया और दरवाजा बंद कर लिया। बाहर उसका बेटा इंतजार कर रहा था। इस बीच सियाराम ने टॉयलेट के वेंटिलेशन के कांच की स्ट्रिप्स एक-एक कर निकालना शुरू कर दिया। तभी एक कांच गिरा तो बाहर लोगों का ध्यान गया। तब तक वह डक्ट से छज्जे पर (गैलरीनुमा) पर आ गया। फिर वहां से छलांग लगाने का प्रयास करता रहा। सूचना मिलने के बाद बाणगंगा पुलिस और एसडीआरएफ की टीम पहुंची और बचाने के प्रयास शुरू किए गए। चूंकि ऊंचाई ज्यादा थी इसलिए तब तक स्टाफ प्रबंधन ने मेट्रो प्रोजेक्ट में लगी क्रेन को वहां बुलवाया और उसे तक पहुंचने की कोशिश की। दूसरी ओर नीचे भी लोग तिरपाल, जाली बिछाकर उसे बचाने के लिए तैयार रहे। इस दौरान स्टाफ ने गैलरी से लगी खिड़की का कांच खोल दिया। फिर हर ओर से खुद को घिरा देख वह गैलरी से लगी खिड़की से वापस हॉस्पिटल की बिल्डिंग में लौटा तो सभी ने राहत की सांस ली। हॉस्पिटल सीईओ राजीव सिंह ने बताया कि उसकी हालत ठीक है। उसे तत्काल डिस्चार्ज कर दिया गया। बाणगंगा थाने के अमरसिंह गोनकर ने बताया- एक व्यक्ति खिड़की में से कूदने का प्रयास किया है। पुलिस प्रशासन और एनडीआरएफ की टीम ने बचाने का प्रयासकर समझाइश दी है।


