देश का संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ, लेकिन आज भी यह आम लोगों की पहुँच से दूर है। इसका प्रमुख कारण है कि संविधान की किताब आसानी से उपलब्ध नहीं होती। ऐसे में राजधानी के वरिष्ठ अधिवक्ता फैजल रिज़वी ने इसे अपनी नैतिक ज़िम्मेदारी मानकर आम आदमी तक पहुँचाने का संकल्प लिया है। अब तक वे करीब 9 हज़ार से ज़्यादा प्रतियाँ वितरित कर चुके हैं। रिज़वी की मानें तो हर भारतीय को संविधान का ज्ञान होना चाहिए। उन्हें संविधान की किताब बाँटने की प्रेरणा अपने एडवोकेट पिता स्व. सैयद अफ़ज़ल अहमद रिज़वी से मिली। वो संविधान की एक बुकलेट छपवाकर आमजनों तक पहुँचाते थे, ताकि आमजनों को यह पता चल सके कि संविधान में नागरिकों के मूलभूत अधिकार और दायित्व क्या हैं। फैज़ल के अनुसार, संविधान की किताब बाँटने की शुरुआत 14 अप्रैल 2023 को अंबेडकर चौक से की गई। यहाँ तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के हाथों से 3 हज़ार प्रतियाँ बाँटी गई थीं। उस दिन संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती थी। इसके बाद से किताब वितरण का काम लगातार जारी है। अब तक इसका वितरण रायपुर, मोहला-मानपुर, कवर्धा, राजनांदगाँव, डोंगरगढ़, अंबागढ़ चौकी, बस्तर, महासमुंद, सरायपाली, बसना आदि के अलावा महाराष्ट्र के आमगाँव और गोंदिया, सांची व झाँसी में भी किया जा चुका है। दो महीने में 10 हज़ार प्रतियों के वितरण का लक्ष्य रखा गया है। इस अभियान में ऑल मुस्लिम वेलफेयर फाउंडेशन, छत्तीसगढ़िया सर्व समाज महासंघ, अखिल भारतीय गुरु घासीदास महासमिति रायपुर, खालसा रिलीफ फाउंडेशन, सीसी फोरम सहित कई संगठनों का भी सहयोग मिला है। संविधान के पालन से सबका भला : नायक
राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष गिरिधारी नायक ने बताया कि संविधान की जानकारी सबको होनी चाहिए। लोगों को मूलभूत अधिकार व दायित्व मालूम होना चाहिए। संविधान का पालन होने से सबका भला होगा। सर्वोत्तम बात यह है कि स्कूलों में बच्चों को संविधान की शिक्षा दी जाए तो जिंदगीभर उसे याद रखेंगे।


