महाकुंभ भगदड़ में पति की मेरे सामने कुचलकर मौत:भीड़ रौंदते हुए निकली, गोरखपुर के 5 परिवारों की दर्दनाक कहानी

‘हम गंगा नहाकर लौट रहे थे, सोचा खरीदारी कर लें, मगर भीड़ बढ़ गई। अचानक लोग एक तरफ भागने लगे। बैरिकेडिंग पर चढ़कर दूसरी तरफ कूदने लगे। मेरे पति धक्का लगने से नीचे गिर गए। मैं उनके पीछे चल रही थी, मैं भी उनके ऊपर ही गिरी। भीड़ हमें पैरों तले कुचलते हुए निकल रही थी। चंद सेकेंड में लगा मानो पूरा शरीर टूट गया। मन में एक दिलासा थी कि मेरे नीचे पति कम से कम सुरक्षित हैं। मगर जब यह सब थमा, तब तक उनकी जान निकल चुकी थी। मैं अभागी बच गई…।’ यह दुख गोरखपुर की कुसुम देवी का है, जिनके पति पन्नेलाल निषाद की महाकुंभ भगदड़ में भीड़ से कुचलकर मौत हो गई। बहू ने कहा- पापा की तबीयत खराब रहती थी, फिर भी वह कुंभ गए
दैनिक भास्कर ऐप की टीम गोरखपुर जिला मुख्यालय से 35Km दूर खजनी इलाके के उनवल कस्बा पहुंची। कुसुम देवी का घर बहुत सामान्य दिख रहा था। घर के बरामदे से अंदर 2 कमरे बने हुए थे। यहां हमारी मुलाकात उनकी बहू वंदना से हुई। वह कहती हैं- भगदड़ के बारे में न्यूज चैनल पर देखा, तब हम सब डर गए। मैंने अपनी सास कुसुम को फोन किया। उन्होंने कहा- हम सब भगदड़ में दब गए थे। इसके बाद उनका फोन स्विच ऑफ हो गया। उनके साथ गए लोगों को फोन करना शुरू किया, मगर सब बिछड़ गए थे। कोई एक-दूसरे के बारे में सही से कुछ नहीं बता पा रहा था। किसी तरह उनका फोन दोबारा ऑन हुआ। हमें बताया गया कि वह एक अस्पताल में हैं। हमने पूछा- परिवार में और कौन-कौन हैं? उन्होंने रोते हुए बताया कि हमारे ससुर (पन्नेलाल) के चार बेटी और दो बेटे हैं। हमारी ननद सुधा की शादी हुई है, लेकिन उसके पति ने छोड़ दिया। पापा की एक साल से तबीयत खराब थी, घर पर ही रहते थे। बावजूद इसके वह महाकुंभ में गए। बोले- ये 144 साल बाद आया है। जब उनकी तबीयत ठीक थी, तब वह पेंट-पालिश का काम करते थे। बेटे बोले- मां का फोन उठा, बताया कि वह दुनिया में नहीं रहीं
उनवल कस्बा के लोगों से बातचीत के बाद सामने आया कि सिर्फ पन्नेलाल निषाद ही नहीं, झंगहा की नगीना देवी और प्रभुनाथ, चौरी चौरा के भाऊपुर इलाके में लाली देवी के परिजन भी भगदड़ के बाद घर वापस नहीं आए हैं। यहां 6 लोगों की मौत हुई हैं। भास्कर टीम अब दूसरे परिवारों से बात करने के लिए 50Km दूर झंगहा पहुंची। यहां रहने वाली नगीना देवी भी महाकुंभ गईं थीं। उनके मोहल्ले के और लोग भी साथ गए थे। 29 जनवरी की सुबह जब उनके छोटे बेटे सिकंदर निषाद को भगदड़ की जानकारी मिली, तब इस उम्मीद से मां को फोन लगाने लगे कि वह सुरक्षित होंगी। मगर फोन नहीं लग रहा था। जब फोन नहीं उठा तो दिल की धड़कन बढ़ने लगी। 11 बजे फोन लगा तो सामने से किसी ने बताया कि जिसका यह फोन है, वह इस दुनिया में नहीं हैं। गांव से साथ गए लोग उन्हें लेकर आए हैं। यह सब बताते हुए वह रोने लगते हैं। सिकंदर ने कहा- प्रशासन ने मदद की, घर तक शव पहुंचवाया
सिंकदर कहते हैं- एम्बुलेंस से शव घर लाया गया। प्रशासन की ओर से व्यवस्था की गई थी। खजनी तहसील से कानूनगो व लेखपाल भी पहुंचे थे। प्रयागराज से एक कॉन्स्टेबल की ड्यूटी लगाई गई थी। सिकंदर ने बताया कि 2022 में पिता की मृत्यु हो गई थी। उसके बाद मां की तबीयत खराब रहने लगी। मगर अब वह ठीक थीं। नगीना देवी के चार बेटे हैं। संतोष सबसे बड़े हैं, उनकी तबीयत भी खराब रहती है। धर्मेंद्र व जितेंद्र बाहर रहकर कमाते हैं। बृजमोहन ने कहा- लोग पत्नी को कुचलते हुए भाग रहे थे
इसके बाद हम करीब 19Km दूर चौरी चौरा इलाके में पहुंचे। यहां हमारी मुलाकात भाऊपुर में रहने वाले बृजमोहन से हुई। उनका रो-रोकर बुरा हाल था। वह अपनी सास, पत्नी लाली और गांव की पानमती के साथ गंगा नहाने गए थे। उन्होंने बताया कि 28 जनवरी की रात यानी मौनी अमावस्या पर वह सेक्टर 20-21 में मौजूद थे। अचानक भीड़ बढ़ गई। उनसे उनकी पत्नी का हाथ छूट गया और वह गिर गईं। वह कहते हैं- वह मुझसे बिछड़ गईं। लोग एक-दूसरे के ऊपर से भाग रहे रहे थे। मैंने देखा कि वह लोग उसे कुचलते हुए भाग रहे हैं, मैं क्या करता। 5 लोग गए थे, जिसमें से दो नहीं रहे। इस घटना में देवरिया निवासी सास की भी मौत हो गई। प्रशासन ने शव को एम्बुलेंस से भेजा है। लाली के दो बेटे व एक बेटी है। बेटी की शादी हो चुकी है। ऊषा देवी बोलीं- हाथ छूटा, साथ भी छूट गया
इसके बाद भास्कर टीम करीब 14 Km दूर बक्सूरी इलाके में पहुंची। यहां रहने वाली ऊषा देवी घर के अंदर रोती हुई मिलीं। महाकुंभ में वह अपने पति प्रभुनाथ के साथ गई थीं। ऊषा देवी ने कहा- हम जब भी बाहर जाते थे, एक-दूसरे का हाथ पकड़े होते थे। कभी हाथ नहीं छूटता था। महाकुंभ में अचानक लोग भागने लगे। मेरा हाथ पति के हाथ से छूट गया। पहली बार हाथ क्या छूटा, साथ भी छूट गया। ऊषा देवी वहां का मंजर याद कर सहम जा रही हैं। प्रभुनाथ के दो बेटे व एक बेटी हैं। भगदड़ में प्रभुनाथ की मौत हो गई हैं। 48 घंटे बाद एम्बुलेंस से शव लेकर घर पहुंचीं। प्रभुनाथ का अंतिम संस्कार हो चुका है। नागेंद्र और रिंकी देवी भी नहीं रहीं
महाकुंभ की भगदड़ में नागेंद्र की भी मौत हो गई। वह बेंगलुरु में कमाते थे और वहीं से प्रयागराज आए थे। गोरखपुर के सहजनवां इलाके के भड़सार ग्राम पंचायत में रहते थे। भतीजे प्रदीप ने बताया- शुरू में प्रशासन शव देने को तैयार नहीं था। गार्जियन को बुलाने की बात कह रहा था। गोरखपुर में नागेंद्र के दो बेटे व दो बेटियां हैं। हम लोग बहुत परेशान थे। यहां से परिजनों को भेजा गया। इसके बाद ही शव मिल सका। इसी तरह जंगल कौड़िया इलाके के उत्तरासोत में रहने वाली 35 वर्षीय रिंकी देवी की भी मौत हो गई। वह 27 जनवरी को बस से प्रयागराज गई थीं। गुरुवार को उनका अंतिम संस्कार किया गया। घरवालों का रो-रो कर बुरा हाल है। उनकी तीन बेटियां हैं। …………………
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