संस्था ने एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल फॉर हैंडीक्राफ्ट्स के तहत दिल्ली में आयोजित प्रदर्शनी में पहली बार अपनी इस आर्ट को पेश किया। यहीं से उनकी रचनात्मक पहचान ने राष्ट्रीय मंच पर आकार लेना शुरू किया। इसके बाद संस्था का जुड़ाव नेशनल हैंडीक्राफ्ट म्यूजियम से हुआ, जहां उनकी चयनित कलाकृतियों को राष्ट्रीय संग्रहालय के लिए स्थान मिला। यह क्षण उनकी कला यात्रा के लिए निर्णायक मोड़ साबित हुआ। आगे चलकर इंडिया ट्रेड प्रमोशन ऑर्गेनाइजेशन ने संस्था की कलाकृतियों को भारत मंडपम के लिए चयनित किया। उन्हें अंतरराष्ट्रीय अतिथियों के लिए आधिकारिक स्मृति-उपहार (सोवेनियर) आपूर्तिकर्ता के रूप में मान्यता दी। क्या है मिनरल आर्ट : मिनरल वॉल आर्ट पत्थरों के प्राकृतिक स्वरुप को निखारने की शैली है। खनिज पत्थरों के रंग, बनावट और संरचना प्राकृतिक रूप से भिन्न होते हैं। खनिज अपने रंग, बनावट, आकार और प्राकृतिक डिज़ाइन में इतने अनूठे हैं कि वे स्वयं प्रकृति की जीवंत कला जैसे लगते हैं। जिले में लगभग 59 प्रकार के खनिज खदानों से निकाले जा रहे हैं, जो भीलवाड़ा की सबसे बड़ी ताकत है। जिनका उपयोग अब तक निर्माण कार्यों तक सीमित था, लेकिन अब मिनरल आर्ट से इन खनिजों को नया, रचनात्मक और बहुउद्देशीय स्वरूप मिलने लगा है। जिले में पाए जाने वाले अलग-अलग प्रकार के पत्थर देखने में भले ही साधारण लगते हैं। लेकिन उन्हें तराश कर अलग-अलग रूपों में विभिन्न कलाकृतियां बनाई जा रही है। जिनमंे केवल वॉल आर्ट से आगे बढ़ते हुए खनिजों से टेबल्स, टेबल डेकोर, वास, बुक होल्डर्स, फ्रेम्स जैसी विशिष्ट कलाकृतियां भी तैयार होने लगी है। भास्कर न्यूज | भीलवाड़ा शहर के सिंधुनगर निवासी दो भाईयों आशीष और निश्चलजीत सोनी ने मिनरल वॉल आर्ट की अनूठी व नई शैली इजाद की है, जिसने न केवल हमारे देश में वरन विश्व स्तर पर भी अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। यह कला खनिज पत्थरों की अत्यंत पतली परतों से तैयार की गई है, जिसमें भारतीय शिल्प कौशल और आधुनिक सौंदर्यबोध का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है। वर्ष-2019 से भीलवाड़ा जिले में पाए जाने वाले करीब 59 प्रकार के खनिज पत्थरों सहित प्रदेश व देश में पाए जाने वाले पत्थरों को विशेष तकनीक के माध्यम से नया रूप देकर इसे नवाचारपूर्ण कला शैली के रूप में स्थापित किया। इस शैली की विशेषता यह है कि सोनी बंधुओं की बनाई गई मिनरल वॉल आर्ट अब देश के उपराष्ट्रपति भवन का हिस्सा बन चुकी है। जो हमारे लिए गौरव की बात है। हाल ही में नई दिल्ली में राज्यपाल हरिभाऊ किसनराव बागड़े ने उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन को सोनी बंधुओं की कृति पैलेट डी अर्थ मिनरल वॉल आर्ट भेंट की। कला विशेषज्ञों का मानना है कि सोनी बंधुओं का यह नवाचार स्थानीय कलाकारों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे राजस्थान की पारंपरिक कलाओं को नई ऊँचाइयाँ मिलने की प्रबल संभावना है। मिनरल आर्ट शैली में तैयार घड़ी। मिनरल वॉल आर्ट हाल ही में देश के प्रतिष्ठित भारत मंडपम में भी प्रदर्शित हो चुकी है। जहां जी-20 सम्मेलन के दौरान इसे पर्यावरण संरक्षण के संदेश के रूप में प्रस्तुत किया गया था। इसके अतिरिक्त, विभिन्न विदेशी प्रतिनिधिमंडलों को भारत की सांस्कृतिक और कलात्मक विरासत के प्रतीक स्वरूप यह कला भेंट की गई। मिनरल आर्ट शैली में तैयार सुंदर कलाकृति।


