पंजाब में आंदोलन पर बैठे किसान बजट से खफा:बोले- एमएसपी गारंटी कानून नहीं; 14 फरवरी को केंद्र सरकार से होगी वार्ता

दाता सिंह वाला-खनौरी बॉर्डर पर किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल का अनशन 67वें दिन भी जारी है। वहीं, शंभू बॉर्डर पर किसान नेता सरवन सिंह पंधेर के नेतृत्व में किसान डटे हुए हैं। किसानों ने उम्मीद जताई थी कि शुक्रवार से शुरू हुए बजट सत्र में केंद्र सरकार किसानों को एमएसपी गारंटी कानून का तोहफा दे देगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। केंद्र सरकार ने 14 फरवरी को बातचीत के लिए आमंत्रित किया है, जबकि 13 फरवरी को आंदोलन के एक साल पूरे होने पर किसान बड़ा जमावड़ा करने जा रहे हैं। सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि किसान आंदोलन-2 को एक साल पूरा हो जाएगा। इसे देखते हुए शंभू बॉर्डर पर बड़ी संख्या में किसान जुटेंगे। लेकिन इससे पहले केंद्र को बजट को किसानों पर केंद्रित रखना चाहिए। सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि सरकार को लगता है कि उनकी नीति सही है। अगर ऐसा है तो रुपया लगातार क्यों गिर रहा है और अपने सबसे निचले स्तर पर क्यों है। वादों को बजट में करने की रखी थी मांग किसान और मजदूर अपनी जायज मांगों को लेकर शंभू, खनौरी और रत्नपुरा बॉर्डर पर आंदोलनरत हैं। किसानों ने मांग रखी थी कि केंद्र सरकार ने जिन मांगों को लागू करने का लिखित वादा किया था और जिसे मोदी सरकार ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में भी शामिल किया था, उसे बजट में जोड़ा जाए। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। एमएसपी खरीद गारंटी कानून लागू करे केंद्र किसान नेताओं ने कहा कि यह आंदोलन एमएसपी खरीद गारंटी कानून, डॉ. स्वामीनाथन आयोग के सी2+50 फार्मूले के अनुसार फसलों के दाम, किसानों और मजदूरों की पूरी कर्जमाफी जैसी मांगों को लागू करवाने के लिए चल रहा है। किसानों ने बजट को औपचारिकता बताया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को चालू बजट सत्र में कृषि क्षेत्र की इन मांगों के लिए बजट में कोटा आरक्षित करना चाहिए था। सरकार इस बजट में किसानों और मजदूरों के कल्याण के लिए कोटा निर्धारित नहीं किया है, इसलिए यह बजट भी किसानों के लिए महज औपचारिकता ही साबित हुआ। मृतक किसान के लिए मुआवजे की मांग सरवन सिंह पंधेर ने बताया कि एक और किसान, प्रगट सिंह पुत्र त्रिलोक सिंह, गांव कक्कड़ तहसील लोपोके, जिला अमृतसर, शंभू मोर्चे पर अपनी जायज मांगों के लिए लड़ते हुए शहीद हो गए। किसान संगठन मांग करते हैं कि परिवार को 5 लाख रुपए मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को योग्यता के आधार पर नौकरी दी जाए। डल्लेवाल का शरीर अभी भी कमजोर साथ ही 11 फरवरी से 13 फरवरी तक होने वाली तीन किसान महापंचायतों को सफल बनाने के लिए किसान नेता पूरी रणनीति में जुटे हुए हैं। किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल का अनशन आज (शनिवार) 67वें दिन में प्रवेश कर गया है। हालांकि अनशन के कारण डल्लेवाल का शरीर कमजोर हो गया है। इसके कारण उन्हें बुखार आ गया है। तीन प्वाइंट से समझे किसानों की अगली स्ट्रेटजी 1. 14 फरवरी को केंद्र सरकार ने चंडीगढ़ में किसानों के साथ बैठक करने का फैसला किया है। इससे पहले किसान बॉर्डर पर बड़ी संख्या में जुटकर यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि आंदोलन को भले ही एक साल हो गया है, लेकिन उनके हौसले अभी भी बुलंद हैं। साथ ही वे लंबी लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हैं। 2. दूसरी बात यह कि किसान बिल्कुल भी आक्रामकता नहीं दिखा रहे हैं। वे बिल्कुल शांतिपूर्ण तरीके से मोर्चे पर डटे हुए हैं। वहीं, जिस तरह से डल्लेवाल का अनशन चल रहा है। उसने सरकार को सोचने पर मजबूर कर दिया है। डल्लेवाल ने खुद लोगों को संदेश भेजकर इस आंदोलन में शामिल होने को कहा है। 3. किसानों का फोकस इस आंदोलन को पंजाब से बाहर ले जाने पर है। ऐसे में अब हरियाणा और राजस्थान पर फोकस बढ़ा दिया गया है। इसी प्लानिंग के तहत पहले हरियाणा से किसानों के जत्थे लगातार खनौरी पहुंच रहे थे। वहीं, अब महापंचायत और ट्रैक्टर मार्च इसका हिस्सा हैं। क्योंकि जैसे ही दूसरे राज्यों के किसान इसमें शामिल हो जाएंगे, उसके बाद सरकार पर भी दबाव बनेगा।

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