छत्तीसगढ़ के गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले में छुई मिट्टी की खदानों में आज भी अवैध रूप से खनन किया जा रहा है, क्योंकि अंग्रेजों के जमाने से चले आ रहे इन खदानों को अब तक वैध घोषित नही किया गया है। यह खदान पूर्व मुख्यमंत्री स्व. अजीत जोगी के गांव जोगीसार में स्थित है। इन खदानों से निकलने वाली सफेद मिट्टी को ‘सफेद सोना’ भी कहा जाता है। ये मिट्टी स्थानीय लोगों की आजीविका का प्रमुख स्रोत हैं। कंधों पर लादकर पहाड़ पर चढ़ते है जोगीसार गांव से लगभग 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित इन खदानों से निकाली गई मिट्टी को मजदूर अपने कंधों पर लादकर पहाड़ी चढ़कर गांव तक लाते हैं, काम काफी जोखिम भरा रहता है। खदान के धसने का खतरा बना रहता है। यहां पहले कई हादसे में भी हो चुके है। जोखिम भरा काम करने को मजबूर आदिवासी स्थानीय आदिवासी और बेरोजगार लोग बिना किसी सुरक्षा उपकरण के 100-150 फीट गहरी सुरंगों में उतरकर इस मिट्टी का खनन करते हैं। खदानें अभी तक अवैध हैं, फिर भी लोग रोजी-रोटी की मजबूरी में यह जोखिम भरा काम करने को विवश हैं। एक टुकनी मिट्टी के बदले दो टुकनी धान काम करने वाले मजदूर बताते है कि इस सफेद मिट्टी का उपयोग मुख्य रूप से दीवारों की पुताई और पेंट निर्माण में किया जाता है। स्थानीय बाजार में इसका विनिमय धान से होता है, जहां एक टुकनी मिट्टी के बदले दो टुकनी धान मिलता है। मध्य प्रदेश में इसकी कीमत और भी अधिक है। ‘इस काम से कोई बीमारी नहीं होती’ जोगीसार निवासी बुजुर्ग मजदूर रामेश्वर ने बताया कि पहले जब बाहरी लोग खनन करते थे, तब अक्सर हादसे होते थे और मिट्टी धंसने से लोगों की मौत हो जाती थी, लेकिन जब से स्थानीय लोग खनन कर रहे हैं, तब से कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ है। यहां महिला, नौजवान से लेकर 60 साल के बुजुर्ग भी काम करते देखे जा सकते हैं और उनका दावा है कि इस काम से कोई बीमारी नहीं होती, लेकिन काम आसान भी नहीं है। 1995 में आए थे पूर्व CM स्वर्गीय अजीत जोगी मजदूर कन्हैया लाल बताते है कि पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय अजीत जोगी यहां आए थे, सन 1995 में यहां की मिट्टी दिल्ली लेकर गए थे और इस जगह को वैध छुई खदान बनाने की कोशिश भी उन्होंने की थी। बता दें कि यह गांव अविभाजित बिलासपुर जिले का छोटा सा गांव है, सन 1940 से अजीत जोगी का परिवार यहीं रहता है। उनके नाम पर ही इस गांव का नाम भी पड़ा। वैध खदान घोषित किए जाने की मांग तत्कालीन विधायक राजेंद्र प्रसाद शुक्ल ने इसे स्थानीय लोगों के लिए खोदने और निस्तारी की अनुमति की मांग की थी। ग्रामीण कहते हैं हमारे पास इसके अलावा और कोई काम भी नहीं है ग्रामीणों ने इसे वैध खदान घोषित किए जाने की मांग की है।


