पर्वतीय संस्कृति में रंगा लखनऊ, उत्तरायणी कौथिग की धूम:लोकगीतों, नृत्यों और सम्मान समारोह से जीवंत हुआ संस्कृति उपवन

उत्तरायणी कौथिग 2026 के रजत जयंती वर्ष का 14वां दिन पर्वतीय संस्कृति के रंग में पूरी तरह रंगा नजर आया। बीरबल साहनी मार्ग स्थित पंडित गोविन्द बल्लभ पंत पर्वतीय सांस्कृतिक उपवन में उत्साह, परंपरा और भावनाओं का सुंदर संगम दिखा। लोकधुनों की गूंज और तालियों की आवाज देर रात तक माहौल को जीवंत बनाती रही। कार्यक्रम की शुरुआत नन्हे कलाकारों की देशभक्ति गीतों और नृत्य प्रस्तुतियों से हुई। मासूम आवाजों और भावपूर्ण भाव-भंगिमाओं ने दर्शकों को भावुक कर दिया। इसके बाद आज़ाद नगर, सरोजनी नगर, आरडीएसओ, तेलीबाग समेत विभिन्न क्षेत्रों से आए सांस्कृतिक दलों ने पारंपरिक झोड़ा नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। लोकगायकों की प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को आकर्षित किया इसी क्रम में योग वेदांत सेवा समिति, लखनऊ की ओर से मातृ-पितृ पूजन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस आयोजन ने पूरे वातावरण को भावनात्मक बना दिया। नई पीढ़ी को माता-पिता के सम्मान और सेवा का संदेश दिया गया। उपस्थित लोगों ने वैलेंटाइन डे के बजाय मातृ-पितृ पूजन दिवस के रूप में मनाने का संकल्प लिया। इस अवसर पर विभिन्न शाखाओं के पदाधिकारियों को सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम के दौरान साहित्य, नाट्य, महिला, युवा और आजीवन उपलब्धि जैसे कई प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किए गए। साथ ही ‘पर्वत संदेश’ पत्रिका के आवरण पृष्ठ का विमोचन हुआ। उत्तराखंड से आए प्रसिद्ध लोकगायकों की प्रस्तुतियों ने समां बांध दिया। वहीं उत्तराखंडी पारंपरिक खानपान प्रतियोगिता भी आकर्षण का केंद्र रही, जिसमें उत्कृष्ट प्रतिभागियों को प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कार दिए गए।
झोड़ा प्रतियोगिता में दर्शक खूब झूमे झोड़ा, छपेली, पेंटिंग और खानपान प्रतियोगिताओं में प्रतिभागियों ने अपनी रचनात्मकता का शानदार प्रदर्शन किया। मंजू नेगी, जानकी पाठक, सरस्वती रावत, दीपा ऐरी, राजेंद्र बिष्ट और भावना अधिकारी के नेतृत्व में हुई झोड़ा प्रतियोगिता ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। उत्तरायणी कौथिग का यह दिन संस्कृति, सम्मान और सामाजिक संदेशों से भरपूर रहा।

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