उदयपुर के पॉश इलाके भुवाणा में खाकी और खादी के गठजोड़ ने मिलकर एक आदिवासी परिवार को अपनी ही जमीन पर ‘कंगाल’ बना दिया। खसरा नंबर 1961 की आधा बीघा जमीन जिसकी बाजार में वैल्यू करीब 25 करोड़ है। मूल खातेदार कूकी बाई और चंपाराम ने अपनी जमीन 15 अक्टूबर-2025 को चित्तौड़ के गोपाल भील को 2.09 करोड़ में बेच दी, जिसकी रजिस्ट्री भी करवा दी। डेढ़ महीने बाद ही पुलिस-राजनीतिक दबाव से 4 दिसंबर को डमी गुमानराम के नाम पर 12 लाख में रजिस्ट्री करवा दी। आरोप है भाजपा विधायक पुष्पेंद्र सिंह, जयपुर निवासी हेमंत शर्मा,और पुलिस के सहयोग से जैसलमेर से डमी गुमानराम के नाम ये रजिस्ट्री करवाई। जब तक कूकी बाई-चंपाराम ने रजिस्ट्री के लिए राजी नहीं हुए तब तक इन्हें सुखाड़िया यूनि. के गेस्ट हाउस में रखा। पुलिस ने भी कोर्ट के आदेशों की धज्जियां उड़ाते हुए सिविल नेचर केस को ठगी में बदलकर मूल खातेदारों को ही आरोपी बना दिया। कूकी बाई और चंपाराम को जमीन बेचने पर मिले रुपए, चेक बुक भी हड़प ली। जबकि हेमंत शर्मा ने परिवाद में जमीन खुद की बताई थी। फिर गुमानारम से मुकदमा करवाया कि यह जमीन उसकी है। विधायक पुष्पेंद्र सिंह भी शर्मा के साथ कुकी बाई के घर गए और फोन पर जमीन को सरकारी करने की धमकी देने का आरोप है। विधायक पुष्पेंद्र सिंह ने माना कि जमीन हेमंत की थी, हमने तो समझाइश की। पहली रजिस्ट्री 2.9 करोड़ में, दुबारा 12 लाख में बिकी…पीड़ित को आरोपी बनाया जमीन के मूल खातेदार कीकाराम थे। साल 2023 में उनकी मौत के बाद पत्नी कूकी और पुत्र चंपाराम वारिस बने। जब 15 अक्टूबर 2025 को परिवार ने यह जमीन गोपाल भील को बेची। बावजूद हेमंत शर्मा ने पहले दावा किया कि यह जमीन उन्होंने कीकाराम के नाम से खरीदी। जब सीधे तौर पर जमीन नहीं रोक पाए, गुमानाराम से थाने में कूकी बाई व परिवार के लोगों के खिलाफ केस दर्ज करवाया। बाद में 4 दिसंबर को इसी जमीन की दूसरी रजिस्ट्री महज 12 लाख रुपए में गुमानाराम के नाम करवाई। 1. पुष्पेंद्र सिंह राणावत,भाजपा विधायक, बाली
आरोप: पीड़ितों को धमकाने, जमीन सरकारी करने, जेल भेजने का डर दिखाकर दूसरी रजिस्ट्री के लिए मजबूर किया।
सफाई: मैंने धमकाया नहीं, समझाया। रजिस्ट्री कीकाराम के नाम थी, जमीन हेमंत की थी। मैंने तो गांव में जाकर समझाया था। 2. हेमंत शर्मा: आरोप खुद को सीएम का रिश्तेदार बताकर रसूख रखने वाले शर्मा इस पूरी साजिश के सूत्रधार बताए जा रहे हैं, जिन्होंने बेनामी संपत्ति के खेल को अंजाम दिया।
सफाई: पुलिस पूछेगी तो मैं जवाब दूंगा। सीएम का साडू तो आप उनसे ही पूछो। उनको बोलो कोर्ट से इस्तगासा करवा दो। 3. राजेश यादव,डिप्टी (जांच अधिकारी)
आरोप: इसी काम के लिए बाली से उदयपुर लगाया। बेनामी सपत्ति की नहीं, बल्कि पीड़ितों के खिलाफ कार्रवाई की।
सफाई: मामला कोई भी दर्ज करवा सकता है। मुकदमा झूठा भी हो सकता है। अभी तो जांच चल रही है। 4. रविंद्र चारण, एसएचओ, सुखेर
आरोप: कोर्ट के आदेशों की अनदेखी करते हुए सिविल मामलों को ठगी का रूप दिया, जमीन मालिकों के खिलाफ केस दर्ज किया।
सफाई: जिस हिसाब से एफआईआर हुई है, उस हिसाब से ही केस दर्ज किया। आगे अब जांच का विषय है।


