मरुस्थल में बसे लोगों से ज्यादा पानी का मोल कोई नहीं जान सकता। इन्हीं में से एक हैं बाड़मेर जिले के झाक निवासी किसान देवाराम पंवार। गर्मियों में यहां का तापमान 50 डिग्री तक जाता है। मगर युवा किसान पंवार ने इसका तोड़ निकाल लिया। वे बारिश में न केवल मीठा पानी एकत्र कर रहे हैं बल्कि उसी से गूगल और ग्वारपाठा जैसी औषधीय फसलों की खेती तक कर रहे हैं। भेड़ बकरियों व मकान के लिए बनाई गई 20 हजार स्क्वेयर फीट की छत को फार्म पौंड से जोड़ा हुआ है। दो फार्म पौंड में 42 लाख लीटर वर्षा जल सहेज चुके हैं। खेत में 300 खेजड़ी के पौधे लगाए। साथ ही लुप्त होती औषधीय प्रजाति गूगल के 500 पौधे भी रोपे। बारिश के दौरान सिंचाई की जरूरत कम रहती है, जबकि रबी में उसी पानी से सिंचाई कर रहे हैं। क्षेत्र में पूरे साल में 300 मिमी बारिश ही होती है लेकिन इन्होंने कम पानी में कृषि और पशुपालन का सफल मॉडल बनाया है। कोरोना में औषधि फसलों की खेती करने का विचार आया। स्टेट मेडिसिनल प्लांट्स बोर्ड के सहयोग से 1 हेक्टेयर खेत में गूगल के पौधे लगाए। सहजन, एलोवेरा, तुलसी, गिलोय, सनाय का भी पौधरोपण किया। औषधीय खेती के साथ बकरी पालन को आय का स्रोत बनाने का निर्णय लिया। राष्ट्रीय पशुधन मिशन के तहत 525 बकरियों के लिए आवेदन किया। जिसके परिणामस्वरूप बाड़मेर जिले के प्रथम लाभार्थी बने। हाल ही में राजस्थान सरकार ने डेनमार्क में सात दिवसीय कृषि व पशुपालन प्रशिक्षण के लिए भेजा। बकरी के दूध व एलोवेरा का साबुन भी बना रहे हैं।


