कहते हैं विरासत बेची नहीं, सहेजी जाती है…ग्वालियर के चीनौर, मोहना, हिम्मतगढ़, मस्तूरा और आरोन जैसे गांव इस कहावत को सच साबित कर रहे हैं। यहां गढ़ियों और खंडहर हो चुके किलों में सदियों पुरानी तोपें आज भी सुरक्षित रखी हैं, जिनसे कभी दुश्मनों के छक्के छूटे थे। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इनकी कीमत करोड़ों में है, लेकिन 13-14 पीढ़ियों से इन्हें संभाल रहे परिवारों ने एक करोड़ तक के ऑफर ठुकरा दिए। कुछ जगह चोरी हुई तो ग्रामीणों ने मिलकर तोपें ढूंढ़ निकालीं। दैनिक भास्कर ने ऐसे 8 स्थानों पर जाकर वंशजों से बात की। वे विरासत पुरातत्व विभाग को सौंपना चाहते हैं, लेकिन संरक्षण को लेकर विभाग तैयार नहीं। गढ़ी सरकार के पास, यहां रखी हैं दो तोपें: आरोन की गढ़ी अब सरकार के कब्जे में है। गेट पर छोटा सा ताला लगा है और अंदर खुले में दो तोपें रखी हुई हैं। स्थानीय निवासी अनिल चौहान बताते हैं कि पहले छोटी तोप को उठाकर गांव के लोग कसरत किया करते थे, लेकिन अब दोनों तोपों को सुरक्षित रखवा दिया गया है। इनकी देखरेख के लिए विद्याराम कुशवाह को जिम्मेदारी सौंपी गई है। तोप चोरी हुई, परिवार ने खोज निकाली: देवगढ़ गढ़ी के विक्रम सिंह बताते हैं कि कुछ समय पहले उनके पुरखों की तोप चोरी हो गई थी। परिवार और ग्रामीणों ने तलाश कर तोप तो वापस ला ली, लेकिन चोर उसे काट चुके थे। बाद में तोप की मरम्मत कराकर उसे गढ़ी में ही सुरक्षित रखवा दिया गया। अब परिवार के लोग ही इसकी देखभाल करते हैं। चीनौर: कबाड़ी ले जा रहा था तोप, ग्रामीणों ने पकड़ा: चीनौर की गढ़ी से 5 फीट लंबी तोप को एक कबाड़ी ले जा रहा था, जिसे ग्रामीणों ने पकड़ लिया। पुजारी विनोद दीक्षित बताते हैं कि इसके बाद तोप को मंदिर में रख दिया गया। तभी से यह मंदिर ‘तोप वाले हनुमान’ के नाम से जाना जाता है। पनिहार और गोहिंदा गढ़ी में रखी तोपों की स्थिति भी कुछ ऐसी ही है। 700 मी. ऊंचाई पर रखी है 15 फीट लंबी तोप 700 मीटर ऊंचाई पर स्थित किला अब वीरान हैं। यहां लगभग 15 फीट लंबी तोप खुले में रखी है। इसकी रखवाली माता मंदिर पर रहने वाले विवेकानंद बाबा कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि राजा के वंशज मुरार में रहते हैं। ग्वालियर में ऐसे जागीरदार परिवारों तक पहुंचा भास्कर मस्तूरा की गढ़ी पुरखों की निशानी चली गई तो इतिहास मिट जाएगा
मस्तूरा गाँव के जागीरदार परिवार की 13वीं पीढ़ी के पूरन सिंह और 14वीं पीढ़ी के दीपेंद्र जाट ने कहा- कुछ समय पहले आए खरीदारों ने उनकी 12 फीट लंबी तोप के लिए ~1 करोड़ की पेशकश की थी। लेकिन उन्होंने मना कर दिया। उन्होंने कहा- पैसे तो आते-जाते रहेंगे, पर पुरखों की निशानी गई तो इतिहास मिट जाएगा। मोहना की गढ़ी 20 लाख भी ठुकराए… धर्मेन्द्र तोमर ने कहा- पुरखों की निशानी के रूप में चार तोप और एक तलवार है। एक कारोबारी एक तोप के 20 लाख और तलवार के 1.5 लाख दे रहा था, लेकिन उन्होंने मना कर दिया।


