भास्कर न्यूज | हजारीबाग दावोस, स्विट्जरलैंड में वर्ल्ड इकॉनोमिक फोरम 2026 जारी है। जहां विश्व भर के देशों के प्रमुख और प्रतिनिधि मंडल भाग ले रहे हैं। भारत से भी केंद्रीय मंत्रिमंडल समेत अनेक राज्यों के मुख्यमंत्री और प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। इन कार्यक्रमों में देश व राज्यों के विकास को बढ़ावा देने समेत जलवायु परिवर्तन व अन्य समस्याओं के समाधान पर गहन चर्चाएं की जा रहीं हैं। वहीं सीआईआई इंडिया सस्टनेबिलिटी टास्क फोर्स के अध्यक्ष के रूप में हजारीबाग लोकसभा के पूर्व सांसद जयंत सिन्हा भी इस विश्व आर्थिक मंच की बैठकों में भारत का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्होंने दावोस में जेएसडब्ल्यू ग्रुप के प्रबंध निदेशक पार्थ जिंदल और जर्मनी के महत्वपूर्ण प्रतिनिधि मंडल के साथ जलवायु केंद्र के विषय में बैठक की। इसका उद्देश्य जलवायु वित्त के क्षेत्र में सतत वृद्धि को लेकर था। इसके साथ ही वे केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी, गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी, आंध्र प्रदेश सरकार में मंत्री नारा लोकेश और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन समेत अन्य महत्वपूर्ण प्रतिनिधियों के साथ अहम बैठक में शामिल हुए। इस बैठक का मुख्य लक्ष्य जलवायु परिवर्तन का सामना करते हुए भारत के सतत विकास के लिए साधन कैसे सृजित किए जा इस पर चर्चा हुई। जयंत सिन्हा ने कहा कि विश्व के अन्य देशों की तरह भारत भी जलवायु परिवर्तन की एक गंभीर चुनौती का सामना कर रहा है। इसके लिए ग्रीन इन्वेस्टमेंट और क्लाइमेट फाइनेंस को बढ़ावा देना अत्यंत आवश्यक है। भारत में विदेश से निवेश बढ़ाकर पर्यावरण के अनुकूल तकनीक, स्वच्छ ऊर्जा और सतत विकास को गति दी जा सकती है। जयंत सिन्हा ने इन बैठकों के दौरान झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से भी मुलाकात की। इस बैठक में दोनों नेताओं के बीच झारखण्ड के विकास को बढ़ावा देने को लेकर चर्चा हुई। साथ ही उद्योग, मैन्युफैक्चरिंग, खनन, ग्रीन एनर्जी और उभरते क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं पर भी विचार हुआ। इसके साथ ही जयंत सिन्हा ने दावोस में विश्व आर्थिक मंच के क्रिटिकल मिनरल्स, क्लीन-टेक और ऊर्जा सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर वैश्विक विशेषज्ञों के साथ विस्तृत चर्चा में भाग लिया। जयंत सिन्हा ने कहा की मैं भारत और झारखण्ड के उज्ज्वल भविष्य के लिए निरंतर प्रयासरत हूं। ताकि हमारा देश, राज्य और हज़ारीबाग, विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचे।


