मध्य प्रदेश के 25 विभागों के लिए केंद्र सरकार ने एक अप्रैल से 20 जनवरी के बीच में एक रुपया नहीं दिया है। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के किसान कल्याण, कृषि विकास और ग्रामीण विकास विभाग से ही 7774.54 करोड़ रुपए नहीं मिल सके हैं। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ ने इस स्थिति पर केंद्र की भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। नाथ ने एक्स पर लिखा है कि मध्य प्रदेश की जनता भाजपा की डबल इंजन सरकार से डबल मुसीबत में फंस गई है। एमपी में ये दोनों ही विभाग एदल सिंह कंसाना और प्रहलाद पटेल के पास हैं। दूसरी ओर, जल जीवन मिशन के लिए केंद्र सरकार ने पीएचई को मिलने वाले 8561 करोड़ में से एक रुपए भी नहीं दिया है। इसी तरह, डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल, नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह, स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह के अलावा गोविंद सिंह राजपूत, निर्मला भूरिया भी दिल्ली से पैसा नहीं ला सके। केंद्र सरकार से एमपी को चालू वित्त वर्ष में 44,355.83 करोड़ रुपए मिलने थे। जब अब तक 10 माह बीतने पर भी सिर्फ 9753.05 करोड़ रुपए ही मिल सके हैं। इस तरह सिर्फ 22 फीसदी फंड ही दिल्ली से आया है। जबकि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी दिल्ली में केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात करने को लेकर मंत्रियों को बार-बार निर्देशित कर चुके हैं। जल जीवन मिशन को 10 माह में एक भी रुपया नहीं
पीएचई विभाग को जल जीवन मिशन के लिए 8561.22 करोड़ दिए जाने हैं लेकिन दस माह में एक रुपए भी नहीं दिए गए। पीएचई विभाग की मंत्री संपतिया उइके इस काम के लिए फंड ला पाने में नाकाम रही हैं उलटे उन पर कमीशनखोरी के आरोप में दिल्ली में हुई शिकायत के बाद जांच के आदेश विभाग के ईएनसी कर चुके हैं। इस विभाग में हुए घोटालों पर सीएस अनुराग जैन काम करने वाली एजेंसियों को ब्लैकलिस्ट करने और इंजीनियरों को नोटिस थमाने की कार्यवाही कर चुके हैं। एदल सिंह कंसाना के विभाग को भी फंड नहीं
किसान कल्याण और कृषि विकास विभाग को परम्परागत कृषि विकास योजना में 29.95 करोड़ और राष्ट्रीय कृषि विकास योजना में 165 करोड़ मिलना है लेकिन एक रुपए भी नहीं मिले हैं। इसी तरह अन्य योजनाओं में भी राशि नहीं दी गई है। प्रदेश के किसान कल्याण मंत्री एदल सिंह कंसाना 996.34 करोड़ स्वीकृत होने के बाद भी भोपाल नहीं ला सके हैं। इसी तरह, नवकरणीय ऊर्जा विभाग को प्रधानमंत्री जनमन कार्यक्रम के अंतर्गत विद्युतीकरण के लिए 8.99 करोड़ मिलने थे, जो नहीं मिले हैं। आयुष विभाग को राष्ट्रीय आयुष मिशन के अंतर्गत 93.42 करोड़ मिलने हैं, इसका भी इंतजार है। उद्यानिकी और खाद्य प्रसंस्करण विभाग को राष्ट्रीय उद्यानिकी मिशन के लिए 63 करोड़ और पीएम सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन के लिए 83.74 करोड़ मिलना है जो अभी तक नहीं मिला है। केन बेतवा के लिए नहीं मिला एक रुपया
जल संसाधन विभाग को केन बेतवा लिंक राष्ट्रीय परियोजना के लिए 630 करोड़ रुपए देने को कहा गया है लेकिन एक धेला नहीं मिला है। इसी तरह बांधों से संबंधित काम के लिए 290 करोड़ मिलने हैं लेकिन राशि नहीं दी गई है। ऊर्जा विभाग को आरडीएसएस (रीवैम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम) में 1736.33 करोड़ मिलने हैं पर एक रुपया भी नहीं दिया है। न मेडिकल कॉलेज, न उपस्वास्थ्य केंद्रों के लिए फंड
डिप्टी सीएम और लोक स्वास्थ्य व चिकित्सा शिक्षा मंत्री राजेंद्र शुक्ल केंद्र से मिलने वाली राशि लाने में नाकाम रहे हैं। लोक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के अंतर्गत उप स्वास्थ्य केंद्रों के लिए 724 करोड़ रुपए मिलने थे। इसी तरह सिकल सेल एनीमिया के लिए 23.28 करोड़, नए नर्सिंग कालेज निर्माण के लिए 37.50 करोड़, जिला स्तरीय स्वास्थ्य अमले के लिए 97.24 करोड़, एमबीबीएस सीटों में वृद्धि के लिए 90 करोड़, पीएम जन आरोग्य योजना (आयुष्मान भारत) के लिए 765.96 करोड़ देने का प्रावधान था लेकिन इन योजनाओं में अब तक एक रुपए भी नहीं मिले हैं। मेडिकल कॉलेजों में पीजी पाठ्यक्रम के लिए 150 करोड़ और नए मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए 250 करोड़ रुपए देने के लिए कहा है लेकिन एक रुपए भी नहीं दिए गए। इसी तरह राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में 2652.94 करोड़ रुपए के बदले 1035.58 करोड़ रुपए मिले हैं। प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर मिशन के लिए 285.80 करोड़ मिलने थे जिसके बदले 521.87 करोड़ मिल गए हैं। पीएम आवास और पीएम ई-बस के लिए पैसा नहीं
नगरीय विकास और आवास विभाग के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भी अपने विभाग के लिए दिल्ली से पैसा लाने में कामयाब नहीं हुए। विभाग की हालत सबसे खराब है। इस विभाग को उज्जैन स्मार्ट सिटी के लिए भारत सरकार से सहायता के लिए 5 करोड़ रुपए मिले हैं। इसके अलावा जो भी प्रावधान किए गए उसमें एक भी रुपया नहीं मिला है। विभाग की ओर से पीएम आवास योजना अर्बन बीएलसी के लिए 600 करोड़, पीएम आवास योजना अर्बन एएचपी के लिए 150 करोड़, हाउसिंग फॉर ऑल के लिए 250.86 करोड़, अटल मिशन फॉर रिजुवेनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन 2.0 के लिए 471 करोड़ देने के लिए कहा गया था लेकिन एक रुपए भी नहीं मिले हैं। पीएम ई-बस सेवा के लिए 65.99 करोड़ रुपए मिलना है जो अब तक नहीं मिला है। शहरी स्वच्छ मिशन 2.0 आईईसी के लिए 48 करोड़ में से एक भी रुपए नहीं मिले हैं। पीएमश्री, समग्र शिक्षा के लिए भी नहीं मिला फंड
स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह भी स्कूल शिक्षा विभाग के लिए मिलने वाले भारी भरकम फंड को दिल्ली से भोपाल लाने में फिसड्डी साबित हुए हैं। विभाग को पीएमश्री विद्यालयों के लिए मिलने वाले 258 करोड़ में से एक भी रुपए नहीं मिले हैं। इसके अलावा समग्र शिक्षा अभियान के लिए 3321.99 करोड़ में से 1460.75 करोड़ ही मिले हैं। साथ ही स्टार्स परियोजना में 100.80 करोड़ में से एक भी रुपए नहीं मिले हैं। उधर, विधि और विधायी कार्य विभाग को पाॅक्सो एक्ट के अंतर्गत फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना के लिए 101.47 करोड़ मिलने थे, जिसमें से 15.28 करोड़ ही मिल सके हैं। न पोषण आहार का पैसा आया न आंगनबाड़ी के लिए
महिला और बाल विकास विभाग को पीएम मातृ वंदना योजना में 211.20 करोड़ मिलना है पर मिले सिर्फ 55.26 करोड़ हैं। न्यूनतम आवश्यकता कार्यक्रम विशेष पोषण आहार योजना में 583 करोड़ देने के लिए कहा गया है लेकिन एक रुपए भी नहीं दिए गए। आंगनबाड़ी सेवाओं के अंतर्गत सक्षम आंगनबाड़ी और पोषण 2.0 के लिए 3263.59 करोड़ देने को कहा गया है लेकिन अब तक सिर्फ 759.29 करोड़ ही मिले हैं। दूसरी ओर पोषण अभियान में सक्षम आंगनबाड़ी और पोषण 2.0 के लिए 133.86 करोड़ में से एक भी रुपए नहीं दिए गए हैं। इस विभाग की एमपी सरकार की मंत्री निर्मला भूरिया इसके लिए केंद्र में प्रयास करने भी नहीं गई हैं। शिवराज-प्रहलाद जैसे दिग्गज, फिर भी खाली हाथ
केंद्र में ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रदेश में प्रहलाद पटेल हैं। इतने दिग्गज मंत्रियों के बाद भी एमपी को ग्रामीण विकास से घोषित फंड आधा भी नहीं मिल सका है। आंकड़े बताते हैं कि ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत पीएम जनमन योजना (आवास) के लिए 660 करोड़ और पीएम जनमन योजना (सड़क) के लिए 633.60 करोड़ देना तय किया है। इसी तरह पीएम आवास योजना के लिए 2640 करोड़, निर्मल भारत अभियान के लिए 356.41 करोड़, पीएम कृषि सिंचाई योजना (वाटरशेड विकास) के लिए 164.88 करोड़ रुपए एमपी को मिलना है लेकिन इसमें से सिर्फ पीएम आवास योजना के लिए 1987.16 करोड़ रुपए मिले हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के लिए 480 करोड़ में से सिर्फ 80.34 करोड़ दिए हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना में 3160 करोड़ के बदले सिर्फ 533.21 करोड़ और पीएम पोषण शक्ति निर्माण के लिए 576 करोड़ में 348.57 करोड़ दिए हैं। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के लिए 810 करोड़ मिलना है लेकिन एक रुपए नहीं मिले हैं। मध्यान्ह भोजन सामग्री परिवहन के लिए 55.14 करोड़ और दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना के लिए 90 करोड़ रुपए मिलने हैं पर एक रुपए नहीं भेजे गए हैं। दूसरी ओर पंचायत विभाग को ग्राम स्वराज अभियान के लिए 142.95 करोड़ दिए जाने थे जिसके बदले एक रुपया नहीं मिला है। विवादों में उलझे विजय शाह की परफार्मेंस भी अच्छी नहीं
अपने विवादास्पद बयानों को लेकर विवाद में रहने वाले प्रदेश के जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह भी केंद्र से अपेक्षित फंड नहीं ला पाए हैं। जनजातीय कार्य विभाग को धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के लिए 200 करोड़ मिलना है। इसी तरह माडा पैकेट में क्लस्टर में स्थानीय विकास के लिए 259 करोड़, पीएम जनमन बहुउद्देशीय केंद्र निर्माण योजना के लिए 49 करोड़, अनुसूचित जनजाति उपयोजना क्षेत्र में विकास कार्यों के लिए 150 करोड़, विशेष पिछड़ी जनजातियों के विकास के लिए 100 करोड़ मिलने थे जिसमें एक रुपए भी नहीं मिले हैं। पेंशन के लिए फंड नहीं मंत्री नारायण के पास
सामाजिक न्याय और निशक्तजन विभाग के मंत्री नारायण सिंह कुशवाह अपने विभाग के विधवा और वृद्धावस्था पेंशन की मोटी रकम दिल्ली से भोपाल नहीं ला पाए हैं। इसका असर पेंशन वितरण में पड़ रहा है। केंद्र की ओर से सामाजिक न्याय और निशक्तजन विभाग को इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन के लिए 400 करोड़ दिए जाने हैं जिसमें से 157.25 करोड़ मिले हैं। इसी तरह इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन के लिए 1152.19 करोड़ मिलना था जिसमें से 372.88 करोड़ ही मिले हैं। दूसरी ओर, खाद्य और नागरिक आपूर्ति विभाग के मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के विभाग की भी हालत ठीक नहीं है। मंत्री राजपूत के विभाग को लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत परिवहन कमीशन खर्च की प्रतिपूर्ति के लिए 312.50 करोड़ दिए जाने के लिए कहा है पर एक रुपए भी नहीं मिल सके हैं। डबल इंजन सरकार से डबल मुसीबत में फंसी जनता मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ ने केंद्र की भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। नाथ ने एक्स पर लिखा है कि मध्य प्रदेश की जनता भाजपा की डबल इंजन सरकार से डबल मुसीबत में फंस गई है। एक तरफ प्रदेश के ऊपर कर्ज का बोझ बढ़ता चला जा रहा है तो दूसरी तरफ केंद्र सरकार राज्य को उसके हिस्से का पैसा नहीं दे रही है। हकीकत यह है कि मध्य प्रदेश के 25 विभागों के लिए केंद्र सरकार ने एक अप्रैल 2025 से 20 जनवरी 2026 के बीच में एक रुपया नहीं दिया है। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के किसान कल्याण, कृषि विकास और ग्रामीण विकास विभाग से ही 7774.54 करोड़ रुपए नहीं मिल सके हैं। नाथ ने कहा कि यही स्थिति बनी रही तो पहले से ही वित्तीय संकट से गुजर रहा मध्य प्रदेश भारी आर्थिक संकट में फंस जाएगा। मैं मांग करता हूं कि केंद्र सरकार शीघ्र अतिशीघ्र प्रदेश को आवंटित राशि निर्गत करे।


