जबलपुर में नर्मदा प्रकट उत्सव के अवसर पर मां नर्मदा की भव्य रथ यात्रा निकाली गई। संस्कारधानी भक्तिमय माहौल में डूबी रही, जहां श्रद्धालुओं ने जगह-जगह पुष्पवर्षा कर मां नर्मदा का स्वागत किया। इस आयोजन में विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां हुईं और बड़ी संख्या में महिलाओं ने कलश यात्रा में भाग लिया। रथ यात्रा का मुख्य आकर्षण मां नर्मदा का सुसज्जित रथ था, जिसे लोकनिर्माण मंत्री राकेश सिंह, महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू, भाजपा नगर अध्यक्ष रत्नेश सोनकर सहित कई संतों और श्रद्धालुओं ने लगभग एक किलोमीटर तक खींचा। ढोल-बाजों और भक्ति संगीत के साथ यह रथ यात्रा ग्वारीघाट पहुंची। यहां श्रद्धालुओं ने मां नर्मदा को तीन सौ मीटर लंबी चुन्नी अर्पित की और विधिवत आरती कर सुख-समृद्धि की कामना की। इस अवसर पर बड़ी संख्या में संत-महात्मा, जनप्रतिनिधि और आमजन उपस्थित थे। यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का संदेश देता है। संस्कारधानी में नर्मदा प्रकटोत्सव को लेकर जगह-जगह धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माघ शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मां नर्मदा का धरती पर प्राकट्य हुआ था। भगवान शिव के देह से उत्पन्न होने के कारण उन्हें शिवसुता कहा जाता है और उनकी उत्पत्ति मां गंगा से भी प्राचीन मानी जाती है। युगों से मां नर्मदा के आंचल में अनेक सभ्यताएं विकसित हुई हैं। उनका अमृतमय जल प्राणियों के कष्टों का निवारण करता आया है, जिसे वैज्ञानिक भी स्वीकार करते हैं। नर्मदा वैली की जैव विविधता आज भी इसका जीवंत प्रमाण है। प्रकटोत्सव के अवसर पर श्रद्धालुओं ने मां नर्मदा के संरक्षण, स्वच्छता और अविरल प्रवाह के लिए संकल्प लिया, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी उनके पवित्र जल से लाभान्वित हो सकें।


