केंद्रीय जेल से 9 कैदी रिहा, उम्रकैद की थी सजा:गंगाजल और गीता लेकर निकले बाहर, रोजगार के लिए बंदियों को दिलाए जाएंगे लोन

गणतंत्र दिवस के मौके पर सागर के केंद्रीय जेल से 9 पुरूष बंदियों को रिहा किया गया है। यह बंदी जेल में हत्या के अलग-अलग मामलों में उम्रकैद की सजा काट रहे थे। मध्यप्रदेश शासन जेल विभाग से जारी दिशा-निर्देश के तहत आजीवन कारावास से दंडित बंदियों को सजा में विशेष माफी दी गई है। इस नीति के तहत आजीवन कारावास से दंडित बंदियों में बलात्कार पॉक्सो आदि प्रकरण वाले दंडित बंदियों को किसी भी प्रकार की माफी प्रदान नहीं की गई है। रिहाई के दौरान रामसरोज समूह ने बंदियों को गीता, गंगाजल और कंबल भेंट किए। जिसके बाद उन्हें वाहन की व्यवस्था कर घर भेजा गया। जेल में सिखाई गईं स्किल
रिहा किए जा रहे बंदियों को जेल में रहने के दौरान उनके पुनर्वास के लिए उन्हें टेलरिंग, कारपेंटरी, लौहारी, भवन निर्माण मिस्त्री, प्रिंटिंग प्रेस, हथकरघा, बुनाई उद्योग आदि का काम भी सिखाया गया है। जिससे रिहा होने के बाद वे अपनी रोजी रोटी के साधन अर्जित कर सकें। मध्यप्रदेश शासन की रिहाई दिशा-निर्देश में आवश्यक संशोधन किया गया है और अब आजीवन कारावास से दंडित बंदियों को वर्ष में 5 अवसरों पर रिहा किया जाएगा। पूर्व में गणतंत्र दिवस, अम्बेडकर जयंती, स्वतंत्रता दिवस और गांधी जयंती पर बंदी रिहा किए जाते थे। लेकिन अब राष्ट्रीय जनजाति गौरव दिवस (15) नवंबर) को भी आजीवन कारावास से दंडित बंदियों को पात्रतानुसार रिहा किया जाएगा। इन बंदियों को किया गया रिहा
जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे बंदी रोने उर्फ रोहन पिता हरिराम आदिवासी, श्यामलाल पिता झम्मू आदिवासी, ध्रुव सिंह पिता परमलाल लोधी, लक्ष्मण पिता बन्दू रजक, रज्जन उर्फ राजकुमार पिता मन्नूलाल रैकवार, मस्ताना उर्फ गोविन्द पिता मुन्ना रैकवार, कालका पिता बैजनाथ कुशवाहा, पल्टू उर्फ परसराम पिता चूरामन पटैल, राजेन्द्र पिता भारत सिंह लोधी को गणतंत्र दिवस के मौके पर रिहा किया गया है। दोबारा अपराध नहीं करने की अपील की
केंद्रीय जेल अधीक्षक मानेन्द्र सिंह परिहार ने बताया कि शासन के आदेश पर पात्रतानुसार 9 बंदियों को जेल से रिहा किया गया है। यह बंदी हत्या के मामलों में उम्रकैद की सजा काट रहे थे। रिहा हुए सभी बंदियों को पुनर्वास के लिए टेलरिंग, कारपेंटरी, लौहारी और भवन निर्माण मिस्त्री जैसे कार्यों का प्रशिक्षण दिया गया है। ताकि वह जेल से बाहर जाकर काम करके अपने भविष्य को संवार सकें। रिहा हुए बंदियों से अपील की है कि वह दोबारा अपराध न करें। जरुरत के अनुसार बंदियों को दिलाएंगे लोन
रिहाई के दौरान रामसरोज समूह के सदस्य समाजसेवी शैलेश केसरवानी और अखिलेश मोनी केसरवानी केंद्रीय जेल पहुंचे। जहां उन्होंने रिहा रहे बंदियों को गीता, गंगाजल और कंबल भेंट किए। वाहनों की व्यवस्था कर बंदियों को घर भेजा गया। समाजसेवी शैलेश केसरवानी ने कहा कि अच्छे आचरण और अच्छे व्यवहार के कारण बंदियों को रिहा किया गया है। मतलब रिहा हुए बंदियों को पूर्व में किए गए या किसी परिस्थिति बस हुए जुर्म पर पछतावा है। वह आगे का जीवन सुधारना चाहते हैं, इसीलिए रामसरोज समूह द्वारा रिहा हुए बंदियों को आवश्यकता अनुसार लोन दिलवाने की व्यवस्था कराने की बात कही है। जिससे उस पैसे से बंदी स्वयं का कुछ रोजगार शुरू कर सकें। समाजसेवी अखिलेश मोनी केसरवानी ने कहा है कि कोई भी व्यक्ति जानबूझकर जुर्म के रास्ते पर नहीं जाता है। किसी मजबूरी या परिस्थिति बस या अनजाने में उससे ऐसा कार्य हो जाता है। लेकिन इस कारण से उसके परिवारजन उससे दूर हो जाते हैं। जिससे वह जेल के बाहर आकर चाहकर भी आगे के भविष्य के लिए नहीं सोच पता। इस दौरान जेलर मनोज मिश्रा, डिप्टी जेलर गीता पंकज कुशवाहा, डिप्टी जेलर गीता राठौर, जेलर हरिकिशन, राम राजपूत, अब्बी साहू, अतुल बालकिशोर, जय दुबे, देव शुक्ला अन्य मौजूद थे।

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