धनबाद जिले के गोविंदपुर प्रखंड स्थित उर्दू प्राथमिक विद्यालय गायडेहरा में सहायक शिक्षक मो. अकबर अंसारी कार्यरत हैं। दोनों हाथ न होने के बावजूद वे पैर से ब्लैक बोर्ड पर लिखकर बच्चों को पढ़ाते हैं। उनका यह जज्बा समाज के लिए एक मिसाल बन गया है। मो. अकबर अंसारी एक टेबल का सहारा लेकर पैर से उतनी ही कुशलता से ब्लैक बोर्ड पर लिखते हैं, जैसे कोई सामान्य शिक्षक हाथों से लिखते हैं। उनके पढ़ाने का तरीका सहज और प्रभावी है, जिससे बच्चों को समझने में कोई कठिनाई नहीं होती। शैक्षणिक यात्रा भी चुनौतियों से भरी रही विद्यालय में उनकी शिक्षण शैली देखकर सभी उनके समर्पण की सराहना करते हैं। अकबर अंसारी की शैक्षणिक यात्रा भी चुनौतियों से भरी रही है। उन्होंने 1999 में मैट्रिक, 2001 में इंटरमीडिएट और 2009 में इग्नू से स्नातक की डिग्री प्राप्त की। दिसंबर 2005 से वे इसी विद्यालय में सहायक शिक्षक के पद पर कार्यरत हैं और निरंतर बच्चों को शिक्षित कर रहे हैं। सामाजिक उपेक्षा का सामना करना पड़ा मो. अकबर अंसारी ने बताया कि दिव्यांगता के कारण उन्हें जीवन में कई कठिनाइयों और सामाजिक उपेक्षा का सामना करना पड़ा। लोगों के ताने और असामान्य व्यवहार के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी, बल्कि खुद को और मजबूत बनाया। उनके अनुसार, शिक्षा ही वह माध्यम है जिसने उन्हें आत्मनिर्भरता और सम्मान दिलाया। नियमित सरकारी शिक्षक के रूप में नियुक्ति नहीं मिल पाई उन्होंने इस बात पर खेद व्यक्त किया कि इतने वर्षों की सेवा के बावजूद उन्हें अब तक नियमित सरकारी शिक्षक के रूप में नियुक्ति नहीं मिल पाई है। इसके बावजूद, बच्चों को पढ़ाना और उनके भविष्य को संवारना ही उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। विद्यालय के छात्र-छात्राओं का कहना है कि मो. अकबर अंसारी बहुत लगन से पढ़ाते हैं और उनसे उन्हें यह सीख मिलती है कि कठिन परिस्थितियों में भी मेहनत और लगन से सफलता प्राप्त की जा सकती है। विद्यालय के प्रभारी प्राचार्य ने भी पुष्टि की कि हाथ न होने के बावजूद उनकी शिक्षण क्षमता में कोई कमी नहीं है।


