पैरा शटलर पलक बोली-शारीरिक योग्यता से ज्यादा मानसिक मजबूती जरूरी:भोपाल लिटरेचर फेस्ट में कहा- डिसएबल्ड प्लेयर्स को मुश्किल से मिलता है सपोर्ट

मेरे करियर के बेहतरीन दौर में मुझे बाएं टखने पर ट्यूमर की शिकायत हुई। इसके बावजूद अपनी मजबूत मानसिक स्थिति के चलते मैंने वापसी की। ये कहना है, वर्ल्ड चैंपियनशिप 2024 में कांस्य और टोक्यो पैरालंपिक में क्वालीफाई करने वाली पैरा-शटलर पलक कोहली का। वे भोपाल में चल रहे लिटरेचर फेस्टिवल में बोल रही थीं। इस दौरान उन्होंने दैनिक भास्कर से बातचीत में पैरा खेल और खिलाड़ियों के बारे में बताया पढ़िए पूरी बातचीत… सवाल- आपने ट्यूमर के चलते सर्जरी करवाई थी, इसके बाद वापसी कैसी रही? जवाब – उस समय मुझे डर था कि यह मेरे सपनों और भविष्य को बदल सकता है। हालांकि इन सबके बीच मुझे आपातकालीन स्थिति में सर्जरी करवानी पड़ी। वापसी करना बेहद कठिन रहा। लेकिन मैंने खुद को चुनौती दी और मुझे मेरी मानसिक मजबूती के चलते सफलता भी मिली। सवाल- किन चीजों से आपको मानसिक मजबूती मिलती है? जवाब- मैं लखनऊ की राष्ट्रीय दिव्यांग अकादमी में ट्रेनिंग लेती हूं। वहां सभी लोग एक जैसे हैं, जिनके बीच आपको अलग नहीं लगता। समय-समय पर साइकोलॉजिकल सेशन भी होते हैं। इसके चलते सकारात्मक बने रहने में काफी मदद मिलती है। सवाल- भारत में खेल के क्षेत्र में समय पर कई लोगों को सहयोग नहीं मिलता है, इस पर आपकी क्या राय है? जवाब – हां ये सच है कि खिलाड़ियों को समय पर सहयोग की जरूरत होती है। हालांकि मेरा मानना है कि एबल खिलाड़ियों के मुकाबले पैरा खिलाड़ियों को सहयोग मिलने में ज्यादा परेशानी होती है। क्योंकि एक पैरा खिलाड़ी को रैंकिंग के लिए कम से कम 15 टूर्नामेंट खेलने होते हैं, इसमें काफी खर्च होता है। सवाल- बैडमिंटन कोच गोपीचंद ने कहा था कि भारतीय कोचेस को विदेशी कोच के मुकाबले कम पैसे मिलते हैं, इस पर आपका क्या कहना है? जवाब- भारत में अब खेलों को लेकर सकारात्मक बदलाव आ रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी जी के एथलीटों से बातचीत के बाद खेलों और उससे जुड़ी चीजों को लेकर नजरिया बदल रहा है। सवाल- एबल खिलाड़ियों के मुकाबले लगातार मैचों के बाद कितनी मुश्किल होता है रिकवरी? जवाब- एथलीट्स के जीवन में ट्रेनिंग के साथ-साथ रिकवरी भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। जब आप पूरी तरह से स्वस्थ हो जाते हैं, तो कठिन ट्रेनिंग करना संभव हो जाता है। इसके लिए उचित आहार, सप्लीमेंट्स और प्रोटीन आवश्यक भूमिका निभाते हैं। अगर मैं अपने रूटीन की बात करूं तो सुबह 6:30 बजे से ट्रेनिंग सेशन शुरू होते हैं। इसके बाद 8:30 से 9 बजे तक कोर्ट सेशन होता है, फिर नाश्ता करने के बाद शारीरिक व्यायाम किया जाता है। लगभग 11:30 बजे तक यह सब समाप्त हो जाता है, जिसके बाद लंबा आराम और दोपहर का भोजन होता है। फिर शाम 5 बजे हम जिम जाते हैं, फिर कुछ गतिविधियां करने के बाद रात 7 से 8:30 बजे तक स्किल स्ट्रोक के लिए कोर्ट में वापस आते हैं। सवाल- पैरा ओलिंपिक में खिलाड़ियों का चयन कैसे होता है? जवाब- पैरा ओलिंपिक में चयन के लिए खिलाड़ियों को विश्व रैंकिंग में शीर्ष 5 में रहना अनिवार्य होता है। इन्हीं खिलाड़ियों का बाद में चयन होता है। सवाल- आप आगे भारत में पैरा खेलों का क्या भविष्य देखती हैं? जवाब- अब देश में पैरा-खेलों को बढ़ावा देने के लिए सक्रिय प्रमोशन किया जा रहा है। जागरूकता बढ़ी है। वहीं, पैरा-खिलाड़ियों को ज्यादा अवसर भी मिल रहे हैं।

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