राजसमंद झील में पानी की आवक बढाने के लिए खारी फीडर के चौड़ीकरण की वर्षों पुरानी मांग अब पूरी होती नजर आ रही है। फीडर के चौड़े होने के बाद आगामी मानसून में राजसमंद झील डबल स्पीड से लबालब हो सकेगी। झील में पानी की आवक बढ़ाने में खारी फीडर की भूमिका बेहद अहम मानी जाती है। 3786 एमसीएफटी भराव क्षमता और करीब 30 फीट के गेज वाली राजसमंद झील में पानी की आवक के दो प्रमुख स्रोत हैं पहला गौमती नदी और दूसरा नंदसमंद बांध से निकलने वाली खारी फीडर। वर्तमान में खारी फीडर की कुल लंबाई 32.4 किलोमीटर है, जबकि चौड़ाई महज 3 मीटर है। इसका निर्माण वर्ष 1962 से 1968 के बीच हुआ था। नंदसमंद बांध में अतिरिक्त पानी होने पर उसे इसी फीडर के माध्यम से राजसमंद झील में छोड़ा जाता है। संकरी चौड़ाई के कारण फिलहाल अधिकतम 400 क्यूसेक पानी ही झील तक पहुंच पाता है, जिससे पानी की आवक बेहद धीमी रहती है। बजट में मिली मंजूरी, पीएम ने किया शिलान्यास -क्षेत्रवासियों की लंबे समय से मांग रही कि खारी फीडर की चौड़ाई बढ़ाई जाए, जिससे पानी की आवक भी बढ़ सके। इसी मांग को ध्यान में रखते हुए गत बजट में खारी फीडर चौड़ीकरण की घोषणा की गई। इसके बाद डीपीआर और टेंडर प्रक्रिया पूरी की गई। 25 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खारी फीडर चौड़ीकरण कार्य का वर्चुअल शिलान्यास किया, जिसके बाद निर्माण कार्य शुरू हो गया। जल संसाधन खंड राजसमंद के अधिशासी अभियंता मानसिंह ने बताया कि टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद शिवशक्ति कंस्ट्रक्शन को यह कार्य सौंपा गया है। दो साल में पूरा होगा 123 करोड़ का प्रोजेक्टनिर्माण कार्य के तहत फीडर की चौड़ाई 3 मीटर से बढ़ाकर 5.80 मीटर की जाएगी। फीडर पर मौजूद दो प्रमुख एक्वाडक्ट्स के साथ दो नए समानांतर एक्वाडक्ट बनाए जाएंगे। इसके अलावा कुल 8 नए एक्वाडक्ट्स और संख्या 973 पर एक नया साइफन निर्माण प्रस्तावित है। इसके अलावा खारी फीडर पर 49 पुलिया का निर्माण किया जाएंगा। इस पूरे प्रोजेक्ट पर करीब 123 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत आएगी और इसे दो साल में पूरा किया जाना है। इस दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखा जाएगा कि मानसून में पानी की आवक बाधित न हो। साथ ही लीकेज और क्षतिग्रस्त दीवारों की मरम्मत भी की जाएगी, ताकि पानी का कोई नुकसान न हो। 42 गांवों को मिलेगा सीधा लाभखारी फीडर का कार्य पूरा होने के बाद 42 गांवों की करीब 10,450 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई के लिए पानी मिलेगा। इसके साथ ही पेयजल के लिए लगभग 700 एमसीएफटी पानी की मांग भी पूरी की जा सकेगी।


