संयुक्त बैंक संघों के आह्वान पर क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRBs) के कर्मचारी और अधिकारी पूर्णतः हड़ताल पर चले गए। ‘यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स’ (UFBU) के समर्थन में आरआरबी के सभी शीर्ष संघों ने एकजुट होकर केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इस विरोध प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य बैंकिंग उद्योग में ‘5-दिवसीय कार्य सप्ताह’ (Five Day Work Week) को तत्काल लागू करने की मांग करना है। इस संबंध में आज सभी ग्रामीण बैंकों के अध्यक्षों के माध्यम से भारत सरकार के वित्त मंत्रालय (वित्तीय सेवा विभाग) के सचिव को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया। प्रमुख मांगें और तर्क: भेदभाव बर्दाश्त नहीं यूनियनों द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि बैंकिंग क्षेत्र के साथ हो रहा सौतेला व्यवहार अब स्वीकार्य नहीं है। आईबीए के साथ हुए समझौते का पालन: यूनियन नेताओं ने याद दिलाया कि 7 दिसंबर 2023 और 8 मार्च 2024 को इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) और यूनियनों के बीच हुए समझौते में सभी शनिवारों को अवकाश घोषित करने की सिफारिश की गई थी, जिसे सरकार ने अभी तक मंजूरी नहीं दी है। अन्य वित्तीय संस्थानों से तुलना: ज्ञापन में तर्क दिया गया है कि जब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC), जीआईसी (GIC) और स्टॉक एक्सचेंज जैसे महत्वपूर्ण संस्थान पहले से ही सप्ताह में केवल 5 दिन कार्य कर रहे हैं, तो वाणिज्यिक और ग्रामीण बैंकों को इससे वंचित क्यों रखा जा रहा है। मानसिक और शारीरिक तनाव: बैंक कर्मियों ने अपनी व्यथा व्यक्त करते हुए कहा कि स्टाफ की भारी कमी और बढ़ते कार्यभार के कारण कर्मचारी अत्यधिक शारीरिक और मानसिक तनाव में हैं। शनिवार की छुट्टी न होने से उन्हें पुनर्जीवित होने का समय नहीं मिल पा रहा है। यूनियनों की चेतावनी: “यह तो बस शुरुआत है” हड़ताल के दौरान विभिन्न बैंक शाखाओं के बाहर विरोध प्रदर्शन किए गए। यूनियन नेताओं ने सरकार को संबोधित करते हुए कहा कि जब केंद्र और राज्य सरकारों के अधिकांश कार्यालय, मनी मार्केट और विदेशी मुद्रा लेनदेन शनिवार को बंद रहते हैं, तो बैंक कर्मचारियों को इस अधिकार से वंचित रखना भेदभावपूर्ण है। यदि सरकार ने जल्द ही आईबीए के प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी, तो यह आंदोलन और उग्र होगा। आम जनता पर असर आज की इस हड़ताल के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाएं पूरी तरह प्रभावित रहीं। जमा-निकासी, ऋण संबंधी कार्य और अन्य वित्तीय लेनदेन ठप रहे। हालांकि, डिजिटल बैंकिंग सेवाएं जारी रहीं, लेकिन शाखा स्तर पर होने वाले कार्यों के लिए ग्राहकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।


