मप्र लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) ने राज्य सेवा एवं वन सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2026 का सिलेबस जारी कर दिया है। इस बार प्रारंभिक परीक्षा के दूसरे प्रश्न पत्र सामान्य अभिरुचि परीक्षण में अहम बदलाव किए गए हैं। आयोग के पोर्टल पर अपलोड सिलेबस के अनुसार प्रश्न पत्र को सात भागों में विभाजित किया गया है। दूसरे पेपर में अब बोधगम्यता, संप्रेषण कौशल, तार्किक व विश्लेषणात्मक क्षमता, निर्णय क्षमता व समस्या समाधान, सामान्य मानसिक योग्यता, आधारभूत संख्यात्मकता और हिंदी भाषा में बोधगम्यता कौशल से जुड़े प्रश्न पूछे जाएंगे। अधिकारियों के मुताबिक यह सिलेबस पहले की तुलना में अधिक व्यावहारिक और विश्लेषणात्मक बनाया गया है। आयोग ने राज्य सेवा और वन सेवा परीक्षा-2026 की अधिसूचना 31 दिसंबर को जारी की थी। इसके तहत 21 विभागों के 156 पदों पर राज्य सेवा परीक्षा और 36 सहायक वन संरक्षक व रेंजर पदों पर वन सेवा परीक्षा आयोजित की जाएगी। आवेदन प्रक्रिया 10 जनवरी से 9 फरवरी तक चली। प्रारंभिक परीक्षा 26 अप्रैल को प्रदेश के 52 जिलों में आयोजित होगी। आयोग के अनुसार अभ्यर्थियों को 16 अप्रैल से एडमिट कार्ड जारी किए जाएंगे। परीक्षा में दो प्रश्न पत्र होंगे दोनों प्रश्न पत्र 300-300 अंकों के होंगे। सामान्य अध्ययन पेपर में भारत व मध्य प्रदेश का इतिहास, संस्कृति व साहित्य, भूगोल, संवैधानिक व्यवस्था, अर्थव्यवस्था, विज्ञान और पर्यावरण से संबंधित प्रश्न पूछे जाएंगे। चिकित्सा अधिकारी के 1832 पदों पर साक्षात्कार शुरू मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) चिकित्सा अधिकारी भर्ती के लिए आज से इंटरव्यू शुरू करने जा रहा है। भर्ती प्रक्रिया के तहत विभिन्न विशेषज्ञ पदों पर कुल 1832 पदों को भरा जाना है। आयोग ने साक्षात्कार के लिए 3925 अभ्यर्थियों को पात्र घोषित किया है। पूरी प्रक्रिया कम से कम दो माह तक चलेगी। आयोग की गाइडलाइन के अनुसार अभ्यर्थियों को निर्धारित समय से एक घंटे पहले आयोग कार्यालय में रिपोर्टिंग करना अनिवार्य होगा। रिपोर्टिंग के दौरान मूल दस्तावेजों की जांच की जाएगी। आयोग ने अभ्यर्थियों को समय का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी है, ताकि प्रक्रिया में किसी प्रकार की देरी न हो। सरकारी अस्पतालों और चिकित्सा विभाग में लंबे समय से भर्तियां नहीं होने के कारण यह प्रक्रिया काफी अहम मानी जा रही है। आयोग ने 1 अक्टूबर 2024 को जारी विज्ञापन में पहले केवल 895 पदों का उल्लेख किया था, लेकिन करीब एक वर्ष बाद पदों की संख्या बढ़ाकर 1832 कर दी गई।


