MD ड्रग्स : प्रतापगढ़ में छोटे से गांव देवल्दी में एक फार्म हाउस पर AGTF ने 16 दिसंबर को 40 करोड़ रुपए की एमडी ड्रग्स पकड़ी। गांजा : भीलवाड़ा में 6 जनवरी को हाईवे पर ट्रक से 4.89 करोड़ का 978 किलो गांजा पुलिस ने पकड़ा। हेरोइन : खाजूवाला बॉर्डर क्षेत्र के नीलकंठ पोस्ट पर पिछले साल 2 अक्टूबर को कैमरों से लैस ड्रोन पकड़ा, जिसमें करीब 11 करोड़ रुपए की हेरोइन बरामद हुई। ये कार्रवाई बता रही हैं कि राजस्थान में किस तरह शहर से लेकर बॉर्डर तक ड्रग्स का जाल बिछा है। गांजा और हेरोइन ही नहीं, राजस्थान एमडी ड्रग्स के तस्करों की गिरफ्त में है। नशे के माफिया प्रदेश के 26 लाख लोगों को एडिक्ट बना चुके हैं। इनमें करीब 3 लाख तो नाबालिग हैं। NCB के जारी आंकड़ों में सामने आया है कि पंजाब व हरियाणा के बाद राजस्थान तीसरे नंबर पर है। ड्रग्स लेने वालों की संख्या के साथ-साथ बेचने वाले भी तेजी से बढ़े हैं। ड्रग्स की सप्लाई में पढ़े-लिखे युवाओं, महिला पैडलर का इस्तेमाल किया जा रहा है। झाड़ू और मेहंदी के कोन में छिपाकर ड्रग्स सप्लाई हो रही है। सबसे ज्यादा यूनिवर्सिटी और कोचिंग एरिया में पढ़ने-रहने वाले युवाओं को टारगेट किया जा रहा है। कुछ दिन मुफ्त में ड्रग्स देकर पहले उन्हें नशे का आदी बनाया जाता है, फिर वही युवा ग्राहक बन जाता है। संडे बिग स्टोरी में पढ़िए- कैसे राजस्थान में बढ़ रहा है नशे का कारोबार सबसे पहले उन युवाओं की कहानी, जिन्हें पहले मुफ्त में गांजा-स्मैक देकर नशे का एडिक्ट बनाया गया… केस-1 : घर से झूठ बोलकर पैसा लाता, स्मैक का नशा करता
भीलवाड़ा का 21 साल का हेमराज (बदला हुआ नाम)। आठवीं कक्षा से ही नशे का शिकार हो गया। स्कूल के बाहर सिगरेट में गांजा पिलाया गया। परिवार वालों ने अच्छी पढ़ाई के लिए बड़े शहर जोधपुर के एक कॉलेज में दाखिला दिलवाया। वहां हॉस्टल में कुछ ऐसे लोगों से मुलाकात हुई, जो स्मैक और कई तरह की ड्रग्स सप्लाई करते थे। शुरुआत में कुछ दिन मुफ्त में नशा करवाते थे। हेमराज ने बताया कि मुझे भी कुछ दिन तक स्मैक मुफ्त में पिलाई गई। बाद में पैसे मांगने लगे। मैं घर से झूठ बोलकर पैसे लाता और स्मैक का नशा करता। नशे के कारण कॉलेज में बदनामी झेलनी पड़ी। सब लोग स्मैकची…स्मैकची बुलाने लगे थे। कॉलेज की फीस लेकर नशे में उड़ा देता था। मेरी पढ़ाई छूट गई। लोग मजदूर रखने को भी तैयार नहीं। अब एक रिहैब सेंटर में फिर से बिना नशे की हंसती-खेलती जिंदगी जीने की राह देख रहा हूं। केस-2 : दोस्तों ने बीड़ी में पिलाया गांजा, कुछ ही महीनों में स्मैक पीने लगा
जोधपुर के 19 साल के अनिल (बदला हुआ नाम)। अनिल को स्कूल के कुछ दोस्तों ने बीड़ी में मिलाकर गांजा पिलाया था। कुछ दिन तो दोस्तों ने मुफ्त में पिलाया फिर सौ रुपए लेकर पुड़िया देने लगे। कुछ ही दिन में गांजे की ऐसी भयंकर लत लगी कि अनिल नशे के लिए घर से पैसा तक चुराने लगा। अनिल ने बताया कि टेक्निकल डिग्री के लिए मैंने कॉलेज में दाखिला लिया। वहां इंस्टीट्यूट से बाहर कुछ दोस्त बने। वो स्मैक पीते थे। एक दिन उन दोस्तों ने कहा- स्मैक लिया कर। इसमें मजा आता है। मैं जानता नहीं था कि ये नशा जिंदगी बर्बाद कर देगा। स्मैक पीकर क्लास में चला गया। इस हरकत के बाद मेरा वहां से नाम काट दिया गया। पढाई बीच में छूट गई। नशे की लत के चलते कोई जॉब भी नहीं देता था। कई साल तक ड्रग्स का शिकार रहने के बाद परिवार ने झालामंड स्थित नशा मुक्ति केंद्र भेजा। सरहद से लेकर कोचिंग हब तक ड्रग की सप्लाई, राजस्थान तीसरे नंबर पर
गांजा, अफीम, स्मैक, डोडा, हेरोइन, एमडी ड्रग्स हो या फिर अल्प्राजोलम-ट्रामाडोल जैसा मेडिकल नशा अनिल और हेमराज की तरह राजस्थान के लाखों युवाओं की जिंदगी बर्बाद कर रहा है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) के आंकड़े बता रहे हैं कि ड्रग्स की लत के मामलों में पंजाब व हरियाणा के बाद देश भर में राजस्थान तीसरे नंबर पर पहुंच गया है। एनसीबी जोधपुर के जोनल हेड घनश्याम सोनी ने बताया- सोशल जस्टिस के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के 2 लाख 93 हजार 500 नाबालिग जिनकी उम्र 10 से 17 वर्ष के बीच हैं, ड्रग्स की चपेट में है। वहीं 22 लाख 79 हजार वयस्क युवा ड्रग्स की चपेट में हैं। प्रदेश में कुल 25 लाख 72 हजार 500 लोग हैं, जो नशे की चपेट में आ चुके हैं। यह आंकड़ा पंजाब व हरियाणा के बाद देश भर में तीसरे नंबर पर है। पंजाब में 66 लाख 70 हजार लोग ड्रग्स के शिकार हैं तो वहीं हरियाणा में यह आंकड़ा 43 लाख के करीब है। ड्रग्स तस्करों की संख्या भी बढ़ी, महिलाएं भी बेच रहीं नशा
राज्य में नार्को ऑफेंडर यानी नशा बेचने या तस्करी करने वालों की संख्या भी बढ़ी है। पिछले वर्ष (2024) में कुल 65 हजार लोगों पर एनडीपीएस के तहत केस दर्ज हुए हैं। इसमें कई महिला तस्कर और पैडलर भी शामिल हैं। ड्रग्स के सप्लायर महिलाओं और कॉलेज की लड़कियों से नशा बिकवा रहे हैं। जल्द पैसा कमाने के लालच में महिलाएं और युवतियां पैडलर बन रही हैं। नवंबर 2023 में जोधपुर की डीएसटी टीम ने 95 ग्राम एमडी के साथ एक महिला पैडलर नवरंग विश्नोई (25) पत्नी प्रकाश विश्नोई को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में नवरंग ने बताया था कि वह छोटी-मोटी पैडलर है, असली सप्लायर तो सीमा है। बाद में पुलिस ने ड्रग सप्लायर सीमा विश्नोई को उस समय गिरफ्तार किया, जब वो स्कूटी से कॉलेज और हॉस्टल वाले एरिया में ड्रग सप्लाई करने आई थी। उसके पास 850 ग्राम एमडी पकड़ी गई थी, जिसकी बाजार में कीमत करीब 1 करोड़ रुपए आंकी गई। यूनिवर्सिटी-कोचिंग एरिया में स्टूडेंट्स तस्करों के टारगेट पर
राजस्थान में ड्रग्स पैडलर कोटा, जोधपुर, जयपुर व अजमेर की यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट को टारगेट कर रहे हैं। हाल ही में जोधपुर में करवड़ थाना क्षेत्र के एक कुख्यात तस्कर मेहराराम विश्नोई को एनसीबी ने 3 दिसंबर 2024 को पकड़ा था। मेहराराम ने जोधपुर की आईआईटी, एनएलयू, एफडीडीआई, निफ्ट जैसी नेशनल यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट को ड्रग्स का शिकार बनाने के लिए ओडिशा से गांजे की बड़ी खेप मंगवाई थी। वह युवाओं को ड्रग्स का एडिक्ट बना कर अपना धंधा चलाना चाहता था। मेहाराम 2004 से गांजे की तस्करी में लिप्त है। एनसीबी से पूछताछ में उसने कबूल किया कि वह पहले भी जोधपुर IIT सहित कई नामी कॉलेज और इंस्टीट्यूट के स्टूडेंट्स को गांजा और अन्य ड्रग्स बेच चुका है। मेहराराम के दो साथी भी इसी काम में लिप्त हैं। 1 दिसंबर 2024 को जयपुर की मणिपाल यूनिवर्सिटी से एनसीबी ने 6 लाख कीमत की करीब 123.8 ग्राम MD ड्रग्स के साथ एक महिला तस्कर कविता गुर्जर को गिरफ्तार किया था। तस्कर कविता छोटे-छोटे पाउच में पैक किए गए मेफेड्रोन (एमडी) यूनिवर्सिटी कैंपस के आसपास सप्लाई करने वाली थी। ऑनलाइन से लेकर झाड़ू, वाइपर व मेहंदी कोन में सप्लाई
एनसीबी की पड़ताल में सामने आया है कि ड्रग्स की सप्लाई ऑनलाइन तरीके से भी हो रही है। डार्क वेब पर कई ऐसी साइट हैं, जहां ऑनलाइन ऑर्डर हो रहे हैं। पैडलर कॉलेज व हॉस्टल के आस-पास सिक्योरिटी से बचकर झाडू, वाइपर व मेहंदी कोन में डालकर भी ड्रग्स की सप्लाई कर रहे हैं। बीते वर्ष जोधपुर में मोगड़ा स्थित फैक्ट्री से मेहंदी कोन में एमडी ड्रग्स की सप्लाई करने का मामला सामने आया था। वहीं कई कार्रवाई में पता चला कि खाने-पीने की पैकेज्ड आइटम में डालकर भी एमडी ड्रग्स सप्लाई की गई है। एमडी ड्रग की ‘प्रोडक्शन मंडी’ बना राजस्थान
एनसीबी के जोनल डायरेक्टर घनश्याम सोनी के मुताबिक, एमडी ड्रग्स पहले मुंबई से आती थी। लेकिन अब नशे के सौदागर राजस्थान के डेजर्ट इलाकों में फैक्ट्रियां स्थापित कर रहे हैं। पिछली कई कार्रवाई में सिरोही, ओसियां, बाड़मेर के डेजर्ट इलाकों में एमडी ड्रग बनाने वाली लैब पकड़ी जा चुकी हैं। इससे समझ में आता है कि मारवाड़ अब एमडी ड्रग की ‘प्रोडक्शन मंडी’ बन गया है। इसे रोकने के लिए समय-समय पर प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। ओडिशा-आंध्र प्रदेश से आ रहा गांजा, गुजरात से एमडी बनाने का रसायन
राजस्थान में हर तरह के ड्रग्स की तस्करी हो रही है। गांजा ओडिशा, आंध्र प्रदेश व पश्चिम बंगाल से ट्रेनों के जरिए राजस्थान लाया जा रहा है। इसकी सप्लाई तस्कर क्लब व पब में कर रहे हैं। अकेले जोधपुर में अबतक 2000 किलो के करीब गांजा पकड़ा जा चुका है। एनसीबी के जोनल डायरेक्टर घनश्याम सोनी बताते हैं- इस पर लगाम लगाने के लिए एनसीबी लगातार जीआरपी के सहयोग से ट्रेन में आने वाले तस्करों पर कार्रवाई कर रही है। हाल ही में बड़े तस्करों को दबोचा भी है। एनसीबी की मानें तो राजस्थान में नेचुरल ड्रग्स (गांजा-अफीम-डोडा) की जगह आर्टिफिशियल ड्रग्स (स्मैक-हेरोइन-एमडी) लिया जा रहा है। केमिकल से बनने वाले ड्रग्स को आर्टिफिशियल ड्रग्स कहते हैं। यह बहुत ही खतरनाक होता है। एमडी आर्टिफिशियल ड्रग्स में आता है। यह है एमडी का रूट मैप
एमडी तैयार करने के लिए जरूरी केमिकल गुजरात के कई जगहों से खरीदे जा रहे हैं। इनका एक रूट मैप भी सामने आया है। केमिकल ट्रकों में ड्रम के माध्यम से भरूच, वापी, अहमदाबाद होते हुए डिसा, भीलड़ी सांचौर, जालोर व जोधपुर पहुंच रहा है। वर्तमान में मारवाड़ का जालोर, सांचौर व जोधपुर ग्रामीण क्षेत्र एमडी की मैन्युफैक्चरिंग मंडी में कनवर्ट हो रहा है। 2024 में एनसीबी की कार्रवाई
राजस्थान में एनसीबी के अलावा भी कई सुरक्षा एजेंसियों ने ड्रग्स सीज किया है। एनसीबी के आंकड़ों की बात करें तो नारकोटिक्स ने बीते एक साल में 865 किलो गांजा सीज किया है, जो देश में एनसीबी द्वारा जब्त किए गए गांजे में दूसरे नंबर पर है। पहले नंबर पर हरियाणा है, जहां 9099 किलो गांजे की जब्ती हुई है। इसके अलावा एनसीबी ने 12.500 किलो हेरोइन जब्त की है, जो पंजाब व हरियाणा के बाद तीसरे नंबर पर है। पंजाब में 1105 किलो व हरियाणा में 31.90 किलो हेरोइन पकड़ी गई है।


