जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में नोबल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अभिजीत बनर्जी ने अर्थव्यवस्था को लेकर महत्वपूर्ण विचार साझा किए। रविवार को अपनी नई पुस्तक ‘छौंक’ की चर्चा के दौरान उन्होंने खाने के माध्यम से अर्थशास्त्र को समझाने का अनूठा प्रयास किया। बनर्जी ने कहा कि अर्थशास्त्र हमारे दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा है। मोदी सरकार के हालिया बजट पर टिप्पणी करते हुए बनर्जी ने कहा कि केवल कर नीतियों में बदलाव से आर्थिक विकास संभव नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि रोजगार सृजन आर्थिक विकास की कुंजी है। उनके अनुसार, टैक्स सरकार के लिए आवश्यक है, लेकिन इससे भी महत्वपूर्ण है रोजगार के नए अवसर पैदा करना। बनर्जी ने बताया- जितने अधिक लोग कर के दायरे में आएंगे, उतना ही देश का विकास होगा। उन्होंने अर्थव्यवस्था में मांग वृद्धि की महत्ता पर जोर देते हुए कहा कि वर्तमान में आय वृद्धि धनी वर्ग पर अधिक निर्भर है। उनका मानना है कि टैक्सेशन और अर्थव्यवस्था का गहरा संबंध है, और सरकार को आम लोगों को भी कर के दायरे में लाने पर ध्यान देना चाहिए। यह न केवल राजस्व बढ़ाने में मदद करेगा, बल्कि समावेशी विकास को भी बढ़ावा देगा।


