भास्कर न्यूज | गिरिडीह गणतंत्र दिवस के अवसर पर गिरिडीह जिले के लिए यह किसी गौरव से कम नहीं कि भारतीय लोकतंत्र की आत्मा हमारे संविधान की मूल प्रति यहां सुरक्षित रखी गई है। यह ऐतिहासिक धरोहर गिरिडीह स्थित मास्टर सोबरन मांझी जिला पुस्तकालय में संरक्षित है, जिस पर संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर और देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के मूल हस्ताक्षर अंकित हैं। पूरे झारखंड में यह भारतीय संविधान की एकमात्र मूल प्रति मानी जाती है। जानकारी के अनुसार, इस प्रति को 1 अप्रैल 2003 को कोलकाता स्थित राजा राममोहन राय फाउंडेशन से विशेष रूप से मंगाया गया था। इस पर संविधान सभा के अस्थायी अध्यक्ष रहे सच्चिदानंद सिन्हा के हस्ताक्षर भी दर्ज हैं, जो इसकी ऐतिहासिक और संवैधानिक महत्ता को और बढ़ाते हैं। पुस्तकालय में रखी यह प्रति केवल एक दस्तावेज भर नहीं है, बल्कि भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों, अधिकारों और कर्तव्यों की जीवंत प्रतीक है। यही कारण है कि प्रतिदिन बड़ी संख्या में विद्यार्थी, शोधार्थी, शिक्षक और आम नागरिक इस ऐतिहासिक धरोहर को देखने पुस्तकालय पहुंचते हैं। कई लोग इसकी तस्वीरें लेते हैं, तो कई आगंतुक इस मूल प्रति के साथ फोटो खिंचवाकर स्वयं को गौरवान्वित महसूस करते हैं। िजले के िलए गर्व : अजय देश के विभिन्न हिस्सों से इस मूल प्रति को प्रदर्शनी के लिए ले जाने के अनुरोध आते रहते हैं, लेकिन इसे झारखंड की अमूल्य धरोहर मानते हुए कहीं भी भेजा नहीं जाता। पुस्तकालय प्रबंधन का मानना है कि इसे यहीं सुरक्षित रखकर भावी पीढ़ियों को संविधान के महत्व और उसके मूल्यों से जोड़ा जाना चाहिए। पुस्तकालय के अध्यक्ष अजय कुमार ने बताया कि पुस्तकालय आने वाले पाठकों का कहना है कि गणतंत्र दिवस जैसे अवसर पर संविधान की इस मूल प्रति को नजदीक से देखना उन्हें अपने नागरिक अधिकारों और कर्तव्यों का अहसास कराता है।


