एक बच्चा है, जो अपना नाम सुनील बता रहा है। उम्र पांच साल है और अपने माता-पिता से बिछड़ गया है। इसके माता-पिता या अन्य परिजन, यदि मेरी आवाज सुन रहे हों, तो मेला के रेडियो रूम में आने की कृपा करें। यह आवाज है ग्वालियर के एलएस अजनेरिया की। वे बीते 53 वर्षों से रेडियो रूम में बैठकर अपनी आवाज के जरिए हजारों बिछड़े लोगों को उनके परिवारों से मिलवा चुके हैं और अनगिनत चेहरों पर खुशियां लौटाई हैं। अजनेरिया उस दौर से रेडियो से जुड़े हैं, जब टेलीविजन का चलन भी शुरू नहीं हुआ था। उस समय मनोरंजन और सूचना का रेडियो ही एकमात्र माध्यम हुआ करता था। अब वक्त बदल चुका है और दुनिया मोबाइल, गैजेट्स व इंटरनेट के युग में पहुंच गई है। इसके बावजूद ग्वालियर में लगने वाले व्यापार मेले में आज भी अजनेरिया की आवाज गूंजती है और लोगों की मदद करती है। उनकी आवाज अब ग्वालियर मेले की पहचान बन चुकी है। खोए, बिछड़ों को अपनों से मिलाती है यह आवाज
ग्वालियर मेला में घूमने आने वाले सैलानी कई बार संकट में पड़ जाते हैं। मेले में आए बच्चे या बुजुर्ग बिछड़ जाते हैं, तो कभी कीमती सामान गुम हो जाता है। ऐसी स्थिति में सबसे पहले परेशान व्यक्ति पुलिस या मेला के रेडियो रूम पहुंचता है। यहां रेडियो रूम में बैठे एलएस अजनेरिया माइक पर एनाउंसमेंट करते हैं। उनकी आवाज मेला परिसर में लगे साउंड सिस्टम पर गूंजती है और खोया बच्चा, व्यक्ति या सामान मिल जाता है। मैं रेडियो पर बोलता हूं, पर जॉकी नहीं हूं लोग रोते हुए आते हैं और हंसते हुए जाते हैं
अजनेरिया ने बताया कि रोजाना 25 से 30 परिवार तो आते ही है लेकिन कभी भीड़ ज्यादा हो तो यह आंकड़ा 50 भी पार कर जाता है। लोग रोते हुए आते हैं और हंसते हुए जाते हैं। किसी के बिछड़ने का गम भी होता है और उसके मिलने की खुशी भी होती है जो यहां आने वाले लोगों के चेहरे पर साफ दिखाई देती है। उन्होंने बताया कि यह दो माह जो मेरा लगता है तो इसमें इसलिए आते हैं ताकि लोगों से मिल सके लोगों से मिलने के बाद ही उनकी साल भर की थकान दूर हो जाती है। उन्होंने बताया कि मेले के अलावा भी वह चुनाव प्रचार वगैरह के लिए अपनी आवाज देते हैं उनकी आवाज को लेकर लोग काफी उत्साही रहते हैं। अच्छा लगता है जब लोग देते हैं धन्यवाद
अजनेरिया ने बताया कि व्यापार मेले में मुझे हर व्यापारी जानता है। मेला जैसे-जैसे अपने रंग पर आता है, व्यापारी आते हैं और उनसे मिलते हैं लोग जब बिछड़ते हैं तो यहां रेडियो रूम पर रोते हुए आते हैं लेकिन जब लोग अपनों से मिल लेते हैं और जब मैं अनाउंसमेंट करता हूं मेले में सभी अलर्ट मोड पर आ जाते हैं। साथी कोई गलत घटना ना हो सके अच्छा लगता है बिछड़े हुए परिवार आपस में मिलते हैं ऐसे में कई बार मैं रेडियो रूम में अंदर होता हूं तो लोग मुझे नहीं मिल पाए लेकिन जब कुछ लोग जिद भी करते हैं तो आकर उनसे मुलाकात करता हूं उनके आंखों से निकलने वाले आंसू और उनके जज्बात जिस तरह से मुझे धन्यवाद देते हैं वह काफी अच्छा लगता है। 1905 में हुई थी स्थापना, पहुंचते हैं हजारों लोग ग्वालियर के ऐतिहासिक मेला मैदान में 104 एकड़ भूमि पर लगने वाला श्रीमंत माधवराव सिंधिया ग्वालियर व्यापार मेला 120 वर्ष से भी अधिक पुराना है। यह मेला न केवल मध्यप्रदेश, बल्कि देश के प्रमुख व्यापारिक मेलों में शुमार है। इसकी शुरुआत वर्ष 1905 में तत्कालीन सिंधिया घराने के महाराज माधवराव सिंधिया ने की थी। इस मेले का आनंद लेने के लिए ग्वालियर ही नहीं, बल्कि देश के कई राज्यों और शहरों से हर साल हजारों सैलानी यहां पहुंचते हैं। वे अपने परिवारों के साथ मेले की विविध गतिविधियों और आयोजनों का आनंद लेते हैं। अपनी भव्यता और विशालता के कारण ग्वालियर व्यापार मेला आज एशिया के सबसे बड़े और प्राचीन मेलों में गिना जाता है। यह खबर भी पढ़ें… ग्वालियर व्यापार मेला- 543 वाहन बिके, इनमें 412 कारें यदि आप नई गाड़ी खरीदने की योजना बना रहे हैं तो ग्वालियर व्यापार मेला इस समय सबसे बेहतर विकल्प बनकर उभरा है। मेले में वाहनों पर रोड टैक्स में 50 फीसदी की छूट दी जा रही है, वहीं डीलर्स की ओर से भी आकर्षक ऑफर मिल रहे हैं। इस बार GST कम होने का लाभ भी सीधे ग्राहकों को मिल रहा है। पूरी खबर यहां पढ़ें…


