RTO इंस्पेक्टर की अवैध वसूली गैंग बेनकाव:दलालों से बंधा था कमीशन, लिस्ट के आधार पर होती थी वसूली; एसीबी ने किया खुलासा

परिवहन विभाग में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसको लेकर एसीबी ने बड़ा खुलासा किया है। एक आरटीओ इंस्पेक्टर ने सुनियोजित तरीके से अवैध वसूली की पूरी गैंग खड़ी कर रखी थी, जिसमें दलालों का फिक्स कमीशन तय था। वाहनों, लाइसेंस और अन्य कामों की एक तय लिस्ट के आधार पर रिश्वत की रकम वसूली जाती और सीधे इंस्पेक्टर तक पहुंचाई जाती थी। परिवहन विभाग में चल रहा ये अवैध वसूली के खेल का भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने खुलासा किया है। अवैध वसूली के खिलाफ मामला दर्ज कर एसीबी की ओर से सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच की जा रही है। एसीबी की जांच में राजस्थान के हाई-वे पर आरटीओ इंस्पेक्टर के अवैध वसूली गैंग खड़ी करना का सामने आया है। अवैध वाहन और ओवर लोडिंग वाहनों की लिस्ट के आधार पर दलालों की ओर से अवैध वसूली की जाती थी। सर्विलांस पर खुली पोल
एसीबी में दर्ज एफआईआर के मुताबिक, एसीबी मुख्यालय को सूचना मिली कि राजस्थान के हाईवे पर आरटीओ के नाम पर रिश्वत की अवैध वसूली का बड़ा खेल चल रहा है। परिवहन विभाग (आरटीओ) के सरकारी अधिकारी/कर्मचारियों के साथ मिलीभगत कर भ्रष्टाचार किया जा रहा है। एसीबी के सामने परिवहन विभाग के लिए अवैध वसूली में ऋषिराज सिंह, विक्रम प्रताप सिंह और निर्मल का नाम सामने आया। एसीबी की ओर से तीनों आरोपियों के कॉल को सर्विलांस पर लिया एसीबी की ओर से तीनों आरोपियों के कॉल को सर्विलांस पर लिया गया। बातचीत के तथ्यों के आधार पर जगजीत सिंह उर्फ जगत बन्ना, प्रदीप सिंह जोधा और विक्रम प्रताप सिंह के एक अन्य मोबाइल नंबर भी शामिल होना मिला। एसीबी ने छहों मोबाइल नंबर के सर्विलांस पर लेने पर अवैध वसूली की पोल खुली। रिश्वत में अवैध वसूली का खेल एसीबी की जांच में सामने आया कि अजमेर, ब्यावर और केकड़ी में तैनात परिवहन विभाग के अधिकारी/कर्मचारी की ओर से मध्यस्थ आरोपी दलालों के जरिए ओवर लोडिंग व्यवसायिक वाहनों और अवैध वाहनों के परिवहन पर नियमानुसार कोई कार्रवाई की जा रही है। कार्रवाई नहीं करने की एवज में अवैध रूप से वाहन ऑनर/ड्राइवर से रिश्वत ली जा रही है। लोकसेवकों और दलालों की ओर से आपस में मिलीभगत कर अवैध रूप से ओवरलोडिंग/अवैध वाहनों से परिवहन करने पर मासिक बंधी और प्रति वाहन नियमित तौर पर रिश्वत ली जा रही है। दलालों के जरिए ओवर लोडिंग व्यवसायिक वाहनों और अवैध वाहनों के परिवहन पर कार्रवाई नहीं करने की एवज में रुपए वसूले जाते थे। रिश्वत के तौर पर परिवहन निरीक्षक (आरटीओ इंस्पेक्टर) जल सिंह के लिए रुपए इकट्ठे किए जाते थे। इकट्ठा की गई रकम को आरोपी ऋषिराज सिंह की ओर से प्राइवेट व्यक्ति (दलाल) प्रदीप सिंह जोधा को भी आरटीओ इंस्पेक्टर जल सिंह को देने के लिए ब्यावर में किसी स्थान पर देता है। दलालों के जरिए चला रहे थे कॉल सेंटर जांच में सामने आया है कि दलाल वाहन ड्राइवरों से ओवरलोडेड वाहनों और अन्य कमियां मिलने पर कार्रवाई नहीं करने की एवज में अवैध वसूली कर रिश्वत पहुंचा रहे थे। पेमेंट का लेन-देन मोबाइल मैसेजिंग, डिजिटल पेमेंट और हाईवे ढाबों के जरिए हो रहा था। दलाल अलग-अलग मोबाइल का यूज कर कॉल सेंटर जैसी व्यवस्था चला रहे थे, जिसमें वाहन नंबर फॉरवर्ड कर रिश्वत के रुपए का लेन-देन आसान बनाया जाता है। एसीबी टीमों की ओर से संदिग्धों की लेन-देन को लेकर निगरानी की गई। काफी समय निकलने के बाद भी रिश्वत में ली अवैध वसूली रकम का लेन-देन नहीं हो रहा था। इसके बारे में एसीबी की ओर से जानकारी की गई। पता चला कि वर्तमान में आरटीओ इंस्पेक्टर जल सिंह का ट्रांसफर होने से दलालों की ओर से 3-4 दिन में अवैध रूप से वसूले रुपए खुद के पास ही रखे हुए है। आरटीओ इंस्पेक्टर के ट्रांसफर होने पर चले जाने के बाद कम रकम देनी पड़ेगी। कोड वर्ड में देते थे सूचना डीआईजी अनिल कयाल के सुपरविजन में ब्यूरो की 12 टीमों ने ब्यावर, नसीराबाद, विजयनगर, केकड़ी, किशनगढ़ और अजमेर ऑफिस के अधिकारियों, कर्मचारियों और निजी दलालों के 11 ठिकानों पर अचानक तलाशी ली। सर्च के दौरान होटल शेरे पंजाब (ब्यावर), जगदम्बा टी स्टॉल (नसीराबाद) और होटल आरजे-01 (नसीराबाद) के पास हाईवे से गुजरने वाले वाहनों से परिवहन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी से मिलीभगत कर निजी दलालों की ओर से अवैध वसूली करना पाई गई। दलाल विक्रम सिंह पिपरोली और संजय यादव कैश और पेटीएम से पैसा देकर उड़नदस्ते को कोड वर्ड में सूचना देते थे। सर्च में मिली वाहनों की लिस्ट जब मांगलियावास अजमेर स्थित ऋषिराज सिंह के घर की तलाश ली गई। तो तलाशी में संदिग्ध ऋषिराज के घर पर डॉक्यूमेंट और कैश बरामद हुआ। उसकी पत्नी के मोबाइल में भी व्यवसायिक वाहनों/ट्रकों के रजिस्ट्रेशन नंबरों की लिस्ट और स्केनर की फोटो (वॉट्सऐप) पर भेजी मिली। एसीबी कार्रवाई में आरटीओ इंस्पेक्टर जल सिंह मीणा की ओर से दलाल ऋषिराज सिंह, विक्रम प्रताप सिंह उर्फ विक्रम बन्ना उर्फ बंटी, निर्मल कुमार उर्फ संजय यादव और अन्य के जरिए अवैध वसूली कर रिश्वत लेना पाया गया। प्राइवेट व्यक्ति महेन्द्र प्रजापत, सुनील प्रजापत, मनोहर नायक और सोनू के जरिए ओवरलोड परिवहन करने वाले वाहनों के रजिस्ट्रेशन नंबर की लिस्ट बनाकर प्रति वाहन 800 रुपए प्रति चक्कर रिश्वत लेते थे। महेन्द्र, सुनील, मनोहर, सोनू और राधा स्वामी होटल दलाल विक्रम बन्ना के लिए अवैध वसूली के रुपए लेते थे। एसीबी ने सुनील और महेन्द्र से वाहनों की लम्बी लिस्ट भी जब्त की है। ऋषिराज सिंह की ओर से वसूली के 1100 से 1500 रुपए तक रिश्वत लेकर आरटीओ इंस्पेक्टर जल सिंह को देना पाया गया है। जांच में पाया गया कि इंस्पेक्टर जल सिंह ने ही कमिशन पर हाई-वे पर दलालों की फौज अवैध वसूली के लिए खड़ी कर रखी थी। आरटीओ इंस्पेक्टर सहित 13 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज जांच अधिकारी (एसीबी) एडिशनल एसपी ज्ञान प्रकाश नवल का कहना है- मामले की गंभीरता को देखते हुए FIR दर्ज कर जांच की जा रही है। आरटीओ इंस्पेक्टर सहित 13 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर अग्रिम अनुसंधान किया जा रहा है। ये खबर भी पढ़िए
होमगार्डों से हर महीने 1-2 हजार रिश्वत लेता था कमांडेंट:3 हजार रुपए ज्यादा वाली ड्यूटी में मासिक बंधी लेता, नहीं मिलने पर अफसरों के घर ड्यूटी पर लगाता जयपुर एसीबी की टीम ने 7 जुलाई को होमगार्ड के कमांडेंट नवनीत जोशी (47) और कंपनी कमांडर चंद्रपाल सिंह (58) को 25 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था। नवनीत जोशी के खिलाफ कई बार होमगार्ड के जवानों ने भ्रष्टाचार और बंधी की शिकायत मुख्यालय तक की थी। लेकिन विभाग की ओर से कोई एक्शन नहीं लिया गया। होमगार्ड जवान को वर्दी की ड्यूटी देने के लिए आरोपी 1 हजार रुपए से 2 हजार रुपए तक की बंधी हर माह लिया करते थे। (पढ़िए पूरी खबर)

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