अब बेटरमेंट टैक्स भी:विकास कार्यों के बाद प्रॉपर्टी की कीमत बढ़ी तो टैक्स लेगी सरकार

प्रॉपर्टी टैक्स, सीवेज टैक्स, वाटर टैक्स और अन्य शुल्क के साथ मप्र के नगरीय निकायों में अब ‘बेटरमेंट टैक्स’ लागू करने की तैयारी है। मुख्यमंत्री अधोसंरचना विकास योजना के पांचवें चरण को अगले 3 साल तक चलाने के लिए सरकार 5000 करोड़ रुपए कर्ज के रूप में ले रही है। इसकी भरपाई बाद में जनता की जेब से होने वाली है। जिस क्षेत्र में नगर निगम या निकाय विकास कार्य करें और वहां प्रॉपर्टी की वैल्यू बढ़ी तो बढ़ी हुई कीमत का आकलन कर उस पर एक फिक्स टैक्स लगाया जाएगा। इसे एकमुश्त देना पड़ेगा। अगले साल निकाय चुनाव हैं लिहाजा, सरकार काम जल्द शुरू करेगी, ताकि 2027 में चुनाव से पहले निकायों में चलते हुए काम दिखने लगें या पूरे हो जाएं। पिछली कैबिनेट में एक्स एजेंडे के रूप में पांचवें चरण को मंजूरी दे दी गई है। पहले प्रस्ताव में 60% कर्ज था, अब 100% : नगरीय विकास विभाग ने कैबिनेट से पहले प्रस्ताव बनाया था कि 5000 करोड़ के कुल बजट में 2201.20 करोड़ रु. अनुदान से जुटाएंगे। बाकी 2798.80 करोड़ सरकार कर्ज लेगी। वित्त विभाग के दबाव के बाद अब अनुदान भी शून्य प्रतिशत ब्याज पर मिलेगा। हालांकि, 25 साल बाद 5 समान किश्तों में इसे निगम व निकायों को चुकाना भी पड़ेगा। नगर निगम 25, पालिका 15 और नगर परिषद 10% कर्ज चुकाएंगे। बाकी राज्य सरकार देगी। किस निगम या निकाय को कितना मिलेगा
– भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर को 50-50 करोड़ और उज्जैन को 35 करोड़ मिलेंगे।
– बाकी 11 ​निगमों को 20-20 करोड़ रुपए।
– एक लाख से अधिक आबादी वाली नगर पालिका 17 हैं, इन्हें 15-15 करोड़, एक लाख तक की आबादी वाली 82 नगर पालिका को 10-10 करोड़ मिलेंगे।
– 25 हजार से अधिक आबादी वाली 21 नगर परिषद को 8-8 करोड़ और 25 हजार से कम की आबादी वाली 277 नगर परिषदों को 6.50-6.50 करोड़ मिलेंगे।
– योजना के पांचवें चरण में 2026 में 100 करोड़, 2027 में 1932 करोड़ व तीसरे साल 2968 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। लौटाने की ताकत नहीं तो पैसा भी नहीं
आत्मनिर्भर निकाय सिद्धांत के तहत नगरीय निकायों की परफॉरमेंस रेटिंग भी होगी। जो पैसा चुका सकेंगे, उन्हें ही पैसा मिलेगा। जो असक्षम होंगे, उनका पैसा दूसरे निकाय को दे दिया जाएगा। पांचवें चरण में क्या-क्या होगा?
– शहरी क्षेत्रों में मास्टर प्लान की सड़क एवं शहर की मुख्य सड़कें बनाई जाएंगी।
– सड़क सुरक्षा एवं यातायात सुधार, पेयजल/सीवरेज/अन्य परियोजनाओं में गैप कवरेज, इंटरसेप्शन एवं डायवर्जन तथा एसटीपी निर्माण।
– राज्य शासन की प्राथमिकता के काम भी इसी पैसे से होंगे। यानि उज्जैन नगर निगम में सिंहस्थ के काम के लिए भी पंचम चरण से पैसा निकल सकेगा।
– मास्टर प्लान की सड़कें एवं शहर की प्रमुख सड़कों के निर्माण को प्राथमिकता दी जाएगी।
– जहां मास्टर प्लान लागू नहीं है, वहां शहर के मुख्य मार्ग की सडकों/पुलों का निर्माण होगा।
– न्यूनतम चौड़ाई नगर पालिका परिषद में 14 मीटर और नगर परिषद में 7 मीटर होगी। सीएम अधोसंरचना में अभी तक 6000 हजार करोड़ खर्च
पहले चरण से लेकर चार चरणों में अब तक 6000 करोड़ रुपए सीएम अधोसंरचना पर खर्च हो चुके हैं। सबसे ज्यादा 1700 करोड़ चौथे चरण में खर्च हुए हैं। पांचवां चरण 2026-27 से 2028-29 तक प्रभावी होगा। हमारी जेब से ऐसे होगी वसूली ‘छिपा हुआ टैक्स’ : इस टैक्स का अक्सर राजनीतिक विरोध होता है, इसलिए इसे ‘छिपा हुआ टैक्स’ भी कहा जाता है। यह भोपाल में एमपी नगर व इंदौर में वसूला जा चुका बेटरमेंट टैक्स क्या है?
सरकारी कामों के कारण जमीन या संपत्ति की कीमत बढ़ जाती है तो नगर निगम मालिक से यह कर्ज लेता है। किस तरह के काम पर लगता है?
नई या चौड़ी सड़क, फ्लाईओवर, ब्रिज, ड्रेनेज, सीवरेज, पेयजल लाइन, मेट्रो, बस कॉरिडोर, स्मार्ट सिटी के काम और पार्किंग जैसी परियोजनाएं। क्या यह टैक्स पहले भी लगा है?
हां। इंदौर में मास्टर प्लान की सड़कों व भोपाल में एमपी नगर के विकास के दौरान यह टैक्स लगाया गया था। टैक्स की राशि कैसे तय होगी?
विकास कार्य से पहले व बाद में संपत्ति की कीमत का आकलन होगा। बढ़ी कीमत का एक तय प्रतिशत टैक्स के रूप में लेंगे। दर नगर निगम या राज्य सरकार तय करेगी। पहले से टैक्स हैं, फिर यह क्यों?
जब सरकारी खर्च से किसी इलाके की संपत्ति की कीमत कई गुना बढ़ती है, तो उसका कुछ हिस्सा टैक्स के रूप में लेना अनुचित नहीं है।
-राकेश सिंह, पूर्व आईएएस व शहरी नियोजन विशेषज्ञ

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