शैल चित्रकला में पहली डी.लिट. करने वाले डॉ. व्यास को पद्मश्री

पुरातत्व और शैल चित्रकला में हिंदी भाषा में देश में पहली डी.लिट. की उपाधि पाने वाले उज्जैन के पुरातत्वविद् डॉ. नारायण व्यास को पद्मश्री मिलेगा। 77 वर्ष की उम्र में भी डॉ. व्यास आज भी पुरातत्व और उत्खनन से जुड़े कार्यों में लीन रहते हैं। भारत सरकार की ओर से रविवार शाम पद्मश्री नामों की घोषणा हुई। सूची में डॉ. व्यास का नाम देखते ही उनके घर पर बधाई देने वालों की भीड़ जुटना शुरू हो गई। डॉ. व्यास का जन्म 5 जनवरी 1949 को उज्जैन में हुआ था। उनके पिता अनंतलाल स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रहे। डॉ. व्यास ने अपने गुरु और जाने-माने पुरातत्वविद् पद्मश्री डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर की अगुवाई में भीमबेटका में कार्य किया। डॉ. व्यास भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण में 1972 से 2009 तक कार्यरत रहे। वर्ष 2009 में वे अधीक्षण पुरातत्वविद्, मंदिर सर्वेक्षण परियोजना, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण भोपाल के पद से सेवानिवृत्त हुए। 37 वर्षों में उन्होंने मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, गुजरात, दमन दीव, राजस्थान, हरियाणा, छत्तीसगढ़ आदि राज्यों में पुरातत्वीय उत्खनन, अनुसंधान के कार्य किए। भाई सुनील एवं कुलानुशासक प्रो. शैलेंद्र शर्मा ने बताया पाटन (गुजरात) में डॉ. व्यास के संरक्षण व सर्वेक्षण में ही रानी की वाव (बावड़ी) का पुरातात्विक उत्खनन हुआ, जिसे यूनेस्को ने विश्व धरोहर घोषित किया। 100 के नोट पर रानी की वाव (बावड़ी) को भी प्रकाशित किया जाता है। डॉ. व्यास ने 2005 में भोपाल से हिंदी में रायसेन जनपद और भीमबेटका की शैल चित्रकला पर डी.लिट. की, जोकि शैल चित्रकला में हिंदी में देश की पहली डी.लिट. है। 2024 में डॉ. भगवतीलाल राजपुरोहित और ओमप्रकाश शर्मा के नाम पद्मश्री की सूची में आए थे। भोपाल से बधाई का कॉल आया तो यकीन नहीं हुआ डॉ. व्यास का एक घर भोपाल और एक घर उज्जैन में है। रविवार को वे बड़नगर बायपास स्थित तिरुपति सिल्वर कॉलोनी में थे। रविवार शाम भोपाल से एक परिचित ने बधाई देने के लिए उन्हें कॉल किया और कहा कि आपका नाम पद्मश्री के लिए चयनित हुआ है। डॉ. व्यास ने बताया कॉल आने पर उन्हें पहली बार तो यकीन ही नहीं हुआ। जब दिल्ली से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण से जुड़े लोगों के कॉल आए और टीवी पर नाम देखा तो यकीन हुआ। डॉ. व्यास लंबे समय से अमर शहीद गणेश शंकर विद्यार्थी मंडल से भी जुड़े हैं। घर में म्यूजियम बनाए, सम्मान राशि से बच्चों की मदद डॉ. व्यास द्वारा पुरातत्व पर एकल शोध केंद्र खोला है, जहां शोध करने वाले विद्यार्थी और अन्य शोधार्थी शोध के लिए मार्गदर्शन लेने आते हैं। डॉ. व्यास ने भोपाल के कोलार रोड और उज्जैन स्थित घर में म्यूजियम बना रखा है, ताकि उनके यहां आने वाले लोगों को भी पुरातत्व से जुड़ी जानकारियां मिल सके। मप्र शासन द्वारा 4 मई 2022 को पुरातत्व के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों और शोध व्यापक आयामों हेतु डॉ. व्यास को लाइफ टाइम अचीवमेंट के लिए डॉ. विष्णु वाकणकर राष्ट्रीय सम्मान से विभूषित किया गया। दो लाख की सम्मान राशि को उन्होंने बैंक में फिक्स डिपॉजिट किया। इससे मिलने वाली ब्याज की राशि से वे जरूरतमंद विद्यार्थियों की मदद करते हैं।

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