पुरातत्वविद् डॉ. नारायण व्यास को पद्म श्री:ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण में योगदान के लिए सम्मान

उज्जैन के सेवानिवृत्त पुरातत्वविद् डॉ. नारायण व्यास को भारत सरकार द्वारा पद्म श्री सम्मान से सम्मानित किया जाएगा। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के पूर्व सुप्रिटेंडेंट आर्कियोलॉजिस्ट व्यास के सम्मान की खबर सामने आते ही पुरातत्व जगत और उनके शुभचिंतकों में खुशी की लहर दौड़ गई। डॉ. व्यास वर्ष 2009 में सेवानिवृत्त हुए थे। वे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण में टेंपल सर्वे प्रोजेक्ट के इंचार्ज भी रह चुके हैं। अपने लगभग 37 वर्षों के सेवाकाल में उन्होंने मध्य प्रदेश, गुजरात और राजस्थान सहित कई राज्यों में ऐतिहासिक धरोहरों की खोज, संरक्षण और शोध कार्य में महत्वपूर्ण योगदान दिया। भीमबेटका, सांची, खजुराहो, बेसनगर और रायसेन किला जैसे प्रमुख स्थलों पर उनका कार्य विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा है। पद्म श्री सम्मान मिलने पर डॉ. व्यास ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, “यह सम्मान मेरे लिए नहीं, बल्कि उन अज्ञात लोगों की भावनाओं की पहचान है, जिनके लिए हमने जीवनभर काम किया। मोदी सरकार ने हमारी निस्वार्थ सेवा को समझा, इसके लिए मैं आभार व्यक्त करता हूं।” उन्होंने अपने साथियों को निस्वार्थ भाव से सेवा करने का संदेश भी दिया। जानकारी के अनुसार, डॉ. व्यास का पद्म श्री के लिए आवेदन उनकी भतीजी पूर्वा व्यास ने भरा था, जो स्वयं उज्जैन की विक्रम यूनिवर्सिटी से पुरातत्वविद् हैं। यह आवेदन डॉ. व्यास की व्यक्तिगत इच्छा पर किया गया था। डॉ. व्यास के परिवार में उनकी पत्नी हैं, जो पहले प्रिंसिपल रह चुकी हैं और वर्तमान में गृहिणी हैं। उनके दो बच्चे हैं; बेटा भारतीय सेना में लेफ्टिनन कर्नल है, जबकि बेटी डॉक्टर हैं। डॉ. व्यास छह भाइयों और दो बहनों वाले एक बड़े परिवार से संबंध रखते हैं। डॉ. नारायण व्यास को इससे पहले भी कई राष्ट्रीय पुरस्कार और सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। हालांकि, पद्म श्री सम्मान ने उनके जीवनभर के योगदान को देशभर में एक नई पहचान दिलाई है। यह सम्मान न केवल उनके लिए, बल्कि पूरे उज्जैन शहर के लिए भी गौरव का क्षण है।

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