4 वर्ग किमी जमीन सेंचुरी से बाहर:पचमढी में पुराने भवनों की जगह अब जी+1 बन सकेंगे

राज्य सरकार ने पचमढ़ी शहर की करीब 4 वर्ग किमी जमीन को वाइल्ड लाइफ सेंचुरी से बाहर करने की मंजूरी दे दी है। अब इस जमीन पर बने पुराने और जर्जर घर-होटल को दोबारा बनाया जा सकेगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में पचमढ़ी के विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण में आने वाली 395.939 हेक्टेयर नजूल भूमि को राजस्व नजूल भूमि के रूप में दोबारा अधिसूचित किया गया। यह वही जमीन है, जो पहले गलती से वाइल्ड लाइफ सेंचुरी में शामिल हो गई थी। ईको-सेंसिटिव जोन 100 मीटर मानेंगे या 1 किमी, सारा असर इसी व्याख्या पर निर्भर अब क्या-क्या​ निर्माण हो सकेंगे?
पुराने और जर्जर घर, होटल और रिसोर्ट तोड़कर उसी जगह जी+1 (भूतल+ एक मंजिल) तक नया निर्माण किया जा सकेगा। नए होटल नहीं बनेंगे, सिर्फ पुराने होटल-रिसोर्ट का नवीनीकरण होगा। होम-स्टे और फॉर्म-स्टे तय नियमों के तहत विकसित किए जा सकेंगे। सड़क, सीवरेज और पेयजल जैसी सुविधाओं पर काम होगा। सरकारी व पर्यटन से जुड़ी योजनाएं पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल पर लाएंगे। अंधाधुंध निर्माण की आशंका बढ़ेगी?
नहीं। ईको-सेंसिटिव जोन और पर्यावरण नियम लागू रहेंगे। असर इस बात पर निर्भर करेगा कि ईको-सेंसिटिव जोन की सीमा 100 मीटर मानी जाती है या 1 किमी। 2017 के नोटिफिकेशन के मुताबिक ईको-सेंसिटिव जोन सिर्फ 100 मीटर तक है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश में 1 किमी तक ईको-सेंसिटिव जोन माना गया है। अगर 100 मीटर लागू होता है तो?
– पुराने घरों, होटल व इमारतों की मरम्मत व पुनर्निर्माण ज्यादा आसानी से हो सकेगा। 1 किमी की सीमा लागू रही तो?
सेंचुरी के आसपास का बड़ा इलाका सख्त नियमों में रहेगा। वन विभाग का क्या कहना है?
प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वाइल्ड लाइफ) शुभरंजन सेन बोले- पचमढ़ी सेंचुरी की सीमा से 1 किमी का क्षेत्र ईको-सेंसिटिव जोन में है। जिस जमीन को सेंचुरी से बाहर किया है, वह नजूल भूमि थी। पूर्व में गलती से सेंचुरी में शामिल हो गई थी।

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