इंदौर में यूजीसी की नई व्यवस्था का विरोध:DAVV में करणी सेना का प्रदर्शन, सरकार की सद्बुद्धि के लिए हनुमान चालीसा पढ़ी, 1 को भारत बंद

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा लागू की जा रही नई नीति के विरोध में मंगलवार को देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (DAVV) इंदौर परिसर में छात्रों और सामाजिक संगठनों की ओर से शांतिपूर्ण एवं संगठित विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। प्रदर्शन आरएनटी मार्ग स्थित विश्वविद्यालय परिसर में किया गया। करणी सेना के प्रदेश अध्यक्ष अनुराग प्रतापसिंह ने बताया कि मंगलवार को करीब तीन सौ छात्रों ने कुलपति को ज्ञापन दिया। सरकार को सद्बुद्धि मिले इसलिए हमने विवि परिसर में हनुमान चालीसा का पाठ भी किया। शिक्षा में समानता का अधिकार के लिए हम लड़ाई लड़ रहे हैं। अनुराग ने बताया कि यूजीसी के इस प्रस्ताव के खिलाफ हम एक फरवरी को भारत बंद करेंगे। और 2 फरवरी को मप्र के सभी सांसदों को ज्ञापन सौंपेंगे। उनसे पूछेंगे कि वे यूजीसी के इस प्रस्ताव का विरोध करते हैं या समर्थन। यदि वे विरोध करते हैं तो हम उनसे लिखित में आश्वासन लेंगे कि वे केंद्र सरकार के समक्ष हमारी बात रखें। इस अवसर पर श्री राजपूत करणी सेना जिला इकाई से छात्र अध्यक्ष शुभम सिंह राजपूत, किशोर सिंह सिकरवार, राहुल सिंह जादौन, रविनेश सिंह राठौड़, अजीत सिंह ठाकुर, डॉ संतोष सिंह सहित तीन सौ से ज्यादा छात्र मौजूद रहे। यूजीसी के प्रस्ताव का समर्थन करने वाले सांसदों को चूड़ियां भेंट करेंगे और उनकी अर्थी भी निकालेंगे, घर-दफ्तर का घेराव भी करेंगे। यूएन में भारत के दलितों की स्थिति दूसरे देशों से बेहतर बताने वाली इंदौर की स्कॉलर डॉ. रोहिणी घावरी ने सोशल मीडिया पर अपना पक्ष स्पष्ट किया है। उन्होंने एक्स पर लिखा कि UGC Promotion of Equity Regulations 2026 का मकसद सराहनीय है। कैंपस पर SC/ST/OBC छात्रों को जातिगत भेदभाव से बचाना, ये संवैधानिक समानता की दिशा में जरूरी कदम है, लेकिन सच्ची इक्विटी सबके लिए होनी चाहिए !! ये मांग/सवाल की जा रही दावा-भेदभाव पूरी तरह खत्म हो जाएगा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने 13 जनवरी को ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस’ नाम से एक नोटिफिकेशन जारी किया। जिसे 15 जनवरी से देशभर के यूनिवर्सिटी-कॉलेज में लागू कर दिया गया। सरकार का दावा है कि इससे शैक्षणिक संस्थानों में जाति, धर्म, लिंग, नस्ल, जन्म स्थान, विकलांगता के आधार पर होने वाला भेदभाव पूरी तरह खत्म हो जाएगा। UGC के नए नियम के मुताबिक, हर यूनिवर्सिटी-कॉलेज को EOC बनाना जरूरी है। भेदभाव की परिभाषा सवर्ण छात्रों के खिलाफ नए नियमों में भेदभाव की परिभाषा में SC/ST/OBC महिलाओं, विकलांगों को शामिल किया गया है, जबकि सवर्ण या जनरल कैटेगरी के छात्रों को भेदभाव से पीड़ित लोगों के दायरे में शामिल नहीं किया गया है। इससे सवर्ण छात्र ‘स्वाभाविक अपराधी’ की तरह देखे जाएंगे। नियमों के मुताबिक, वे भेदभाव के आरोपी तो हो सकते हैं, लेकिन पीड़ित नहीं हो सकते। जातीय भेदभाव की शिकायत पर कार्रवाई के प्रावधान

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