अमोल पालेकर बोले- बी आर चोपड़ा ने मुझे धमकाया था:बकाया पैसा मांगने पर फिल्म इंडस्ट्री से बाहर फेंकने की धमकी मिली

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (JLF) के चौथे दिन रविवार को बॉलीवुड एक्टर अमोल पालेकर ने अपने सेशन ‘अमोल पालेकर: द व्यू फाइंडर’ के दौरान फिल्म इंडस्ट्री से संबंधित तमाम मुद्दों पर बात की। उन्होंने फिल्म निर्देशक बीआर चोपड़ा से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा शेयर किया। जिसमे बकाया पैसे मांगने पर चोपड़ा ने अमोल को इंडस्ट्री से बाहर फेंक देने की धमकी दी थी। अमोल ने जवाब में कहा था- फिल्म इंडस्ट्री आपका बंगला नहीं, मैं यहां अपने दम पर टिका हूं। मामला फिर भी ठंडा नहीं हुआ था। बात आगे बढ़ती गई थी। अमोल ने भी हार नहीं मानी और मामला कोर्ट तक ले गए। उन्हें जीत मिली। ब्याज के साथ 5 गुना पैसे वापस हुए तो उन्होंने पूरी राशि दान कर दी थी। पढ़ें अमोल पालेकर के कुछ रोचक किस्से- अमोल पालेकर ने अपने सेशन के दौरान कई किस्से शेयर किए, जिनमें बाला साहब ठाकरे से बातचीत और बी.आर. चोपड़ा के साथ हुए एक विवाद और इमरजेंसी के समय जयप्रकाश नारायण से जुड़ी घटनाओं का जिक्र किया। उन्होंने बताया- बी.आर. चोपड़ा की फिल्म कंपनी ने उन्हें 40,000 रुपये देने थे, लेकिन फिल्म की रिलीज तक वह पैसे नहीं मिले। जब उन्होंने इस बारे में बात की और एक लिखित आश्वासन मांगा, तो इंडस्ट्री में इसे चुनौती देने जैसा माना गया। अमोल पालेकर ने बताया- मुझे सिर्फ पैसे नहीं, बल्कि इज्जत चाहिए थी, जो मुझसे छीनी जा रही थी। इंडस्ट्री में यह नॉर्म था कि अगर पेमेंट नहीं हो रहा तो एक लेबर लेटर दिया जाता था। मैंने चोपड़ा साहब से यही कहा कि मैंने शूटिंग रोकी नहीं, काम भी पूरा किया, बस एक लीगल प्रक्रिया पूरी करना चाहता था। इस पर चोपड़ा साहब ने कहा कि “तुम्हें इंडस्ट्री से बाहर फेंक दूंगा।” अमोल पालेकर ने बताया- मैंने इसका जवाब देते हुए कहा, “बी.आर. चोपड़ा साहब, इंडस्ट्री आपके बंगले का पिछवाड़ा नहीं है। मैं अपनी शर्तों पर यहां हूं, किसी फिल्मी खानदान से नहीं आता, फिर भी इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाई है। देखते हैं कौन किसे निकालता है। मैंने मामला कोर्ट में ले जाने का फैसला किया और सालों बाद मुझे 40,000 रुपये की राशि के साथ 5 गुना अमाउंट ब्याज सहित मिले। उन्होंने बताया कि यह उनके लिए पैसों की लड़ाई नहीं थी, बल्कि सम्मान की बात थी, इसलिए उन्होंने पूरी राशि दान कर दी। बाला साहब ठाकरे ने कहा- तुम हमारे मंत्रियों का अपमान कर रहे हो अमोल पालेकर ने एक फिल्म फेस्टिवल के दौरान सरकारी हस्तक्षेप का विरोध किया था। उन्होंने बताया- यह इवेंट बिना सरकारी फंडिंग के हो रहा था, इसलिए कोई मंत्री या सरकारी अधिकारी मंच पर नहीं होगा। जब सरकार की तरफ से दबाव आया तो सभी ट्रस्टियों की आपात बैठक हुई। उसी दौरान बाला साहब ठाकरे का मेरे पास फोन आया। उन्होंने सीधे मेरे से पूछा, “तुम हमारे मंत्रियों का अपमान क्यों कर रहे हो?” इस पर मैंने उन्हें बताया कि यह फेस्टिवल नॉन पॉलिटिकल है। “हम उनका अपमान नहीं कर रहे, बल्कि उन्हें पूरा सम्मान दे रहे हैं। पहली पांच पंक्तियां मंत्रियों के लिए रिजर्व हैं, लेकिन मंच पर सिर्फ फिल्म इंडस्ट्री के लोग होंगे। ” बाला साहब ने यह सुनकर कहा, “ठीक है, जैसा तुमने तय किया है, वैसा ही रहने दो।” आपातकाल के दौरान इंदिरा सरकार का विरोध उन्होंने आपातकाल के दौरान अपनी सक्रियता के बारे में भी बात की। उन्होंने बताया मैं खुलेआम इसके खिलाफ था, भाषण देता था, विरोध सभाओं में जाता था और एक नाटक भी किया जो आपातकाल का विरोध करता था। जब इंदिरा गांधी की सरकार हटी और जयप्रकाश नारायण बंबई आए तो उन्होंने मुझे मिलने के लिए बुलाया। उस वक्त वह डायलिसिस करा रहे थे। उन्होंने मेरे से कहा, “तुम दिल्ली आओ, शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हो। तुमने इस बदलाव के लिए काम किया है, यह तुम्हारा हक है।” लेकिन मैंने मना कर दिया। उन्होंने कहा, “मुझे अपना यह हक बचाकर रखना है कि मैं इस सरकार की भी आलोचना कर सकूं।” उन्होंने मौजूदा राजनीतिक हालात पर टिप्पणी करते हुए कहा, “आज कोई नहीं जानता कि कौन किस पार्टी में है। एक पल में किसी और पार्टी में, अगले पल में दूसरी में। यह अब पेशा बन चुका है, जहां बेहतर सौदा मिले, वहां चले जाओ। कम से कम इसे स्वीकार तो करो कि हां, यह मेरा प्रोफेशन है और मैं इसमें पैसे कमाना चाहता हूं। उन्होंने कहा अभी के समय मे कोई भी अच्छा पॉलीटिशियन नहीं है जिन पर बात की जा सके।

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