बड़वानी जिले में अपनी जमीन और घरों को बचाने के लिए पिछले 23 दिनों से आंदोलन कर रहे तलून और करी गांव के लोगों को बड़ी सफलता मिली है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने ग्रामीणों के प्रतिनिधिमंडल को भरोसा दिलाया है कि नेशनल हाईवे (NH347B) को गांवों के बीच से ले जाने के बजाय बाहर से बायपास के जरिए निकाला जाएगा। इस आश्वासन के बाद आंदोलनरत ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। प्रशासन से नहीं मिली मदद, नागपुर पहुंचे ग्रामीण ग्रामीण लंबे समय से नेशनल हाईवे के प्रस्तावित नक्शे का विरोध कर रहे थे। उनका कहना था कि हाईवे को गांव के बीच से निकालने से कई परिवार बेघर हो जाएंगे। जब स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से कोई ठोस हल नहीं निकला, तो ग्रामीणों का एक दल सीधे नागपुर में केंद्रीय मंत्री गडकरी से मिलने पहुंच गया। प्रतिनिधिमंडल ने उन्हें बताया कि हाईवे के वर्तमान सर्वे से घनी आबादी और सरकारी इमारतों को भारी नुकसान होगा। घनी आबादी और संस्थानों पर मंडरा रहा था खतरा ग्रामीणों ने मंत्री को दिए ज्ञापन में बताया कि हाईवे के प्रस्तावित मार्ग में वेयरहाउस, सरकारी कॉलेज, लैब, पेट्रोल पंप और खेल के मैदान जैसे महत्वपूर्ण स्थान आ रहे हैं। आबादी वाले इलाके से फोरलेन निकलने से न केवल लोगों के व्यापार और घर उजड़ेंगे, बल्कि भविष्य में हादसों का खतरा भी बढ़ जाएगा। ग्रामीणों का आरोप है कि साल 2024 में हुए शुरुआती सर्वे को बदलकर कुछ खास लोगों को फायदा पहुंचाने की कोशिश की जा रही थी, जो नियमों के खिलाफ है। मंत्री के आश्वासन से जागी नई उम्मीद मुलाकात के दौरान नितिन गडकरी ने ग्रामीणों की पूरी बात ध्यान से सुनी और मौके पर ही मौखिक रूप से फाइल में सुधार कर बायपास बनाने का आश्वासन दिया। प्रतिनिधिमंडल में शामिल राकेश जाट और मुकेश धनगर ने बताया कि मंत्री के इस फैसले से पूरे गांव में खुशी की लहर है। अब ग्रामीणों को उम्मीद है कि विभाग जल्द ही कागजी कार्रवाई पूरी कर बायपास का नया रास्ता तय करेगा, जिससे सैकड़ों परिवारों का भविष्य सुरक्षित हो सकेगा।


