करौली में विराट हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक एकता और सामाजिक सहभागिता का प्रदर्शन हुआ। जिला मुख्यालय पर आयोजित इस सम्मेलन में बड़ी संख्या में शहरवासियों और महिलाओं ने भाग लिया। सम्मेलन से पहले एक कलश यात्रा निकाली गई, जिसने शहर में धार्मिक माहौल बनाया।
कलश यात्रा होली खिड़किया स्थित प्राचीन सीताराम मंदिर से शुरू हुई। यह शहर के प्रमुख मार्गों, जैसे गणेश गेट और चटीकना बाजार से होते हुए मेला गेट बाहर स्थित तीन दरवाजा क्षेत्र में समाप्त हुई। यात्रा में 500 से अधिक महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में सिर पर कलश धारण कर हिस्सा लिया। ढोल-नगाड़ों और भक्ति गीतों के साथ निकली इस यात्रा का शहरवासियों ने जगह-जगह पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। सम्मेलन के समापन स्थल पर वक्ताओं और विशिष्ट अतिथियों ने अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने हिंदू संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक एकता के महत्व पर जोर दिया। वक्ताओं ने कहा कि ऐसे आयोजन आपसी भाईचारे, धार्मिक चेतना और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करते हैं। कलश यात्रा के बाद महिलाओं ने सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ किया और पारंपरिक होली गायन प्रस्तुत किया। सम्मेलन में राष्ट्रीय अनहद महायोग पीठ के संस्थापक शिवयोगी संत श्री रुद्रनाथ महाकाल विशेष रूप से मौजूद रहे। उन्होंने अपने संबोधन में सनातन संस्कृति के महत्व पर प्रकाश डाला। आयोजन की सुचारु व्यवस्था और शांति बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन द्वारा अतिरिक्त बल तैनात किया गया था। प्रशासन की सतर्कता के कारण कार्यक्रम शांतिपूर्ण और सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।


