झारखंड राज्य निर्वाचन आयोग ने मंगलवार को नगर निकाय चुनाव की तारीखों का एलान कर दिया है। करीब 34 माह के अफसरों के राज के बाद रांची में फिर शहर की अपनी सरकार सरकार होगी। 23 फरवरी को मतदान होगा और 27 फरवरी को शहर की सरकार के चेहरे सबसे सामने होंगे। इसके बाद शहर की करीब 15 लाख आबादी को अफसरों की चिरौरी से मुक्ति मिलेगी। निकाय चुनाव की घोषणा के साथ ही शहर के 53 वार्डों में राजनीति की बिसात बिछने लगी है। लंबे समय से जनता के बीच में अपनी जगह बनाने में जुटे नेता अब पूरी तरह सक्रिय हो गए हैं। वार्डों के आरक्षण से कई नेताओं का समीकरण बिगड़ गया था। अब आरक्षण से बिगड़े खेल को बनाने में जुटे नेता कहीं पत्नी तो कहीं, भाभी तो कहीं बहन को राजनीति में उतारने में जुटे हैं। क्योंकि, रांची नगर निगम के 53 वार्डों में 27 वार्ड सामान्य वर्ग के लिए है। वहीं, 11 वार्ड अनुसूचित जनजाति (एसटी), 2 वार्ड अनुसूचित जाति(एससी), 4 वार्ड पिछड़ा वर्ग -2 (ओबीसी-2) के लिए, 9 वार्ड अत्यंत पिछड़ा वर्ग-1 (ओबीसी-1) के लिए आरक्षित किया गया है। इसमें कुल 25 वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। वार्डों के आरक्षण से निवर्तमान पार्षदों का खेल पूरी तरह बिगड़ गया है। इसमें पांच निवर्तमान पार्षद ऐसे हैं जो चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। इसमें वार्ड नंबर 11, 15,17,26,27 है। वहीं, पांच ऐसे निवर्तमान पार्षद हैं, जिनका वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित हो गया हैं। ऐसे में वे अपनी पत्नियों को चुनाव के मैदान में उतारने की तैयारी में जुट गए हैं। इसमें वार्ड नंबर 2 से निवर्तमान पार्षद गुुंदरा उरांव की पत्नी सरिता देवी, वार्ड 10 से संगीता देवी, वार्ड 14 से रूपा रानी, वार्ड 35 से रजनी लिंडा, वार्ड 42 से ममता देवी चुनाव लड़ेगी। दो वार्ड 22 और 32 ऐसे हैं जहां निवर्तमान पार्षद महिलाएं थी,लेकिन अब वे वार्ड महिला आरक्षण से मुक्त हो गए हैं। ऐसे में वार्ड 22 से मो. असलम और 32 से संजय कुमार इस बार मोर्चा संभालेंगे। वहीं, वार्ड नंबर 30 ऐसा है जहां से निवर्तमान पार्षद की भाभी चुनाव लड़ेगी। बड़ा सवाल… जिस दिन चुनाव उसी दिन इंटर कंपलसरी कोर लैंग्वेज की परीक्षा घोषित कार्यक्रम के अनुसार 23 फरवरी को नगर निकाय चुनाव कराए जाएंगे, जबकि इसी दिन इंटरमीडिएट कला, विज्ञान और वाणिज्य संकाय की कंपलसरी कोर लैंग्वेज की परीक्षा भी निर्धारित है। स्थिति को और जटिल बनाता है यह तथ्य कि 11वीं की परीक्षा 25 और 26 फरवरी को पहले से निर्धारित है। वहीं, नगर निकाय चुनाव के मद्देनज़र शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति, मतदानकर्मियों की सूची और चुनाव से संबंधित अनिवार्य प्रशिक्षण भी इसी अवधि में विभाग को कराना है। बोर्ड परीक्षा की तिथियां पहले ही घोषित की जा चुकी हैं और स्कूल-कॉलेजों को उसी के अनुसार परीक्षा केंद्र, वीक्षक और प्रशासनिक व्यवस्था तय करनी होती है। चुनाव की घोषणा के बाद परीक्षा को लेकर व्यावहारिक संकट खड़ा हो गया है। 53 वार्डों में 909 बूथों पर 10,27,723 वोटर डालेंगे वोट, आचार संहिता लागू निकाय चुनाव की घोषणा के साथ ही पूरे नगर रांची नगर निगम क्षेत्र में आदर्श आचार संहित लागू हो गयी है। मंगलवार को शाम में डीडीसी सौरव कुमार भुवानिया ने समाहरणालय में पत्रकारों से बात करते हुए बताया कि रांची नगर निगम क्षेत्र में कुल 53 वार्ड हैं। इसमें कुल 909 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। इसमें 275 केन्द्र सामान्य है। 507 संवेदनशील और 128 अति संवेदनशील बूथ हैं। इतने बूथों पर कुल 10,27,723 मतदाता अपने मतों का इस्तेमाल करेंगे। इसमें 518695 पुरुष और 508971 महिला एवं 57 थर्ड जेंडर मतदाता हैं। वहीं नगर पंचायत बुंडू में कुल 13 वार्ड हैं। इसके लिए कुल 16 मतदान केंद्रों बनाए गए हैं। इसमें कुल 16,625 वोटर अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इसमें पुरूष मतदाताओं की संख्या 8,168 और 8,457 महिला मतदाता हैं। चुनाव दलीय नहीं फिर भी दल की दिखेगी ताकत, भाजपा को घेरने की रणनीति तेज नगर निकाय चुनाव दलीय नहीं हो रहा है। इसके बावजूद इसमें राजनीतिक दलों की ताकत दिखेगी। क्योंकि, सभी दल अप्रत्यक्ष रूप से उम्मीदवारों का समर्थन करेंगे। रांची में पिछले दो बार के नगर निगम चुनाव के आंकड़े को माने तो वर्ष 2013 और वर्ष 2018 के चुनाव में शहर की सरकार पर भाजपा समर्थित उम्मीदवारों का कब्जा रहा है। मेयर और डिप्टी मेयर भाजपा के रहे। वहीं, 53 वार्ड में 27 वार्डों पर भाजपा समर्थित उम्मीदवार पार्षद बने थे। जबकि, दूसरे स्थान पर कांग्रेस थी। कांग्रेस समर्थित उम्मीदवारों ने 13 वार्डों में जीत दर्ज की थी। तीसरे स्थान पर झामुमो थी जिसे मात्र 9 वार्ड और चौथे स्थान पर राजद थी, जिसके समर्थित उम्मीदवार 4 सीट पर जीते थे। लेकिन इस बार महागठबंधन की सरकार भाजपा के तिलिस्म को भेदने में जुटे हैं। इसकी झलक वार्डों के आरक्षण में साफ दिखी है।


