हरियाणा की अनाज मंडियों में ‘कच्ची पर्ची’ पर विवाद:पूर्व साइंटिस्ट बोले- कागजों में फसलें MSP पर, किसानों को भुगतान कम, प्रिंटेड रसीद दी जाए

हरियाणा में सरकारी नौकरी में पर्ची खर्ची के बाद अब अनाज मंडियों में आढ़तियों द्वारा किसानों को दी जाने वाली ‘कच्ची पर्ची’ की चर्चा हो रही है। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के पूर्व चीफ साइंटिस्ट डॉ. वीरेंद्र सिंह लाठर ने किसानों को दिए जाने वाली इस कच्ची पर्ची को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की है। आज इस मामले में सुनवाई है। लाठर ने याचिका में कहा है कि ये जो कच्ची पर्ची का सिस्टम चल रहा है, इसे बंद किया जाए। इसकी जगह किसानों को पक्की रसीद दी जाए, जो प्रिंटेड हो। ये कच्ची पर्ची के सिस्टम से किसानों को नुकसान हो रहा है। किसानों को उनकी फसल का सही दाम नहीं मिल रहा है, क्योंकि उनसे कम पैसे दिए जा रहे हैं। इस तरह किसानों का बहुत बड़ा नुकसान हो रहा है। बता दें कि करीब तीन माह पूर्व हरियाणा की अनाज मंडियों में 2 बड़े घोटाले सामने आए थे। महेंद्रगढ़ और रेवाड़ी जिलों में जहां भावांतर भरपाई योजना का लाभ हड़पने के लिए कागजों में ही बाजरा खरीद दिखाई गई थी, वहीं, करनाल समेत कई मंडियों में फर्जी गेट पास काटकर कागजों में ही धान की आवक दिखा दी गई थी। इसकी रिपोर्ट मिलने के बाद CM नायब सैनी ने मंडी से जुड़े 5 अधिकारियों-कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया था। कच्ची पर्ची को लेकर लगाई याचिका की अहम बातें… अब जानिए वीरेंद्र लाठर ने क्या कहा….. तीन माह पहले भी पकड़े गए थे घोटाले, 5 अधिकारी-कर्मचारी हुए थे सस्पेंड
करीब तीन माह पूर्व सीएम नायब सैनी ने हरियाणा की अनाज मंडियों में 2 बड़े घोटाले सामने आने के पांच अधिकारियों को सस्पेंड किया था। इनमें महेंद्रगढ़ जिले की कनीना मंडी के सचिव-सह-ईओ मनोज पराशर और रेवाड़ी जिले की कोसली अनाज मंडी के सचिव-सह-ईओ नरेंद्र कुमार को सस्पेंड किया गया था। वहीं, करनाल जिले में मंडी सुपरवाइजर हरदीप, अश्वनी और ऑक्शन रिकॉर्डर सतबीर को सस्पेंड किया गया था। महेंद्रगढ़ व रेवाड़ी जिलों में जहां भावांतर भरपाई योजना का लाभ हड़पने के लिए कागजों में ही बाजरा खरीद दिखाई गई थी। वहीं, करनाल समेत कई मंडियों में फर्जी गेट पास काटकर कागजों में ही धान की आवक दिखाई थी। सरकार को सूचना मिलने पर जांच टीम ने कनीना अनाज मंडी में ई-खरीद पोर्टल और मार्केट कमेटी के एच रजिस्टर के आंकड़ों में अंतर पाया था। मार्केट कमेटी के अधिकारी व्यापारियों से मिलीभगत कर गेट पास व J-फॉर्म काटने के 100 रुपए क्विंटल की अवैध वसूली करते थे, ताकि भावांतर भरपाई का पैसा बिना बाजरा बेचे किसानों के खाते में आ जाए। मार्केटिंग बोर्ड की जांच टीम मंडी में पहुंची तो व्यापारी भी अपने रजिस्टर लेकर इधर-उधर खिसक लिए। हरियाणा मार्केटिंग बोर्ड के मुख्य प्रशासक मुकेश आहुजा ने जांच टीम की रिपोर्ट के आधार पर अनाज मंडी कनीना के सचिव मनोज पराशर को सस्पेंड कर दिया था। ——————- किसानों से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… हरियाणा की मंडियों में घोटाले की इनसाइड स्टोरी:करनाल में जितना धान, पोर्टल पर उससे दोगुनी एंट्री; महेंद्रगढ़-रेवाड़ी में बिना फसल भावांतर दिया हरियाणा की अनाज मंडियों में 2 बड़े घोटाले सामने आए हैं। महेंद्रगढ़ व रेवाड़ी जिलों में जहां भावांतर भरपाई योजना का लाभ हड़पने के लिए कागजों में ही बाजरा खरीद दिखाई गई। वहीं, करनाल समेत कई मंडियों में फर्जी गेट पास काटकर कागजों में ही धान की आवक दिखाई। इसकी रिपोर्ट मिलने के बाद CM नायब सैनी मंडी से जुड़े 5 अधिकारियों-कर्मचारियों को सस्पेंड कर चुके हैं। पढ़ें पूरी खबर… फसलें खराब हरियाणा की, मुआवजा लेंगे यूपी-राजस्थान:मेरी फसल मेरा ब्योरा में बड़ी गड़बड़ी, दूसरे राज्यों के किसानों के नाम फसल पंजीकरण हरियाणा में बाढ़-बारिश या जलभराव से खराब हुई फसलों का मुआवजा मिलने की उम्मीद में बैठे किसानों को झटका लग सकता है। सरकार ने खराब फसलों का ब्योरा दर्ज कराने के लिए ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल खोला था। इस पर 15 सितंबर तक 5 लाख किसानों ने 29.49 लाख एकड़ में खड़ी फसलों को नुकसान बताते हुए क्लेम किया। पढ़ें पूरी खबर…

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