बारहसिंगा दो साल में 48 से बढ़कर 62 हुए:14 नए शावक कुनबे में शामिल, बांधवगढ़ में चार दशक बाद लौटे

उमरिया के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक अच्छी खबर आई है। बाघों के लिए मशहूर बांधवगढ़ में अब बारहसिंगाओं का कुनबा भी तेजी से बढ़ रहा है। बारहसिंगा पुनर्स्थापना योजना के तहत लाए गए इन खास मेहमानों ने यहां के माहौल को अपना लिया है और बाड़े में 14 नन्हे शावकों (बच्चों) ने जन्म लिया है। इसके साथ ही इनकी संख्या 48 से बढ़कर अब 62 हो गई है। 40 साल बाद हुई थी वापसी बांधवगढ़ में करीब 40 साल बाद मार्च 2023 में बारहसिंगाओं को फिर से बसाने की शुरुआत की गई थी। फरवरी 2024 तक अलग-अलग चरणों में कुल 48 बारहसिंगा यहां लाए गए। इन्हें मगधी जोन के 50 हेक्टेयर में फैले एक सुरक्षित बाड़े में रखा गया था, जहां इनके खान-पान और सुरक्षा का पूरा ख्याल रखा गया। सुरक्षा के कड़े इंतजाम नन्हे बारहसिंगाओं को खतरों से बचाने के लिए वन विभाग ने पुख्ता इंतजाम किए हैं। जंगली हाथियों को दूर रखने के लिए सोलर फेंसिंग (झटके वाली तार) लगाई गई है। वहीं, अजगर जैसे रेंगने वाले जीवों से बच्चों को बचाने के लिए बाड़े में बारीक जाली का इस्तेमाल किया गया है। चौबीसों घंटे निगरानी के लिए एक स्पेशल टीम भी वहां तैनात रहती है। जल्द जंगल में दिखेंगे बारहसिंगा क्षेत्र संचालक अनुपम सहाय ने बताया कि 14 नए बच्चों के आने से पूरा कुनबा अब 62 का हो गया है। जल्द ही इन्हें बाड़े से निकालकर खुले जंगल में छोड़ने की तैयारी है, जिसके बाद पर्यटक टाइगर सफारी के दौरान इन बारहसिंगाओं का दीदार भी कर सकेंगे। साथ ही, फरवरी महीने में बारहसिंगाओं के एक और नए ग्रुप को बांधवगढ़ लाने की योजना बनाई गई है।

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