शहर के जगतपुरा इलाके में जेडीए का एक ऐसा कारनामा सामने आया है, जिसमें उसने खुद की महल आवासीय योजना में सालों पहले आवंटित भूखंडों पर ही निजी खातेदार के फायदे के लिए उसकी दुकानों की लीज डीड जारी कर दी। चौंकाने वाली बात यह है लीज डीड एक ही व्यक्ति रेणु अग्रवाल के नाम से जारी की है। वहीं जेडीए निजी खातेदार पर इतना मेहरबान हो गया कि दुकानों की लीज जहां पूर्व में आवंटित भूखंडों पर की तो दुकानों के लिए ग्रीन बेल्ट की जगह का इस्तेमाल करने को भी अनदेखा कर दिया। जबकि जेडीए के नक्शे में स्पष्ट तौर पर ग्रीन बेल्ट, बरसाती नाले, सड़क व आवंटित भूखंडों और निजी खातेदारी श्रीराम विहार का उल्लेख कर रखा है। लेकिन जेडीए के अफसरों की ओर से जेडीए अधिकरण में दिए जवाब में ग्रीन बेल्ट के बारे में उल्लेख नहीं किया है, जबकि जेडीए के नक्शे में ग्रीन बेल्ट मौजूद है। जेडीए ने ही वहां पौधारोपण कर उनका रख रखाव किया है। लेकिन महल आवासीय योजना की विकास समिति के जागरुक रहने के चलते फिलहाल मामला अटक कर जेडीए ट्रिब्यूनल में लंबित हो गया है। अब इस मामले में यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने भी विकास समिति के अभ्यावेदन पर जेडीए से तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है। ग्रीन बेल्ट पर भू-माफियाओं की नजर, बी-ब्लॉक में अतिक्रमण का खुलासा जेडीए ने जगतपुरा में महल आवासीय योजना विकसित की और साल 2000 में आवंटियों को भूखंडों का आवंटन कर दिया। इस योजना के बी ब्लॉक में भूखंड संख्या एक से लेकर 546 तक की संख्या तक के भूखंड हैं। इनमें ज्यादातर भूखंडों पर आवंटी मकान बना कर रह भी रहे हैं। लेकिन इस दौरान ही स्थानीय विकास समिति को जेडीए अधिकरण में ग्रीन बेल्ट में दुकानों की लीज डीड का मामला सामने आने का पता चला। मामले से जुड़े अधिवक्ता व विकास समिति के महासचिव संदेश खंडेलवाल ने बताया कि महल आवासीय योजना (बी-ब्लॉक) विकास समिति ने जेडीए के नक्शे में दर्शाई गई ग्रीन बेल्ट में अतिक्रमण, अवैध निर्माण व भू माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई करने के संबंध में जेडीए अधिकरण में रेफरेंस पेश किया था। इसमें कहा था कि ग्रीन बेल्ट जेडीए की ओर से संरक्षित है और उसमें करोड़ों रुपए खर्च कर जेडीए ने पेड़ लगाए हैं। लेकिन अब भू-माफिया ग्रीन बेल्ट की जमीन पर जबरन कब्जा कर अतिक्रमण कर रहे हैं। इसके खिलाफ जेडीए कानूनी कार्रवाई करे। जोन-9 उपायुक्त ने अधिकरण में रिकाॅर्ड के विपरीत गलत तथ्य बताए मामले की सुनवाई के दौरान जेडीए जोन-9 की उपायुक्त तारामती वैष्णव ने अपने शपथ पत्र व जवाब में कहा कि महल योजना के बी ब्लॉक का अनुमोदित नक्शा व तकनीकी शाखा की रिपोर्ट के अनुसार महल योजना के भूखंड संख्या बी-504 से 544 पर अनुमोदित योजना में श्री राम विहार की दुकान संख्या एसई-एक से एसई-37 की लीज डीड जारी की जा चुकी है। जबकि यह योजना जेडीए की ओर से अनुमोदित ना होकर जेडीए की स्वामित्व की योजना है। जोन उपायुक्त की ओर से ग्रीन बेल्ट के संबंध में अधिकरण के आदेश के पालन में जेडीए के जोन- 9 ने अपना जवाब पेश किया। जेडीसी ने मामले की जांच के निर्देश दिए जेडीसी ने अधिकरण में जोन उपायुक्त की ओर से गलत तथ्य पेश करने को गंभीरता से लेते हुए दुकानों की लीज डीड जारी करने व ग्रीन बेल्ट की मौजूदा स्थिति की जांच के निर्देश दिए हैं। वहीं जोन उपायुक्त के अधिकरण में दिए गए शपथ पत्र की भी जांच के लिए कहा है।


